कासरगोड़ के तालिपाड्पु मैदान में 08 अक्टूबर 2025 को आयोजित ‘धर्म संदेश यात्रा (मातृभूमि)’ कार्यक्रम ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना को सशक्त बनाया।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्दपुरी ने कहा कि “साधुओं का स्वागत और सम्मान केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत की आत्मा है।” उन्होंने आगे कहा कि धर्म, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करना और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ कासरगोड़ केंद्र ने अपने शांतिपूर्ण और सकारात्मक वातावरण से कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।
धर्मसंघ यात्रा के मुलियार पहुँचने पर स्थानीय निवासियों ने साधु-संतों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। मालाएँ पहनाई गईं और भव्य जुलूस निकाला गया। इस यात्रा में त्रिप्रयार, एरणाकुलम, कोट्टायम, कोल्लम, अलप्पुझा, पत्तनमतिट्टा, पालयम, कोझिकोड, मल्लपुरम, कन्नूर और कासरगोड़ के संत शामिल थे।
कार्यक्रम का आयोजन मुलियार महाविष्णु मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय निवासियों के सहयोग से हुआ, जिससे लगभग 900 लोगों ने लाभ प्राप्त किया।

















