
“जब रविवार शांत हो लेकिन भीतर खालीपन महसूस हो, तब यह मेडिटेशन परमात्मा के साथ, प्रेम और सच्चे साथीपन का अनुभव कराता है।”
इस मेडिटेशन के अनुभव के बाद आत्मा अपने भीतर के खालीपन को एक पुकार के रूप में समझती है, जो उसे फिर से परमात्मा से जुड़ने की ओर ले जाती है। आत्मा अनुभव करती है कि परमात्मा उसके बेस्ट फ्रेंड, सच्चे साथी और प्रेम के सागर हैं, जो हर बात बिना जजमेंट के सुनते हैं।
यह मेडिटेशन अकेलेपन और खालीपन को समाप्त करके मन में शांति, प्रेम, सुरक्षा और परम आनंद का अनुभव कराता है। परमात्मा की दिव्य उपस्थिति, प्रेम और शक्ति की किरणें आत्मा को भरपूर करती हैं, जिससे पूरा दिन चलते, बैठते, खाते, पीते हर कर्म में परमात्मा का साथ अनुभव होता है।
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ओम शांति। आराम से बैठें। शरीर को भी ढीला छोड़ें। गहरी सांस लेकर धीरे से छोड़ दीजिए।
आज रविवार है, शांत दिवस है। सारे काम पूरे हो चुके हैं। कोई भाग-दौड़ नहीं है। लेकिन फिर भी कुछ कमी-सी, खालीपन-सा महसूस होता है। इसलिए आज कुछ क्षण के लिए मैं आत्मा सारे कारोबार से एक छोटा-सा ब्रेक लेकर स्वयं से बात करना चाहती हूँ।
अपने ध्यान को मस्तक के बीच केंद्रित करें। मस्तक के मध्य में मैं एक छोटी बिंदु स्वरूप, शक्ति स्वरूप आत्मा, इस शरीर को चला रही हूँ। आज का यह दिवस खाली-खाली सा लग रहा है। यह शायद एक पुकार है। यह पुकार है फिर से उस परमात्मा से जुड़ने की।
कोशिश कीजिए, इस शरीर से पार उड़कर मैं आत्मा इस भौतिक दुनिया से ऊपर जा रही हूँ। शांति के लोक में, जहाँ चारों ओर केवल प्रकाश ही प्रकाश है। एक सुंदर, दिव्य रोशनी है। और वहाँ, बिल्कुल मेरी तरह, परमात्मा परम शक्ति, महाज्योति के रूप में चमक रहे हैं।
मैं बिल्कुल उनके सम्मुख हूँ। अनुभव करती हूँ, परमात्मा मेरे बेस्ट फ्रेंड हैं। मैं अपनी सारी बातें उनसे साझा कर सकती हूँ। अपने मन की हर भावना शेयर कर सकती हूँ। कोई बात है जो मन में है, कहना चाहते हैं, तो कहिए। वह सुन रहे हैं। बिना जजमेंटल हुए, वह हमारी हर बात सुनते हैं।
वह मेरा सच्चा साथी है। मैं अकेली नहीं हूँ। वह मेरे साथ हैं, हर पल, हर कदम। उनका गहरा प्यार आज मुझे भर रहा है। निर्मल प्रेम की शक्तियों की किरणें जैसे मुझ आत्मा को भरपूर कर रही हैं। मेरा खालीपन समाप्त हो रहा है। परम आनंद मिल रहा है।
यहाँ सिर्फ मैं हूँ और मेरे परमात्मा हैं। इस पूरे ब्रह्मांड में अनुभव होता है कि सृष्टि के मालिक आज मेरे सामने बैठे हैं, मुझे सुन रहे हैं। मैं अपनी सारी बातें, अपनी सारी भावनाएँ निश्चिंत होकर उनको सुना रही हूँ। और वह प्यार से मुझे सुन रहे हैं।
एक आंतरिक खुशी का अनुभव हो रहा है। प्यार और शक्ति की किरणों के रूप में वह मुझे रिस्पॉन्ड दे रहे हैं। उनसे निकलता हुआ दिव्य प्रकाश, जिसकी किरणों रूपी बाहें मुझे अपने साथ जोड़ रही हैं। उनका स्पर्श मुझे परिशुद्ध प्रेम का अनुभव करा रहा है। सम्पूर्णता का अनुभव हो रहा है। कोई खालीपन नहीं, सिर्फ शांति, प्रेम और परम आनंद है यहाँ।
धीरे-धीरे मैं आत्मा परमात्मा को साथ लेकर भौतिक दुनिया में वापस आती हूँ। अपने शरीर के मस्तक के बीच बैठ जाती हूँ और अनुभव करती हूँ। परमात्मा निराकार ज्योति, बिंदु स्वरूप, मेरे मस्तक के बिल्कुल ऊपर हैं। अपनी शक्तियों, प्रेम और शांति की किरणों से मुझे सुरक्षित कर रहे हैं। मुझे साथ दे रहे हैं।
मैं अकेली नहीं हूँ। वह मेरे साथ हैं। आज पूरा दिन चलते, बैठते, खाते, पीते, हर कर्म में मैं यह अनुभव करूँ कि जो कुछ भी कर रही हूँ, परमात्मा मेरे साथ हैं। वह मेरे साथ खाते हैं, साथ उठते हैं, साथ बैठते हैं। उनकी दिव्य उपस्थिति का अनुभव होता है।
आज का यह दिन मेरे लिए अत्यंत सुखद है, क्योंकि आज मुझे सबसे अच्छी कंपनी मिली है। परमात्मा का अनुभव कीजिए। उनकी दिव्य शक्ति का, प्यार का, उनके साथ का अनुभव कीजिए। ओम शांति, शांति, शांति।
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