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31 Dec 2004
“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''
31 December 2004 · हिंदी
आज नवयुग रचता बापदादा अपने बच्चों से नव वर्ष मनाने के लिए, परमात्म मिलन मनाने के लिए बच्चों के स्नेह में अपने दूरदेश से साकार वतन में मिलन मनाने आये हैं। दुनिया में तो नव वर्ष की मुबारक एक दो को देते हैं। लेकिन बापदादा आप बच्चों को नव युग और नये वर्ष की, दोनों की मुबारक दे रहे हैं। नया वर्ष तो एक दिन मनाने का है। नवयुग तो आप संगम पर सदा मनाते रहते। आप सभी भी परमात्म प्यार की आकर्षण में खींचते हुए यहाँ पहुंच गये हो। लेकिन सबसे दूरदेश से आने वाला कौन? डबल विदेशी? वह तो फिर भी इस साकार देश में ही हैं लेकिन बापदादा दूरदेशी कितना दूर से आये हैं? हिसाब निकाल सकते हैं, कितने माइल से आये हैं? तो दूरदेशी बापदादा चारों ओर के बच्चों को चाहे सामने डायमण्ड हॉल में बैठे हैं, चाहे मधुबन में बैठे हैं, चाहे ज्ञान सरोवर में बैठे हैं, गैलरी में बैठे हैं, आप सबके साथ जो दूर बैठे देश विदेश में बापदादा से मिलन मना रहे हैं, बापदादा देख रहे हैं सभी कितने प्यार से, दूर से देख भी रहे हैं, सुन भी रहे हैं। तो चारों ओर के बच्चों को नवयुग और नये वर्ष की पदमगुणा मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। बच्चों को तो नवयुग नयनों के सामने है ना! बस आज संगम पर हैं, कल अपने नवयुग में राज्य अधिकारी बन राज्य करेंगे। इतना नजदीक अनुभव हो रहा है? आज और कल की ही तो बात है। कल था, कल फिर से होना है। अपने नव युग की, गोल्डन युग की गोल्डन ड्रेस सामने दिखाई दे रही है? कितनी सुन्दर है! स्पष्ट दिखाई दे रही है ना! आज साधारण ड्रेस में हैं और कल नव युग की सुन्दर ड्रेस में चमकते हुए दिखाई देंगे। नव वर्ष में तो एक दिन के लिए एक दो को गिफ्ट देते हैं। लेकिन नव युग रचता बापदादा ने आप सबको गोल्डन वर्ल्ड की सौगात दी है, जो अनेक जन्म चलने वाली है। विनाशी सौगात नहीं है। अविनाशी सौगात बाप ने आप बच्चों को दे दी है। याद है ना! भूल तो नहीं गये हो ना! सेकण्ड में आ जा सकते हो। अभी-अभी संगम पर, अभी-अभी अपनी गोल्डन दुनिया में पहुंच जाते हो कि देरी लगती है? अपना राज्य स्मृति में आ जाता है ना!
आज के दिन को विदाई का दिन कहा जाता है और 12 बजे के बाद बधाई का दिन कहा जायेगा। तो विदाई के दिन, वर्ष की विदाई के साथ-साथ आप सबने वर्ष के साथ और किसको विदाई दी? चेक किया सदा के लिए विदाई दी वा थोड़े समय के लिए विदाई दी? बापदादा ने पहले भी कहा है कि समय की रफ्तार तीव्रगति से जा रही है, तो सारे वर्ष की रिजल्ट में चेक किया कि क्या मेरे पुरुषार्थ की रफ्तार तीव्र रही? या कब कैसे, कब कैसे रही? दुनिया की हालतों को देखते हुए अब अपने विशेष दो स्वरूपों को इमर्ज करो, वह दो स्वरूप हैं - एक सर्व प्रति रहमदिल और कल्याणकारी और दूसरा हर आत्मा के प्रति सदा दाता के बच्चे मास्टर दाता। विश्व की आत्मायें बिल्कुल शक्तिहीन, दु:खी, अशान्त चिल्ला रही हैं। बाप के आगे, आप पूज्य आत्माओं के आगे पुकार रही हैं - कुछ घड़ियों के लिए भी सुख दे दो, शान्ति दे दो। खुशी दे दो, हिम्मत दे दो। बाप तो बच्चों के दु:ख, परेशानी को देख नहीं सकते, सुन नहीं सकते। क्या आप सभी पूज्य आत्माओं को रहम नहीं आता! मांग रहे हैं - दो, दो, दो...। तो दाता के बच्चे कुछ अंचली तो दे दो। बाप भी आप बच्चों को साथी बना के, मास्टर दाता बनाके, अपने राइट हैण्ड बनाके यही इशारा देते हैं - इतनी विश्व की आत्मायें सभी को मुक्ति दिलानी है। मुक्तिधाम में जाना है। तो हे दाता के बच्चे अपने श्रेष्ठ संकल्प द्वारा, मन्सा शक्ति द्वारा, चाहे वाणी द्वारा, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा, चाहे शुभ भावना शुभ कामना द्वारा, चाहे वायब्रेशन वायुमण्डल द्वारा किसी भी युक्ति से मुक्ति दिलाओ। चिल्ला रहे हैं मुक्ति दो, बापदादा अपने राइट हैण्ड्स को कहते हैं रहम करो।
