बालक सो मालिक - Child to Master
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17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”23/07/1969“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”10/06/1971“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”12/11/1972“अलौकिक कर्म करने की कला”08/07/1973“समय की पुकार”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”28/11/1979“प्रवृत्ति में रहते भी निवृत्ति में कैसे रहें?”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”11/04/1981“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”23/12/1987“मनन शक्ति और मगन स्थिति”07/03/1988“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”17/12/1989“सदा समर्थ कैसे बनें?”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”25/02/1991“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”
