मैं लगभग दस वर्षों तक सिगरेट, गांजा, भांग, खैनी और शराब जैसे घातक व्यसनों का शिकार रहा। 20 वर्ष की उम्र में 'शौक' के रूप में शुरू हुआ यह नशा धीरे-धीरे मेरी आदत नहीं, बल्कि मेरी पहचान बन गया। दिनभर नशे में डूबे रहना मेरी दिनचर्या बन चुकी थी। घर में विरोध होता तो झगड़े होते, परिवार का माहौल अशांत रहता। लगातार नशे के कारण मेरा शरीर कमजोर होता गया, भूख कम हो गई और मेरा स्वभाव अत्यंत उग्र और असंतुलित हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक दिन मारपीट की घटना के कारण मुझे जेल तक जाना पड़ा। लेकिन विडंबना यह रही कि वही जेल मेरे जीवन का निर्णायक मोड़ बन गई।
जेल में ही मेरा संपर्क ब्रह्माकुमारी बहनों से हुआ, जहाँ मुझे आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन की सच्चाई समझने का अवसर मिला। मैंने राजयोग ध्यान का अभ्यास शुरू किया, जिसने मेरे मन को एक नई दिशा और स्थिरता दी। धीरे-धीरे मेरे भीतर सकारात्मक परिवर्तन आने लगे।
पिछले 15 वर्षों से नियमित राजयोग साधना ने मेरे स्वभाव, सोच और स्वास्थ्य-तीनों को पूरी तरह बदल दिया है। क्रोध शांत हो गया, मांसाहार और सभी प्रकार के व्यसन स्वतः ही छूट गए।
मेरे परिवर्तन से प्रेरित होकर 10-12 लोगों ने भी राजयोग अपनाकर नशा मुक्त जीवन शुरू किया।






