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Waver-डगमगाना - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Waver-डगमगाना
Waver-डगमगाना
44 unique murli dates in this topic
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43 murlis in हिंदी
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
08/07/1973
“समय की पुकार”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
15/04/1981
“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”
26/01/1983
“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”
30/03/1983
“सहजयोगी बनने का साधन - अनुभवों की अथॉरिटी का आसन”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
18/01/1991
“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
13/03/1998
“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
13/02/1999
“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
31/12/2004
“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''
17/03/2007
“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”