Waver-डगमगाना
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17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”08/06/1972“सम्पूर्ण स्टेज की परख”08/07/1973“समय की पुकार”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”10/01/1977“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”18/01/1977“18 जनवरी का विशेष महत्व”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”15/04/1981“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”26/01/1983“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”30/03/1983“सहजयोगी बनने का साधन - अनुभवों की अथॉरिटी का आसन”04/05/1983“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”04/12/1995“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”18/01/1996“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''31/12/2004“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”
