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मन की खेती – बुद्ध और किसान की कहानी

मन की खेती – बुद्ध और किसान की कहानी
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Key Takeaway

जिस प्रकार किसान अपने खेत की खेती करता है, उसी प्रकार हर व्यक्ति अपने मन की खेती करता है। सकारात्मक संकल्प, संयम और सत्य कर्म मन को उपजाऊ बनाते हैं। जब मन में शुद्ध विचार बोए जाते हैं, तो जीवन में शांति, आनंद और सच्चा सुकून स्वतः फलित होता है

यह कहानी एक बहुत पुरानी घटना से शुरू होती है, जब बुद्ध घर-घर जाकर भिक्षा मांगते थे। एक दिन भिक्षा मांगते हुए वे एक किसान के पास पहुँचे। जैसे ही उन्होंने भिक्षा मांगी, किसान ने प्रश्न किया—

“बुद्ध, मैं आपको भिक्षा क्यों दूँ?”

बुद्ध ने शांत स्वर में मुस्कुराते हुए पूछा,

“तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो?”

किसान ने अपनी बात रखी—

“मैं रोज़ अपने खेतों में हल चलाता हूँ, बीज बोता हूँ, पानी देता हूँ, कड़ी मेहनत करता हूँ। जब फसल होती है तो उसका कुछ हिस्सा बेचता हूँ, कुछ अपने लिए रखता हूँ। मैं अपनी मेहनत का खाता हूँ। लेकिन आपको क्यों दूँ? आप कौन-सी मेहनत करते हैं?”

बुद्ध ने बहुत सहजता और करुणा से किसान के सिर पर हाथ रखा और कहा—

“जिस प्रकार तुम खेती करते हो, उसी प्रकार मैं भी पूरे दिन खेती करता हूँ।”

यह सुनकर किसान चकित रह गया। उसने पूछा—

“आप कैसी खेती करते हैं? आपकी भूमि कौन-सी है? आपके बीज कौन-से हैं?”

बुद्ध ने उत्तर दिया—

“मेरा मन ही मेरी भूमि है।”

फिर उन्होंने आगे समझाया—

“सबसे पहले मैं अपनी भूमि, यानी अपने मन को उपजाऊ बनाता हूँ। उस पर प्रज्ञा रूपी हल चलाता हूँ। जब मैं प्रज्ञा का हल चलाता हूँ, तो मेरा मन नकारात्मकता से मुक्त होकर उपजाऊ हो जाता है। इसके बाद मैं उसमें बीज बोता हूँ।”

किसान ने पूछा—

“कौन-से बीज?”

बुद्ध बोले—

“मैं श्रद्धा के बीज बोता हूँ, करुणा के बीज बोता हूँ और शांति के बीज बोता हूँ।”

किसान ने फिर पूछा—

“और पानी कौन-सा डालते हैं?”

बुद्ध मुस्कुराए—

“मैं तपस्या की शक्ति का जल छिड़कता हूँ। इससे ये बीज अंकुरित होते हैं और मेरे स्वभाव तथा जीवन में परिवर्तन लाते हैं।”

किसान ने कहा—

“यह तो मैं समझ गया, लेकिन जैसे मेरे बैल हल को नियंत्रित करते हैं, वैसे आपके हल को कौन नियंत्रित करता है?”

बुद्ध ने उत्तर दिया—

“मेरे विचार मेरे हल को नियंत्रित करते हैं। जब मेरे विचार नकारात्मकता से मुक्त होते हैं, तो मेरे संकल्प मेरे मन को पूरी तरह नियंत्रण में रखते हैं। और जैसे तुम अपने हल की धार तेज करते हो, वैसे ही मैं स्मृति और जागरूकता से अपने हल की धार को सदा तेज रखता हूँ।”

अब किसान पूरी तरह भावविभोर हो चुका था। उसने पूछा—

“जब आपकी फसल आती है, तो उसका आधार क्या होता है?”

बुद्ध ने कहा—

“मेरे जीवन का संयम और मेरे द्वारा किए गए सत्य कर्म ही मेरी सफलता का आधार हैं।”

किसान ने अंतिम प्रश्न किया—

“और बुद्ध, आपकी फसल क्या है?”

बुद्ध मुस्कुराए और बोले—

“मेरे मन की फसल है—शांति, आनंद और निर्वाण। इनकी प्राप्ति से मुझे अतींद्रिय सुख का अनुभव होता है और जीवन में सच्चा सुकून आ जाता है।”

यह कहकर बुद्ध शांत हो गए।

उस किसान का मन पूरी तरह बदल चुका था। उसे समझ आ गया कि जैसे वह खेत में बीज बोता है, वैसे ही हर मनुष्य अपने मन रूपी खेत में शुभ संकल्पों के बीज बो सकता है।

कहानी का सार

  1. 1हमारे संकल्प ही हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं
  2. 2सत्यता और संयम ही वास्तविक सफलता का आधार हैं
  3. 3नकारात्मक विचारों से मुक्ति मन को उपजाऊ बनाती है
  4. 4श्रेष्ठ संकल्प जीवन को शांति, आनंद और संतोष से भर देते हैं

हमारा मन प्रतिदिन लगभग 50,000 संकल्प उत्पन्न करता है—अर्थात हम रोज़ 50,000 विचारों की खेती करते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि हम यह देखें कि उनमें से कितने सकारात्मक हैं और कितने नकारात्मक।

जब हम योग, तपस्या और जागरूकता के बल से नकारात्मक संकल्पों को सकारात्मक संकल्पों में बदलते हैं, तभी एक श्रेष्ठ और सुखमय जीवन का निर्माण होता है।

तो क्या आप भी अपने मन में सच्ची खेती करने के लिए तैयार हैं?

श्रेष्ठ संकल्पों के बीज बोइए और प्रज्ञा व तपस्या की खेती से अपने जीवन को सुंदर और आनंदमय बनाइए

कहानी को सुनने और देखने के लिए वीडियो अवश्य देखें।

आज का अभ्यास

जिस प्रकार किसान अपने खेत की खेती करता है, उसी प्रकार हर व्यक्ति अपने मन की खेती करता है। सकारात्मक संकल्प, संयम और सत्य कर्म मन को उपजाऊ बनाते हैं। जब मन में शुद्ध विचार बोए जाते हैं, तो जीवन में शांति, आनंद और सच्चा सुकून स्वतः फलित होता है

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