
09 - क्या हम अपनी हर प्रतिक्रिया को सही ठहराते हैं?
BK Shivani
Essence
हम अक्सर कहते हैं—
"मैंने गुस्सा किया... क्योंकि सामने वाले की गलती थी।" "मुझे बुरा लगा... यह तो स्वाभाविक है।" "मेरी जगह कोई भी होता, तो ऐसा ही करता..."
लेकिन...
क्या हर बार अपनी प्रतिक्रिया को सही ठहराना वास्तव में हमें सही साबित करता है... या फिर यही हमारी सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है?
क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि... परिस्थिति बदलने से पहले, हमें अपने ही सोचने के तरीके पर सवाल उठाना पड़े? और अगर हर बार हम यही कहते रहें कि... "मैं सही था..." तो क्या बदलाव की शुरुआत कभी हो पाएगी?
Being Bliss का यह भाग एक ऐसे प्रश्न के सामने खड़ा करता है, जो शायद हमें यह देखने के लिए प्रेरित करे कि हमारी सबसे बड़ी चुनौती परिस्थिति नहीं... बल्कि उसे सही ठहराने की आदत तो नहीं?