अभी तक हिसाब निकालो। चाहे मेगा प्रोग्राम किया है, चाहे कॉन्फ्रेन्स की है, चाहे भारत में या विदेश में सेन्टर्स भी खोले हैं लेकिन टोटल विश्व के आत्माओं की संख्या के हिसाब से कितनी परसेन्ट में आत्माओं को मुक्ति का रास्ता बताया है? सिर्फ भारत कल्याणकारी हो या विदेश में जो भी 5 खण्ड हैं, तो जहाँ-जहाँ सेवाकेन्द्र खोले हैं वहाँ के कल्याणकारी हो वा विश्व कल्याणकारी हो? विश्व का कल्याण करने के लिए हर एक बच्चे को बाप का हैण्ड, राइड हैण्ड बनना है। किसको भी कुछ दिया जाता है तो किससे दिया जाता है? हाथों से दिया जाता है ना। तो बापदादा के आप हैण्ड्स हो ना, हाथ हो ना। तो बापदादा राइट हैण्ड्स से पूछते हैं, कितनी परसेन्ट का कल्याण किया है? कितनी परसेन्ट का किया है? सुनाओ, हिसाब निकालो। पाण्डव हिसाब करने में होशियार हैं ना? इसीलिए बापदादा कहते हैं अब स्व-पुरुषार्थ और सेवा के भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा पुरुषार्थ तीव्र करो। स्व की स्थिति में भी चार बातें विशेष चेक करो - इसको कहेंगे तीव्र पुरुषार्थ।
एक बात - पहले यह चेक करो कि निमित्त भाव है? कोई भी रॉयल रूप का मैं पन तो नहीं है? मेरापन तो नहीं है? साधारण लोगों का मैं और मेरा भी साधारण है, मोटा है लेकिन ब्राह्मण जीवन का मेरा और मैं पन सूक्ष्म और रॉयल है। उसकी भाषा मालूम है क्या है? यह तो होता ही है, यह तो चलता ही है। यह तो होना ही है। चल रहे हैं, देख रहे हैं...। तो एक निमित्त भाव, हर बात में निमित्त हैं। चाहे सेवा में, चाहे स्थिति में, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क में चेहरा और चलन निमित्त भाव का हो। और उसकी दूसरी विशेषता होगी - निर्मान भावना। निमित्त और निर्मान भाव से निर्माण करना। तो तीन बातें सुनी - निमित्त, निर्मान और निर्माण और चौथी बात है - निर्वाण। जब चाहे निर्वाणधाम में पहुंच जायें। निर्वाण स्थिति में स्थित हो जाएं क्योंकि स्वयं निर्वाण स्थिति में होंगे तब दूसरों को निर्वाणधाम में पहुंचा सकेंगे। अभी सभी मुक्ति चाहते हैं, छुड़ाओ, छुड़ाओ चिल्ला रहे हैं। तो यह चार बातें अच्छी परसेन्ट में प्रैक्टिकल जीवन में होना अर्थात् तीव्र पुरुषार्थी। तब बापदादा कहेंगे वाह! वाह! बच्चे वाह! आप भी कहेंगे वाह! बाबा वाह! वाह! ड्रामा वाह! वाह! पुरुषार्थ वाह! लेकिन पता है अभी क्या करते हो? पता है? कभी वाह! कहते हो कभी व्हाई (क्यों) कहते हो। वाह! के बजाए व्हाई, और व्हाई हो जाता है हाय। तो व्हाई नहीं, वाह! आपको भी क्या अच्छा लगता है, वाह! अच्छा लगता है या व्हाई? क्या अच्छा लगता है? वाह! कभी व्हाई नहीं करते हो? गलती से आ जाता है। डबल फारेनर्स व्हाई-व्हाई कहते हैं? कभी-कभी कह देते हो? जो डबल फारेनर्स कभी भी व्हाई नहीं कहते वह हाथ उठाओ। बहुत थोड़े हैं। अच्छा - भारतवासी जो वाह! वाह! के बजाए क्यों-क्या कहते हैं वह हाथ उठाओ। क्यों-क्या कहते हो? किसने छुट्टी दी है आपको? संस्कारों ने? पुराने संस्कारों ने आपको व्हाई की छुट्टी दे दी है और बाप कहते हैं वाह! वाह! कहो। व्हाई-व्हाई नहीं। तो अभी नये वर्ष में क्या करेंगे? वाह! वाह! करेंगे? या कभी-कभी व्हाई कहने की छुट्टी दे दें? व्हाई अच्छा नहीं है। जैसे वाई हो जाती है ना, तो खराब हो जाता है ना। तो व्हाई वाई है, यह नहीं करो। वाह! वाह! कितना अच्छा लगता है। हाँ बोलो, वाह! वाह! वाह!
