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Apni Dharti Ko Bachaye Aao

Apni Dharti Ko Bachaye Aao

Vishal Kothari, Priyani Vani

5:30
Apni Dharti Ko Bachaye Aao

Apni Dharti Ko Bachaye Aao

Vishal Kothari, Priyani Vani

0:005:30

Lyrics

अपनी धरती को बचाए

आओ ऐसा कदम उठाए

सोने के भारतको आओ

फिरसे मिलके सजाए

फिरसे मिलके सजाए

अपनी धरती को बचाए

आओ ऐसा कदम उठाए

सोने के भारतको आओ

फिरसे मिलके सजाए

फिरसे मिलके सजाए

गाव गाव हो हरियाली हो

गाव गाव हरियाली होगी सबमें खुशहाली

गाव गाव हरियाली होगी सबमें खुशहाली

अपनी धरती को बचाए

 

सुखदाई राहे शीतल हवाएं खुशनुमा था मौसम

निर्मल धार फूलों की महकसे बीत रहा था जीवन

आज ही संकल्प ले ये लाएंगे फिर वो बहार

लगाएंगे पौधे इतने सबको बाटेंगे प्यारा प्यार

नजर अंदाज करे कितना हकीकतको कौन छुपाए

अपनी धरती को बचाए

 

मुस्कुराता हुआ आसमा क्यों रो रहा है

सबके गम हरने वाले खुद क्यों गम में डूबा है

कोई क्या खाएं क्या हम सोचना ये है जरूरी

इसके बिना हर जिंदगी बिल्कुल ही है अधूरी

वक्त कहता है जाग उठो

सारे जग को आओ जगाए

अपनी धरती को बचाए

 

तपती धरती धुंदला अम्बर हमसे पूछ रहे है

उजड़े उपवन सूखे तलाव प्यासे ताक रहे है

मैदान है पेड़ पौधे प्रकृति की देन

निरोगी काया मिलती इन्हीं से सच्ची होती रेन

यही सच्ची दौलत है संपन्नता इससे पाए

 

अपनी धरती को बचाए

आओ ऐसा कदम उठाए

सोने के भारतको आओ

फिरसे मिलके सजाए

फिरसे मिलके सजाए

अपनी धरती को बचाए

आओ ऐसा कदम उठाए

सोने के भारतको आओ

फिरसे मिलके सजाए

फिरसे मिलके सजाए

गाव गाव हरियाली होगी सबमें खुशहाली

गाव गाव हरियाली होगी सबमें खुशहाली

गाव गाव हरियाली होगी सबमें खुशहाली

गाव गाव हरियाली होगी सबमें खुशहाली

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