कुमार - kumars
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08/10/1981“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”29/10/1981“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”31/12/1981“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”03/04/1982“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”08/04/1982“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”21/02/1983“शान्ति की शक्ति”24/04/1983“रूहानी पर्सनैलिटी”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”07/05/1983“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”11/05/1983“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”23/05/1983“छोड़ो तो छूटो!”08/04/1984“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”11/05/1984“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”30/01/1985“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”15/01/1986“सस्ता सौदा और बचत का बजट”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”30/01/1988“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”31/12/1997“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''24/02/2002“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''15/11/2003“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''07/03/2005“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”