अच्छा - तो दूरदेश में सुन रहे हैं, देख रहे हैं - भारत में भी विदेश में भी, उन बच्चों से भी पूछते हैं वाह! वाह! करते हो या व्हाई, व्हाई करते हो? अभी विदाई का दिन है ना! आज वर्ष के विदाई का लास्ट डे है। तो सभी संकल्प करो - व्हाई नहीं कहेंगे। सोचेंगे भी नहीं। क्वेश्चन मार्क नहीं, आश्चर्य की मात्रा नहीं, बिन्दी। क्वेश्चन मार्क लिखो, कितना टेढ़ा है और बिन्दी कितनी सहज है। बस नयनों में बाप बिन्दु को समा दो। जैसे नयनों में देखने की बिन्दी समाई हुई है ना! ऐसे ही सदा नयनों में बिन्दु बाप को समा लो। समाने आता है? आता है या फिट नहीं होती है? नीचे ऊपर हो जाती है? तो क्या करेंगे? विदाई किसको देंगे? व्हाई को? कभी भी आश्चर्य की निशानी भी नहीं आवे, यह कैसे! यह भी होता है क्या! होना तो नहीं चाहिए, क्यों होता है! क्वेश्चन मार्क नहीं, आश्चर्य की मात्रा भी नहीं। बस बाप और मैं। कई बच्चे कहते हैं यह तो चलता ही है ना! बापदादा को बहुत रमणीक बातें रूहरिहान में कहते हैं, सामने तो कह नहीं सकते हैं ना। तो रूहरिहान में सब कुछ कह देते हैं। अच्छा कुछ भी चलता है लेकिन आपको चलना नहीं है, आपको उड़ना है तो चलने की बातें क्यों देखते हो, उड़ो और उड़ाओ। शुभ भावना, शुभ कामना ऐसी शक्तिशाली है जो बीच में सिर्फ व्हाई नहीं आवे, सिवाए शुभ भावना शुभ कामना के, तो इतनी पावरफुल है जो किसी अशुभ भावना वाले को भी शुभ भावना में बदल सकते हो। सेकण्ड नम्बर - अगर बदल नहीं सकते हो तो भी आपकी शुभ भावना, शुभ कामना अविनाशी है, कभी-कभी वाली नहीं, अविनाशी है तो आपके ऊपर अशुभ भावना का प्रभाव नहीं पड़ सकता है। क्वेश्चन में चले जाते हो, यह क्यों हो रहा है? यह कब तक चलेगा? कैसे चलेगा? इससे शुभ भावना की शक्ति कम हो जाती है। नहीं तो शुभ भावना, शुभ कामना इस संकल्प शक्ति में बहुत शक्ति है। देखो, आप सभी आये बापदादा के पास। पहला दिन याद करो, बापदादा ने क्या किया? चाहे पतित आये, चाहे पापी आये, चाहे साधारण आये, भिन्न-भिन्न वृत्ति वाले, भिन्न-भिन्न भावना वाले आये, बापदादा ने क्या किया? शुभ भावना रखी ना! मेरे हो, मास्टर सर्वशक्तिवान हो, दिलतख्त नशीन हो, यह शुभ भावना रखी ना, शुभ कामना रखी ना, उससे ही तो बाप के बन गये ना। बाप ने कहा क्या कि हे पापी क्यों आये हो? शुभ भावना रखी, मेरे बच्चे, मास्टर सर्व शक्तिवान बच्चे, जब बाप ने आप सबके ऊपर शुभ भावना रखी, शुभ कामना रखी तो आपके दिल ने क्या कहा? मेरा बाबा। बाप ने क्या कहा? मेरे बच्चे। ऐसे ही अगर शुभ भावना, शुभ कामना रखेंगे तो क्या दिखाई देगा? मेरा कल्प पहले वाला मीठा भाई, मेरी सिकीलधी बहन। परिवर्तन हो जायेगा।
तो इस वर्ष में कुछ करके दिखाना। सिर्फ हाथ नहीं उठाना। हाथ उठाना बहुत सहज है। मन का हाथ उठाना क्योंकि बहुत काम रहा हुआ है। बापदादा तो नज़र करते हैं, विश्व की आत्माओं के ऊपर तो बहुत तरस पड़ता है। अब प्रकृति भी तंग हो गई है। प्रकृति खुद तंग हो गई है, तो क्या करे? आत्माओं को तंग कर रही है। और बाप बच्चों को देखके तरस में आ जाते हैं। आप सबको तरस नहीं आता? सिर्फ खबर सुनकर चुप हो जाते हो, बस, इतनी आत्मायें चली गई। वो आत्मायें सन्देश से तो वंचित रह गई। अभी तो दाता बनो, रहमदिल बनो। यह तब होगा, रहम तब आयेगा जब इस वर्ष के आरम्भ से अपने में बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो। बेहद की वैराग्य वृत्ति। यह देह की, देहभान की स्मृति, यह भी बेहद के वैराग्य की कमी है। छोटी-छोटी हद की बातें स्थिति को डगमग करती हैं, कारण? बेहद की वैराग्य वृत्ति कम है, लगाव है। वैराग्य नहीं है लगाव है। जब बिल्कुल बेहद के वैरागी बन जायेंगे, वृत्ति में भी वैरागी, दृष्टि में भी बेहद के वैरागी, सम्बन्ध-सम्पर्क में, सेवा में सबमें बेहद के वैरागी... तभी मुक्तिधाम का दरवाजा खुलेगा। अभी तो जो आत्मायें आ रही हैं फिर जन्म लेंगी, फिर दु:खी होंगी। अब मुक्तिधाम का गेट खोलने के निमित्त तो आप हो ना? ब्रह्मा बाप के साथी हो ना! तो बेहद की वैराग्य वृत्ति है गेट खोलने की चाबी। अभी चाबी नहीं लगी है, चाबी तैयार ही नहीं की है। ब्रह्मा बाप भी इन्तजार कर रहा है, एडवांस पार्टी भी इन्तजार कर रही है, प्रकृति भी इन्तजार कर रही है, तंग हो गई है बहुत। माया भी अपने दिन गिनती कर रही है। अभी बोलो, हे मास्टर सर्वशक्तिवान, बोलो क्या करना है?
