26 जून 2026 को आमथला स्थित मातेश्वरी पीस गार्डन तपोवन में आयोजित संस्कार शुद्धि योग साधना तपस्या कुंड के उद्घाटन अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम पूर्व मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती (मम्मा) की दिव्य स्मृतियों को समर्पित एक महत्वाकांक्षी परियोजना मम्मा स्मृति अन्नपूर्णा ज्ञान कलश के निर्माण की घोषणा की गई।
कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग के उपाध्यक्ष बीके राजू भाई ने जानकारी देते हुए बताया कि
निर्माणाधीन अन्नपूर्णा ज्ञान कलश लगभग 23 फीट चौड़ा तथा 25 फीट ऊंचा होगा। यह केवल एक स्थापत्य नहीं, बल्कि मम्मा के त्याग, तपस्या, ज्ञान, सेवा और असीम ममतामयी व्यक्तित्व का जीवंत प्रतीक बनेगा, जो आने वाली पीढ़ियों को आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करेगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत
साधकों के लिए शांत एवं एकांत वातावरण में योग, चिंतन और तपस्या हेतु निवास की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। विशेष रूप से ऐसे मौन साधना कक्ष बनाए जा रहे हैं, जहाँ किसी भी प्रकार का शोर, मोबाइल, कमेंट्री या संगीत नहीं होगा। साधकों को कम से कम 10 घंटे मौन तपस्या का अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे मन, वाणी और मोबाइल—तीनों का मौन आत्मिक उन्नति का आधार बन सके।
प्राकृतिक सौंदर्य एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह परिसर लगभग एक बीघा क्षेत्र में विकसित मातेश्वरी पीस गार्डन तथा छह बीघा में फैले सरस्वती उद्यान के मध्य स्थित है। यह स्थान भविष्य में 24 घंटे अखंड योग एवं तपस्या का एक विशिष्ट आध्यात्मिक केंद्र बनने की दिशा में विकसित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग की अध्यक्षा बीके सरला दीदी, उपाध्यक्ष बीके राजू भाई, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके रुक्मणी दीदी, वड़ोदरा (अटलादरा) सेवा केंद्र की प्रभारी बीके अरुणा दीदी, कासगंज से बीके सरोज दीदी, चित्तूर से बीके वसुधा बहन सहित अनेक वरिष्ठ भाई-बहनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
लगभग 500 ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों ने कार्यक्रम में सहभागिता कर योग, तपस्या और संस्कार शुद्धि के संकल्प को सशक्त बनाया। बीके ललन भाई ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
अपने प्रेरणादायी संदेश में बीके राजू भाई ने कहा कि यह तपस्या कुंड मन, मुख और मोबाइल के मौन के साथ एकांत में 24 घंटे अखंड योग-तपस्या का अद्वितीय केंद्र होगा, जो आत्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम बनेगा।
बीके रुक्मणी दीदी ने भोग संदेश देते हुए कहा कि
योग और तपस्या ही वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आत्मा को अचल, स्थिर और शक्तिशाली बनाए रखती है। उन्होंने इस नवीन आध्यात्मिक पहल को बाबा की नवीनता का प्रत्यक्ष उदाहरण बताते हुए कहा कि यह स्थान भविष्य में अनेक आत्माओं के लिए प्रेरणा, शांति और ईश्वरीय अनुभूति का केंद्र बनेगा।





























