हिंदी Murlis — 1987
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18/01“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”21/01“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”23/01“सफलता के सितारे की विशेषतायें”20/02“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”18/03“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”20/03“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”01/10“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”05/10“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”09/10“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”14/10“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”17/10“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”21/10“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”25/10“चार बातों से न्यारे बनो”29/10“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”02/11“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”06/11“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”10/11“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”14/11“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”18/11“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”22/11“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”27/11“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”06/12“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”10/12“तन, मन, धन और सम्बन्ध का श्रेष्ठ सौदा”14/12“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”18/12“कर्मातीत स्थिति की गुह्य परिभाषा”23/12“मनन शक्ति और मगन स्थिति”27/12“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”31/12“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