इस वर्ष में कोई नवीनता तो करेंगे ना! नया वर्ष कहते हैं तो नवीनता तो करेंगे ना! अभी बेहद के वैराग्य की, मुक्तिधाम जाने की चाबी तैयार करो। आप सभी को भी तो पहले मुक्तिधाम में जाना है ना। ब्रह्मा बाप से वायदा किया है - साथ चलेंगे, साथ आयेंगे, साथ में राज्य करेंगे, साथ में भक्ति करेंगे...। तो अभी तैयारी करो, इस वर्ष में करेंगे कि दूसरा वर्ष चाहिए? जो समझते हैं इस वर्ष में अटेन्शन प्लीज, बार-बार करेंगे वह हाथ उठाओ। करेंगे? फिर तो एडवांस पार्टी आपको बहुत मुबारक देगी। वह भी थक गये हैं। अच्छा - टीचर्स क्या कहती हैं? पहली लाइन क्या कहती है? पहले तो पहली लाइन के पाण्डव और पहली लाइन की शक्तियां जो करेंगे वह हाथ उठाओ। आधा हाथ नहीं, आधा उठायेंगे तो कहेंगे आधा करेंगे। लम्बा हाथ उठाओ। अच्छा। मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा - डबल विदेशी हाथ उठाओ। एक दो में देखो किसने नहीं उठाया है। अच्छा, यह सिन्धी ग्रुप भी हाथ उठा रहा है, कमाल है। आप भी करेंगे? सिन्धी ग्रुप करेंगे? तब तो डबल मुबारक हो। बहुत अच्छा। एक दो को साथ देकर, शुभ भावना का इशारा देते, हाथ में हाथ मिलाते करना ही है। अच्छा। (सभा में कोई ने आवाज की) सब बैठ जाओ, नथिंग न्यू।
अच्छा - मधुबन वाले हाथ उठाओ, अच्छा ऊपर भी जो सुन रहे हैं वह हाथ उठा रहे हैं। देश विदेश वाले हाथ उठा रहे हैं। अच्छा है। संगठन में शक्ति है, एक दो को शुभ भावना का इशारा, बोलना नहीं, बोलेंगे तो झगड़ा हो जायेगा। शुभ भावना का इशारा दो। शुभ भावना का इशारा देना जानते हो ना, शुभ भावना का इशारा दे सकते हो?
अच्छा - बापदादा खुश है जो बापदादा ने डायमण्ड हॉल बनवाया है, उसको सफल कर रहे हैं इसीलिए सफलता भव। हर सेकण्ड को, हर संकल्प को, हर बोल को, हर कदम को, हर वस्तु को सफल करो और सफल कराओ। 12 बजे के बाद इस नये वर्ष में बापदादा की तरफ से पहला वरदान अपने को देना - सफलता भव। संकल्प भी असफल नहीं हो क्योंकि आपका एक शुभ संकल्प विश्व का कल्याण करने वाला है। इतना अमूल्य है। एक-एक सेकण्ड विश्व कल्याण का आधार है। इसीलिए सफल करो सफलता मूर्त बनो। बस यह चेक करो सेकण्ड जो बीता, संकल्प जो चला, सफल हुआ? तो सभी आज मैजारिटी पट में बैठे हैं, यह पटरानियां हैं, यह कोच रानियां हैं, कोच राने हैं, कुर्सी राने और कुर्सी रानियां और आप पटरानी हो। मजा है ना। थक तो नहीं गये हैं? क्योंकि आज लम्बा समय है ना! और तीन बजे से लेके जगह पकड़ लेते हैं। बापदादा सब देखता रहता है। जो 3-4 बजे से हॉल में आये हैं वह हाथ उठाओ। टी.वी. में देखो कितने हैं? सारे ही हाथ उठा रहे हैं। कोई 3 बजे कोई 4 बजे आये। तीन बजे आने वालों को त्रिलोकीनाथ का वरदान है। भक्ति में बहुत किया है ना, तो साल में एक बारी यहाँ भी कर लेते हैं। अपने राज्य में यह नहीं होगा। लेकिन वहाँ न बाप आयेगा, न आप आयेंगे। बैठेंगे कहाँ। अभी मजा ले लो। पट में नहीं बैठे हो, बापदादा तो आपको दिलतख्त पर देख रहे हैं। लेकिन दृश्य बहुत अच्छा लग रहा है। सब बिन्दु होकर बैठे हैं। सर्दी लग रही है? सर्दी भाग गई ना! अच्छा। (आज हॉल में 15-16 हजार भाई बहिनें बैठे हैं)
अभी-अभी एक सेकण्ड में बिन्दु बन बिन्दु बाप को याद करो और जो भी कोई बातें हों उसको बिन्दु लगाओ। लगा सकते हो? बस एक सेकण्ड में “मैं बाबा का, बाबा मेरा।'' अच्छा।
