1 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित ऐतिहासिक थोडो ग्राउंड में आयोजित “पासवर्ड फॉर हैप्पीनेस” कार्यक्रम अत्यंत भव्य एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा। इस विशेष आयोजन में ब्रह्माकुमारीज़ की अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता बीके सिस्टर शिवानी के दिव्य एवं प्रेरणादायक प्रवचनों को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग दूर-दूर से उपस्थित हुए। पूरे परिसर में शांति, आत्मिक जागरूकता और सकारात्मकता का वातावरण व्याप्त रहा।


अपने ओजस्वी उद्बोधन में सिस्टर शिवानी ने
जीवन में सच्ची खुशी के मूल सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि “संस्कार से संसार बनता है”, इसलिए हमें अपने संस्कारों को शुद्ध और सशक्त बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे बताया कि हर संकल्प से हमारी सृष्टि का निर्माण होता है—हमारा स्वास्थ्य, हमारे संबंध, हमारे घर का वातावरण—सब हमारे विचारों पर आधारित होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “संकल्प से सिद्धि होती है”, अर्थात हमारे विचारों में अपार शक्ति निहित है।

सिस्टर शिवानी ने यह भी समझाया कि
आज मनुष्य अपनी सोच और भावनाओं के लिए बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर हो गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारी आंतरिक स्थिति ही हमारी बाहरी दुनिया को प्रभावित करती है। उन्होंने सभी को यह प्रेरणा दी कि यदि हम अपने विचारों को सकारात्मक, शांत और स्थिर रखें, तो किसी भी परिस्थिति में संतुलित और प्रसन्न रह सकते हैं।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री विक्रमादित्य सिंह एवं समाज कल्याण मंत्री श्री धनीराम सांडिल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर सिस्टर शिवानी ने दोनों अतिथियों को ईश्वरीय स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों—एलआर ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट्स के डायरेक्टर, शूलिनी यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर तथा एसआईएलबी इंस्टिट्यूट की डायरेक्टर—को भी उनके योगदान हेतु मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन चंडीगढ़ से पधारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके कविता द्वारा किया गया। यह संपूर्ण आयोजन सोलन सेवा केंद्र की संचालिका बीके सुषमा दीदी के स्नेहिल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम से पूर्व बीके सिस्टर शिवानी का स्थानीय ब्रह्माकुमारीज़ परिवार द्वारा भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। साथ ही उन्हें सोलन की मनोहारी वादियों का अवलोकन कराया गया, जिससे इस आध्यात्मिक यात्रा में प्रकृति की शांति और सौंदर्य का भी सुंदर संगम देखने को मिला।



















