
“जब रविवार शांत हो लेकिन भीतर खालीपन महसूस हो, तब यह मेडिटेशन परमात्मा के साथ, प्रेम और सच्चे साथीपन का अनुभव कराता है।”
इस मेडिटेशन के अनुभव के बाद आत्मा अपने भीतर के खालीपन को एक पुकार के रूप में समझती है, जो उसे फिर से परमात्मा से जुड़ने की ओर ले जाती है। आत्मा अनुभव करती है कि परमात्मा उसके बेस्ट फ्रेंड, सच्चे साथी और प्रेम के सागर हैं, जो हर बात बिना जजमेंट के सुनते हैं।
यह मेडिटेशन अकेलेपन और खालीपन को समाप्त करके मन में शांति, प्रेम, सुरक्षा और परम आनंद का अनुभव कराता है। परमात्मा की दिव्य उपस्थिति, प्रेम और शक्ति की किरणें आत्मा को भरपूर करती हैं, जिससे पूरा दिन चलते, बैठते, खाते, पीते हर कर्म में परमात्मा का साथ अनुभव होता है।
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ओम शांति। आराम से बैठें। शरीर को भी ढीला छोड़ें। गहरी सांस लेकर धीरे से छोड़ दीजिए। आज रविवार है, शांत दिवस है। सारे काम पूरे हो चुके हैं। कोई भाग-दौड़ नहीं है। लेकिन फिर भी कुछ कमी-सी, खालीपन-सा महसूस होता है। इसलिए आज ...
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