सेवा का टर्न महाराष्ट्र वालों का है:- अच्छा - हर ज़ोन को सेवा का गोल्डन चांस मिलता है। इन 15-20 दिनों में सच्चे ब्राह्मणों की सेवा कर अपने पुण्य की कोठियां भर देते हैं क्योंकि अच्छी सेवा करते हैं तो सबके दिल से क्या निकलता है? बहुत अच्छा, बहुत अच्छा, बहुत अच्छा। तो यह दुआयें पुण्य के खाते में जमा हो जाती हैं। तो किसी को भी पुण्य का खाता जमा करना सहज है, योगबल से तो होता ही है लेकिन यह कर्म करते भी अगर पुण्य का खाता जमा करना है तो कर्मयोगी स्थिति में यज्ञ सेवा करो तो आपका खाता भरपूर हो ही जायेगा। यह सहज विधि है। महाराष्ट्र तो है, महाराष्ट्र की संख्या भी महा है। सेन्टर्स भी ज्यादा हैं, गीता पाठशालायें तो बेशुमार हैं। अच्छा है। बापदादा तो देखते हैं जो भी अपने स्व-इच्छा से अपने को सेवा में जीवन सहित समर्पण करते हैं, उन सभी समर्पित बच्चों को शरीर निर्वाह का साधन अवश्य सहज प्राप्त होता है। खाओ, पिओ प्रभु के गुण गाओ। सेवा करते हैं, भाषण करते हैं, कोर्स कराते हैं, यह क्या है? प्रभु के गुण ही तो गाते हैं। और दाल रोटी देने के लिए तो बापदादा बंधा हुआ है। 36 प्रकार का भोजन नहीं खिलायेगा, वह कभी-कभी खिला देगा। तो बहुत अच्छा - चाहे ट्रस्टी बनके भी सेवा कर रहे हैं, अगर ट्रस्टी हैं, सच्चे ट्रस्टी, मतलब के ट्रस्टी नहीं, सच्चे ट्रस्टी हैं तो बापदादा कभी भूखा नहीं रख सकता। दाल रोटी जरूर खिलायेगा क्योंकि बापदादा भूखा रहता है क्या? जब बापदादा भूखा नहीं रहता, सभी भोग लगाते हैं। आप सभी भोग लगाते हैं ना, चतुराई तो नहीं करते, एक गिट्टी खिलाओ, बाकी भूल जाओ, नहीं। अगर ट्रस्टी हैं तो भी बापदादा बंधा हुआ है। तो महाराष्ट्र जितने महा हैं उतने वारिस भी महान हैं? हैं ना!
अभी इस वर्ष में बापदादा सभी ज़ोन में कितने-कितने वारिस क्वालिटी हैं, वह लिस्ट मंगायेंगे, उन वारिसों की सेरीमनी करेंगे। टीचर्स तो जानती हैं ना! देखेंगे, इसमें नम्बरवन कौन सा ज़ोन है? महाराष्ट्र होगा ना! बहुत अच्छा। पक्के वारिस कौन हैं, कितने हैं? और इस वर्ष में यह जो मेगा प्रोग्राम किया है वह तो बहुत अच्छा किया। कितने प्रोग्राम हुए हैं? कहाँ-कहाँ हुए हैं? (15-16 हुए हैं) बापदादा ने देखा कोई कोई प्रोग्राम तो ज़ोन ने मिलकर किया है लेकिन कोई कोई प्रोग्राम एक सेन्टर या आसपास उसके कनेक्शन वालों ने किया है, वह कौन से हैं? (मैंगलोर, सम्बलपुर, बिलासपुर, पूना, मेहसाना) तो कमाल की ना उन्होंने। वह आये हैं? कौन आये हैं? पूना वाले उठो। पूना की टीचर्स उठो। पूना ने भी कमाल की। ठीक है। सर्टीफिकेट अच्छा लिया। अच्छा - मेहसाना - कर लिया है? मुबारक हो। बिलासपुर के भाई आये हैं, उनको भी मुबारक हो। सम्भलपुर वाला कोई है? थोड़े-थोड़े आये हैं, उसको भी मुबारक है, हिम्मत रखकर किया और सफलता पाई। तो सफलता की मुबारक हो। अच्छा। यह तो हुआ, अभी बापदादा क्या चाहते हैं? सभी वर्गों की सेवा तो हुई लेकिन अभी बापदादा चाहते हैं कि हर वर्ग ने जो भी आदि से अन्त तक सेवा की है, जैसे बापदादा ने माइक बुलाये, थे तो नम्बरवार माइक, सभी पॉवरफुल नहीं थे, थोड़े मीडियम थे। लेकिन अभी बापदादा यह चाहते हैं कि इतना समय जो वर्ग की सेवा की, उसमें आई.