Showing posts in हिन्दी
क्या केवल यह कहना कि हमें किसी कर्म का परिणाम पता नहीं था, पर्याप्त है? जीवन के कुछ नियम अनजाने में भी हमारे अनुभवों को प्रभावित करते रहते हैं। आइए कर्म के इस विचार को आज समझें।
क्या बाहरी स्वतंत्रता के साथ मन की आज़ादी भी अनुभव होती है? क्या हमारी निर्भरताएँ और दूसरों की राय हमें भीतर से बाँधती हैं? आइए आज इस समझ पर चिंतन करें।