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कुमार - kumars - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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कुमार - kumars
कुमार - kumars
38 unique murli dates in this topic
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38 murlis in हिंदी
08/10/1981
“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”
29/10/1981
“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
31/12/1981
“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
08/04/1982
“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
21/02/1983
“शान्ति की शक्ति”
24/04/1983
“रूहानी पर्सनैलिटी”
27/04/1983
“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”
07/05/1983
“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
11/05/1983
“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
08/04/1984
“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”
10/04/1984
“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”
11/05/1984
“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
30/01/1985
“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”
15/01/1986
“सस्ता सौदा और बचत का बजट”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
27/11/1989
“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
31/12/1997
“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
31/12/2001
“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''
24/02/2002
“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
15/11/2003
“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''
07/03/2005
“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''
18/01/2008
“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”