पी. या वी.आई.पी. हर ज़ोन से कितने निकले हैं जो कहें कि नॉलेज को मैं मानता हूँ। सिर्फ यह महिमा नहीं करें - यह कार्य बहुत अच्छा है और कोई कर नहीं सकता, यह नहीं कहें लेकिन नॉलेज को मानता हूँ। ऐसे नॉलेजफुल ग्रुप बापदादा देखने चाहते हैं। क्लीयर हुआ। तो इस वर्ष में लास्ट टर्न आयेगा ना उसमें हर वर्ग वाले जो ऐसे आई.पी. हो, वी.आई.पी. का तो भाग्य थोड़ा पीछे है लेकिन आई.पी. जो नॉलेज को मानता हो, ऐसा ग्रुप बापदादा के सामने लाओ। वह सेवा करे। उनको सेवा के निमित्त बनायेंगे। ठीक है! अभी अगले वर्ष का यह होम वर्क है वर्ग वालों को क्योंकि कोई न कोई वर्ग तो आता ही है।
कल्चरल विंग:- अच्छा - कल्चरल वाले जब कल्चरल दिखाते हो तो उसमें और क्या सिद्ध करते हो? जो भी कल्चरल करते हो उसमें आपके चलन चेहरे और कर्म से क्या कैरेक्टर दिखाई देता है, यह श्रेष्ठ कैरेक्टर वाले हैं, यह दिखाई देता है? हाँ करो या ना? हाँ तो हाथ हिलाओ। अच्छा दोनों लक्ष्य रखते हो। क्योंकि कल्चरल प्रोग्राम तो सभी करते हैं लेकिन आप जो कल्चरल दिखाते हो या प्रोग्राम करते हो उसमें सिर्फ कल्चरल नहीं हो लेकिन नैतिक मूल्य भी समाये हुए हों, कैरेक्टर हो। उससे क्या होगा? देखने वालों को सहज ही आकर्षण होगी कि हम भी कैरेक्टर धारण करें। तो इस विधि से, क्योंकि कई ज्ञान सुनने नहीं चाहते हैं, सीधा ज्ञान नहीं सुनेंगे लेकिन आपके कल्चरल से वह कैरेक्टर सीख जायें। ऐसा कर भी रहे हो और भी लक्ष्य रखो कि कम से कम देखने वाले जो हैं उनको नैतिक वैल्यु का इशारा तो मिले, आकर्षण तो हो, हमको करना है। बाकी अच्छा कर रहे हैं। जो भी वर्ग कर रहे हैं बापदादा हर वर्ग के पुरुषार्थ और रिजल्ट को देख खुश हैं। और इस वर्गीकरण की सेवा के बाद कई भाई बहिनों को चांस मिला है, सेवा के क्षेत्र में आगे आने में और बिजी रहते हैं। इसलिए बापदादा को वर्गों की सेवा अच्छी लगती है। सभी कर रहे हैं। कभी कोई वर्ग आता है, कभी कोई वर्ग आता है तो सभी ठीक हैं? बहुत ठीक या ठीक हैं? बहुत ठीक? तीव्र पुरुषार्थी या पुरुषार्थी क्या हैं? अच्छा चल रहे हैं या उड़ रहे हैं? क्या कहेंगे? अभी उड़ना है और उड़ाना है। चलने का टाइम पूरा हो गया। जैसे बैलगाड़ी का सीजन पूरा हो गया, कारें आ गई हैं। पहले तो बैलगाड़ियों में ही जाते थे। तो अभी चलने का समय पूरा हुआ, अभी उड़ना है। अच्छा।
ज्यूरिस्ट विंग:- अच्छा - अच्छे-अच्छे आये हैं, मुबारक हो। जज और वकील तो आवाज बुलन्द करने वाले होते हैं ना, तो अभी ऐसा कोई प्रैक्टिकल का प्लैन बनाओ जो आप भी प्रीचुअल्टी का आवाज बुलन्द करके दिखाओ। जो सबकी नज़र में आये कि साधारण वकील, साधारण जज और स्प्रीचुअल जज या वकील में कितना अन्तर है। हो जायेगा, बापदादा ने सुना - गीता के भगवान का भी सोच रहे हैं। सोचो। इसमें कोई को निमित्त बनाना पड़ेगा। कोई जज हो, कोई धर्मात्मा हो, दोनों ग्रुप में से दो चार को तैयार करो, सेवा में, मैदान में आना पड़ेगा। आपस में मीटिंग करो, सभी जज और रिलीजस वाले मिलकर मीटिंग करके कोई प्लैन सोचो। दोनों ही मिलकर राय करो। फिर कुछ कर सकेंगे। हो जायेगा, होना तो है ही। मुबारक हो। जो भी आये हैं, उन्हों को भी विशेष मुबारक हो। अच्छा।
