गहन श्रद्धा एवं भावपूर्ण स्मृति के साथ सूचित किया जाता है कि ब्रह्माकुमारीज़ सायन-माटुंगा सेवाकेंद्र, मुंबई की वरिष्ठ सेवाधारी राजयोगिनी बी.के. वंदना बहन ने 16 जून 2026 को अपनी भौतिक देह का त्याग कर परमपिता शिवबाबा की गोद में स्थान प्राप्त किया। उनके अव्यक्त गमन से ब्रह्माकुमारीज़ परिवार ने एक समर्पित, सेवाभावी, कर्मयोगी एवं प्रेरणादायी आत्मा को खो दिया है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वरीय सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित किया।
बी.के. वंदना बहन का जन्म वर्ष 1966 में महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक धार्मिक एवं संस्कारी परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्हें नृत्य, कला, कविता, पूजा-पाठ तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में विशेष रुचि थी। वर्ष 1975 में उन्हें ब्रह्माकुमारीज़ के ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति हुई। छोटी आयु में ही उन्होंने परमात्मा शिव के ज्ञान को आत्मसात किया और विशेष रूप से “शिव और शंकर के अंतर” की गहन समझ ने उनके जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की।
वर्ष 1978 में उन्हें माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय जाकर वरिष्ठ दादियों एवं बाबा का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। बाबा से प्राप्त प्रेरणाओं ने उनके जीवन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। परमात्मा के प्रति गहरे प्रेम और सेवा भावना से प्रेरित होकर उन्होंने वर्ष 1992 में अपना जीवन पूर्ण रूप से ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
मुंबई, औरंगाबाद तथा अन्य अनेक स्थानों पर सेवा देते हुए उन्होंने आध्यात्मिक जागरण का महत्वपूर्ण कार्य किया। वर्ष 1991 से वे माटुंगा क्षेत्र में निरंतर सेवा कर रही थीं। उनके कुशल नेतृत्व में अनेक आध्यात्मिक, सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित कार्यक्रमों का सफल आयोजन हुआ। उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों भाई-बहनों ने राजयोग मेडिटेशन, ईश्वरीय ज्ञान और आध्यात्मिक जीवनशैली का अनुभव प्राप्त कर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाया।
वंदना बहन का जीवन सादगी, अनुशासन, समयनिष्ठा, निःस्वार्थ सेवा, बड़ों के प्रति सम्मान तथा ईश्वर पर अटूट विश्वास का सुंदर उदाहरण था। वे नियमित योग-साधना, मुरली चिंतन और सेवा को जीवन की सफलता का आधार मानती थीं। वे सभी को दिल की सच्चाई और सफाई रखने, बड़ों के मार्गदर्शन में चलने तथा प्रत्येक आत्मा की विशेषताओं को देखने की प्रेरणा देती थीं।
उनका संदेश था कि परिस्थितियों से घबराने के बजाय बाबा की याद, स्वमान और आत्मबल के आधार पर विजयी बनना चाहिए। वे अक्सर कहा करती थीं कि हमें स्वयं भी शक्तिशाली बनना है और दूसरों को भी बाबा की याद, मुरली और सेवा के माध्यम से शक्तिशाली बनाना है। उनका संपूर्ण जीवन इस सत्य का जीवंत प्रमाण रहा कि सच्चा समर्पण, निश्चय और योग आत्मा को निरंतर आगे बढ़ाते हैं।
उनके अंतिम दर्शन हेतु उनके पार्थिव शरीर को 17 जून 2026, प्रातः 9:00 बजे से 10:30 बजे तक मानव सेवा संघ, सायन, मुंबई में रखा जाएगा। तत्पश्चात उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार हेतु ले जाया जाएगा।
उनकी स्मृति में उनका यह प्रेरणादायी संदेश सदैव मार्गदर्शन देता रहेगा—
“एक दीपक स्वयं जलकर चारों ओर प्रकाश फैलाता है, एक वृक्ष अपने फल, फूल और छाया से सबको देने की प्रेरणा देता है, और महान आत्माएँ अपने जीवन द्वारा श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।”
साथ ही उनका यह अमूल्य संदेश भी सदैव स्मरणीय रहेगा—
“एक बल, एक भरोसा — सर्वशक्तिमान परमात्मा का सहारा लेकर आगे बढ़ो। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, निश्चयबुद्धि बनकर विजयी बनना है।”
राजयोगिनी बी.के. वंदना बहन का संपूर्ण जीवन ईश्वरीय प्रेम, समर्पण, सेवा और आध्यात्मिक श्रेष्ठता का प्रकाशस्तंभ रहा। उनकी सेवाएँ, शिक्षाएँ, स्नेहिल व्यवहार और प्रेरणादायी स्मृतियाँ ब्रह्माकुमारीज़ परिवार एवं समाज के हृदयों में सदैव जीवित रहेंगी। परमात्मा शिवबाबा से प्रार्थना है कि हम सभी उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में धारण करें।































