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Puchhati Hai Dhara Puchhata Hai
प्रकृति की पुकार · 5:12
Lyrics
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
इन पे सारी सृष्टि चलती फिर क्यूं हम ये जाते भूल
चाहते गर दुनियां में चाहते गर दुनियां में हम सब जिंदा रहना
बहुत ही जरूरी है अब इनका भी तो होना
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
पेड़ों से रक्षा पाते है इनके सहारे चलते है
हवाओं को निर्मल कर के ये सब में सुख भर देते है
भुख हमारी मिटाते है इनके प्यार में पलते है
चिमचिमाती धूप सहन कर शीतल छाया देते है
चाहते गर दुनियां में चाहते गर दुनियां में हम सब जिंदा रहना
बहुत ही जरूरी है अब इनका भी तो होना
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
अनमोल खज़ाने हैं ये इनको आओ बढ़ाते चलें
एक एक नहीं हम सब हजारों पौधें लगाते चलें
संकल्प ले आज यही हमको ही कर के दिखाना है
उजड़ रहा जो विश्व चमन में फिर से हमको सजाना है
चाहते गर दुनियां में चाहते गर दुनियां में हम सब जिंदा रहना
बहुत ही जरूरी है अब इनका भी तो होना
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
बीज से पौधा पौधे से पेड़
पेड़ों से मिलता फल और फूल
इन पे सारी सृष्टि चलती फिर क्यूं हम ये जाते भूल
चाहते गर दुनियां मेंचाहते गर दुनियां में हम सब जिंदा रहना
बहुत ही जरूरी है अब इनका भी तो होना
बहुत ही जरूरी है अब इनका भी तो होना
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