डबल विदेशी बहुत आये हैं:- डबल विदेशी तो शान्तिवन वा मधुबन का विशेष श्रृंगार हैं। बापदादा देखते हैं एक-एक बच्चा विशेष डबल हीरो है। रत्न भी है और हीरो पार्ट बजाने वाले भी हैं। तो हर एक विदेशी डबल हीरो है। देखो कितने देशों में और वहाँ से ही तैयार होके वहाँ ही सेवा कर रहे हैं। कितने देशों से आये हुए हैं? (45 देशों से) अच्छा, 45 देश वाले हाथ उठाओ। जो भिन्न-भिन्न देश से आये हैं, उनमें से एक-एक हाथ उठाओ। छोटा बच्चा भी हाथ हिला रहा है। मुबारक हो। अच्छा। 45 देश वालों को पदमापदम मुबारक हो। (छोटे बच्चों की रिट्रीट चल रही है) सभी देखो यह बच्चों का ग्रुप कितना अच्छा है। कितने देश के बच्चे हैं? (15 देश के 28 बच्चे हैं) गीत सुनाओ। (बच्चों ने गीत गाया मैं बाबा का, बाबा मेरा) अच्छा - सभी बच्चे अमृतवेला करते हो? जो बच्चे अमृतवेला करते हैं वह हाथ उठाओ। अच्छा जो कभी-कभी करते हैं वह हाथ उठाओ। कभी-कभी वाले ज्यादा हैं। अच्छा - लड़ाई झगड़ा करते हो? जो लड़ाई नहीं करता है वह हाथ उठाओ। तो अभी यहाँ से जाने के बाद लड़ाई नहीं करना क्योंकि ब्रह्माकुमार हो ना। तो ब्रह्माकुमार, बाबा मेरा, मैं बाबा का कहा तो लड़ाई नहीं करना है, नहीं तो बाबा मेरा नहीं होगा। अभी लड़ाई करेंगे? (नहीं) अभी परिवर्तन करेंगे। अभी टीचर्स सब रिपोर्ट देना तो लड़ाई झगड़ा किया है या नहीं किया? बाकी मुबारक हो। अच्छा है, फिर भी पुरुषार्थ अच्छा किया है इसलिए पदमगुणा मुबारक हो। (विदेश का यूथ ग्रुप भी आया है) (मेरा बाबा का साइन बोर्ड दिखा रहे हैं) बहुत अच्छा, ताली बजाओ। बापदादा ने सुना तो रिजल्ट में यूथ ग्रुप ने पुरुषार्थ में बहुत गुह्यता लाई है। तो यह पुरुषार्थ में जो सूक्ष्म में गये, तो सदा पुरुषार्थ में आगे से आगे बढ़ते रहना, पीछे नहीं होना, आगे बढ़ते रहना और उड़ते रहना। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा।
(दादी जानकी ने बापदादा से पूछा - विश्व की करोड़ों आत्माओं को इस साल में मैसेज कैसे मिले, मेरा बाबा है, यह अनुभव कैसे हो, उसके लिए क्या प्लैन बनें?)
उसके लिए कोई ग्रुप बनाओ, ऐसा कोई छोटा ग्रुप बनाओ जो इस बात पर मनन करे क्योंकि विधियां तो सुनाई, हर एक को चाहे मन्सा संकल्प द्वारा, चाहे वृत्ति वायब्रेशन द्वारा, चाहे वाणी द्वारा, चाहे सम्बन्ध सम्पर्क द्वारा हर एक को लक्ष्य रखना है कि सारे दिन में कितनी आत्माओं की सेवा की? चाहे मन्सा की, चाहे वृत्ति वायब्रेशन से की, वाणी द्वारा की, प्रोग्राम द्वारा की या सम्बन्ध सम्पर्क से की या चलन चेहरे से की, हर एक को नोट करना चाहिए कि मेरे सेवा की रिजल्ट सारे दिन की क्या रही? और एक ग्रुप बनाओ जो सोचे, सेवा के बिना रह नहीं सके। उसको देख कर सब फॉलो करेंगे। लेकिन स्व स्थिति और सेवा की स्थिति दोनों का बैलेन्स हो। फिर सेवा बहुत बढ़ेगी और दूसरों को भी उमंग आयेगा कि बैलेन्स है। सिर्फ सेवा करते हैं तो कहते हैं, यह तो बोलने वाले हैं ही। लेकिन ऐसा छोटा ग्रुप बनाओ जो यह पान का बीड़ा उठावे कि हम स्व-स्थिति और सेवा की विधियों से सेवा करेंगे। एक एक्जैम्पल हो ग्रुप फिर वह जैसे कहते हैं ना एक दीपक से दीवाली हो जाती है, वैसे एक ग्रुप से वृद्धि होती जायेगी। अच्छा।
