स्वयं परिवर्तन - Self Transformation
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19/07/1969“ज़ीरो और हीरो बनो”15/09/1969“याद के आधार पर यादगार”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”24/06/1972“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”06/08/1972“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”04/01/1979“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”24/12/1979“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”26/11/1981“सहयोगी ही सहजयोगी”09/03/1984“परिवर्तन को अविनाशी बनाओ”22/04/1984“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”14/12/1997“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”31/12/1998“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''
