संगठन शक्ति - Power of mass / League

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17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”09/10/1971“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”17/05/1972“संगठन रूपी किले को मजबूत बनाने का साधन”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”13/04/1973“भक्त और भावना का फल”06/02/1974“परखने की शक्ति से महारथी की परख”18/07/1974“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”09/01/1975“सम्‍पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्‍न अलबेलापन”16/10/1975“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”09/12/1975“महावीर अर्थात् विशेष आत्माओं की विशेषताएं”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”01/04/1978“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”10/12/1978“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”21/11/1979“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”28/11/1981“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”27/03/1983“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”11/05/1983“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”12/03/1984“सन्तुष्टता”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”22/03/1986“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”31/03/1988‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”30/03/1999“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”

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