सभी को वर्ष का होम वर्क तो याद है ना, जो बापदादा ने कहा कि इस वर्ष में क्या विदाई देनी है और बधाई मनानी है, वह याद है ना? अभी बापदादा भी देखेंगे एक मास की रिजल्ट में सिर्फ यहाँ यह लिखें कि इतनी परसेन्टेज सेवा की, 40 परसेन्ट, 80 परसेन्ट, 20 परसेन्ट 10 परसेन्ट.... सिर्फ परसेन्टेज लिखें लम्बा चौड़ा पत्र नहीं लिखें, फिर बापदादा फर्स्ट नम्बर वालों को इनाम देंगे। लेकिन बैलेन्स स्व और सेवा का बैलेन्स, सन्तुष्टता प्रसन्नता का बैलेन्स। ठीक है। सब रिजल्ट लिखेंगे, सिर्फ परसेन्टेज लिखना मीठी दादी, योगयुक्त दादी..., लम्बा नहीं लिखना, बस परसेन्टेज लिखना क्योंकि पढ़ने का टाइम नहीं होता है। फिर सारे ब्राह्मण परिवार में जो एक मास की रिजल्ट भेजेंगे और नम्बरवन आयेंगे उसको बापदादा इनाम देंगे। ठीक है? पसन्द है? समझ में आया? माताओं को समझ में आया? टीचर्स को समझ में आया? पीछे वालों को समझ में आया? हाथ उठाओ पीछे वाले। अच्छा!
अभी चारों ओर के सर्व नये युग के मालिक बच्चों को, चारों ओर के नये वर्ष मनाने के उमंग-उत्साह वाले बच्चों को सदा उड़ते रहना और उड़ाते रहना, ऐसे उड़ती कला वाले बच्चों को, सदा तीव्र पुरुषार्थ द्वारा विजय माला के मणके बनने वाले विजयी रत्नों को बापदादा का नये वर्ष और नये युग की दुआओं के साथ-साथ पदमगुणा थालियां भर-भर के मुबारक हो, मुबारक हो। एक हाथ की ताली बजाओ। अच्छा!
दादी जी से:- तबियत कैसी भी है लेकिन सम्भाल रही हो बहुत अच्छा। अच्छा सम्भाल रही हो। आपकी दादियों की युनिटी और चेहरा और चलन उसको देख करके सबकी पालना हो रही है। बाप का तो पहले दिन से हाथ और साथ है ही है। अच्छा - (जानकी दादी से) विदेश ठीक है? राजस्थान की जो टीचर्स आई हैं वह उठें।
तीन बहनें स्टेज पर आई:- त्रिमूर्ति आई है। सहज हो गया ना! सहज हुआ, हिम्मत बढ़ी? अभी तो नहीं कहेंगी बड़ा मुश्किल है। अभी 10 गुणा करके दिखाना। राजस्थान को परिस्तान बनाना ही है। इसीलिए हिम्मत रखकर बढ़ते चलो। अभी आवाज फैलाना। अभी आवाज फैलाया है, अभी जिन वी.आई.पी की एड्रेसेज हैं उनको स्नेह मिलन में बुलाओ, अभी लोहा गर्म है उसमें जो भी बनाने चाहे बन जायेगा। तो हर एक स्थान जो भी जयपुर में नजदीक हैं, उसमें बुलाओ। और वैसे भी राजस्थान में बीच-बीच में स्नेह मिलन रखो, ब्रह्माभोजन खिलाओ। ब्राह्मणों का तो रखना ही है लेकिन वी.आई.पीज का रखो। आई.पीज को खड़ा करो तो राजस्थान आगे जायेगा। बाकी अच्छा कर लिया, मुबारक हो, सहज हो गया। मुबारक हो। (बाबा को मुबारक हो) दादियों को मुबारक दो। अच्छा किया। ऐसे ही मिलकर करना, इस साल में दो तीन प्रोग्राम करो। कभी यह करे, कभी यह करे...। अच्छा। निर्मलशान्ता दादी से:- आपकी शक्ल सुहानी (सुन्दर) लग रही है। बीमार नहीं लग रही है। (बीमार थोड़ेही हूँ) अच्छा है। बहुत अच्छा। (रूकमणी बहन से) - यह भी बहुत अच्छी मेहनत करती है। थक तो नहीं गई! बहुत अच्छी दिल से सेवा की, उसकी मुबारक है, मुबारक है।
रात्रि 12 बजे के पश्चात बापदादा ने सभी बच्चों को नये वर्ष 2005 की बधाईयां दी
चारों ओर के सभी सिकीलधे, लाडले, तख्तनशीन, स्वराज्य अधिकारी बच्चों को नये वर्ष और नव युग की बधाईयां हो, बधाईयां हों। सदा ही इस वर्ष सबको बधाईयां देनी हैं और बधाईयां लेनी हैं - इसी लक्ष्य से लक्षण धारण कर उड़ते रहना, उड़ाते रहना। मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो