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Thinking about others/Looking at Others-परचिंतन/परदर्शन - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Thinking about others/Looking at Others-परचिंतन/परदर्शन
Thinking about others/Looking at Others-परचिंतन/परदर्शन
32 unique murli dates in this topic
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32 murlis in हिंदी
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
16/06/1972
“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
13/09/1974
“मुरब्बी बच्चे बन अपनी स्टेज को योग-युक्त व युक्ति-युक्त बनाओ”
27/10/1975
“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
23/01/1979
“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”
28/01/1980
“सम्पूर्ण ब्रह्मा और ब्राह्मणों के सम्पूर्ण स्वरूप के अन्तर का कारण और निवारण”
09/02/1980
“मधुबन निवासियों की विशेषता”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
29/03/1982
“सच्चे वैष्णव अर्थात् सदा गुण ग्राहक”
01/04/1982
“भाग्य का आधार त्याग”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
22/03/1986
“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
28/03/2002
“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”
02/02/2004
“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''
20/03/2004
“इस वर्ष को विशेष जीवनमुक्त वर्ष के रूप में मनाओ, एकता और एकाग्रता से बाप की प्रत्यक्षता करो''
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
25/02/2006
“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''