प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब कर्नाटक के बीदर स्थित रामपुरी कॉलोनी के पर्यावरण-अनुकूल रिट्रीट सेंटर ‘राज ऋषि वन’ में विश्व की पहली आध्यात्मिक सेना ‘शिव शक्ति पांडव सेना’ (SSPS) का भव्य पासिंग आउट परेड गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह अनूठी पहल युवाओं में शारीरिक क्षमता, आध्यात्मिक शक्ति, अनुशासन, आत्मसंयम और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य अतिथि के रूप में कर्नल बी. सी. सती तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद सागर खंडरे की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय, माउंट आबू के सुरक्षा प्रमुख एवं सिक्योरिटी सर्विसेज विंग (SSW) के वरिष्ठ राष्ट्रीय समन्वयक, सेवानिवृत्त कर्नल बी. सी. सती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कर्नाटक के युवा सांसद सागर खंडरे ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
तीन माह का सघन शारीरिक एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षण
सिक्योरिटी सर्विसेज विंग और सोशल सर्विस विंग के संयुक्त मार्गदर्शन में इस विशेष आध्यात्मिक एवं सेवा-उन्मुख दल का गठन किया गया। प्रशिक्षण का नेतृत्व प्रसिद्ध लाइफ कोच एवं प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. ई. वी. स्वामीनाथन, पूर्व एनएसजी कमांडो बी.के. गुरुमूर्ति तथा सेवानिवृत्त कर्नल मनोज लेंका ने किया।
तीन माह के इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक माह का ऑनलाइन प्रशिक्षण तथा दो माह का आवासीय मैदानी प्रशिक्षण शामिल था। इसमें 28 युवा कुमारों के साथ बीदर सेवाकेंद्र की 13 समर्पित शिक्षिका बहनों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल 41 कैडेट्स ने कठिन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।
कैडेट्स की दिनचर्या प्रातः 3:30 बजे अमृतवेला योग साधना से प्रारंभ होकर रात्रि 10 बजे तक चलती थी। प्रशिक्षण में राजयोग मेडिटेशन, शारीरिक व्यायाम, पीटी ड्रिल, 40 फीट ऊँची दीवार पर चढ़ना, तैराकी, क्रॉस-कंट्री रनिंग, सात्विक पाक-कला, स्वच्छता तथा निद्रा पर नियंत्रण के विशेष अभ्यास शामिल थे। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और भारत स्काउट्स एवं गाइड्स द्वारा आपातकालीन बचाव कार्यों और प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
अनुशासित परेड एवं साहसिक प्रदर्शन ने किया सभी को प्रभावित
परेड कमांडर बी.के. चंदन के नेतृत्व में सभी 41 कैडेट्स ने अनुशासित मार्च पास्ट करते हुए मुख्य अतिथि को सलामी दी तथा राष्ट्र और विश्व कल्याण के लिए सामूहिक प्रतिज्ञा दोहराई।
समारोह के दौरान कैडेट्स ने 40 फीट ऊँची दीवार पर रस्सियों के सहारे चढ़ने, अग्नि से घिरे चक्र के बीच से छलांग लगाने तथा प्राकृतिक आपदा की स्थिति में घायल व्यक्ति को अस्थायी स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित निकालने और प्राथमिक उपचार देने का प्रदर्शन किया। इन साहसिक एवं सेवा-आधारित प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को प्रभावित किया।
आंतरिक विकारों पर विजय ही सच्ची वीरता: कर्नल बी. सी. सती
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त कर्नल बी. सी. सती ने भारतीय सेना में अपने 33 वर्षों के सेवाकाल तथा 17,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित कारगिल युद्ध क्षेत्र में राजयोग से प्राप्त अनुभवों को साझा किया।
उन्होंने प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि बाहरी सीमाओं की रक्षा करने से पहले मन के भीतर छिपे शत्रुओं—काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और आलस्य—पर विजय प्राप्त करना आवश्यक है। उनके अनुसार, आत्मविजय और आत्मानुशासन ही सच्ची वीरता के आधार हैं।
सांसद सागर खंडरे ने ब्रह्माकुमारीज़ की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति यदि आत्मानुशासन, श्रेष्ठ चरित्र और सकारात्मक मूल्यों से संपन्न होगी, तो देश को विश्व गुरु बनाने का स्वप्न साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगी।
कैडेट्स का सम्मान एवं स्मारिका का विमोचन
समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को शील्ड एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ‘शिव शक्ति पांडव सेना’ की स्मारिका का विमोचन भी किया गया, जिसमें इस प्रेरणादायी पहल की भावना और उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर राज ऋषि वन की निदेशिका बी.के. सुमंगला दीदी एवं बीदर सेवाकेंद्र की प्रभारी बी.के. सुनंदा दीदी ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, कैडेट्स तथा अभिभावकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
आध्यात्मिकता, अनुशासन, साहस और सेवा का संगम
‘शिव शक्ति पांडव सेना’ की यह ऐतिहासिक पहल इस संदेश को सशक्त करती है कि सच्ची शक्ति केवल शारीरिक सामर्थ्य में नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, आत्मसंयम, श्रेष्ठ संस्कारों और सेवा-भावना में निहित है। राजयोग मेडिटेशन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के समन्वय से यह पहल युवाओं को आंतरिक विकारों पर विजय प्राप्त करने, आपदा के समय मानवता की सेवा करने तथा राष्ट्र और विश्व के कल्याण में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।
यह पासिंग आउट परेड केवल प्रशिक्षण की पूर्णता का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मविजय, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से एक सशक्त, संस्कारवान एवं श्रेष्ठ भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरणादायी संकल्प है।
























