"ब्रह्माकुमारीज़ भोपाल ज़ोन शोकाकुल – राजयोगिनी अवधेश दीदी की स्मृति को नमन"
मप्र में ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा अध्यात्म का बीजारोपण करने वाली, भोपाल ज़ोन की निदेशिका 75 वर्षीय राजयोगिनी अवधेश दीदी का 19 सितंबर को दोपहर 12.15 बजे बंसल हॉस्पिटल भोपाल में उपचार के दौरान देहावसान हो गया। पिछले एक वर्ष से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और दो दिन से वे वेंटिलेटर पर थीं। उनके निधन की खबर से पूरे ब्रह्माकुमारी परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। हजारों ब्रह्माकुमार-बहनें उनकी आत्मा की शांति के लिए राजयोग साधना में लीन हैं।
उनकी बैकुंठी यात्रा 20 सितंबर, शनिवार को सुबह 11 बजे अरेरा कॉलोनी स्थित राजयोग भवन (ज़ोनल मुख्यालय) से निकलेगी तथा अंतिम संस्कार दोपहर 1 बजे सुभाष नगर मुक्तिधाम में संपन्न होगा।
16 अगस्त 1950 को उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले के शमसाबाद में जन्मीं अवधेश दीदी में बचपन से ही भक्तिभाव एवं समाजसेवा के संस्कार थे। अध्यात्म के प्रति उनकी अटूट लगन और ईश्वर में दृढ़ आस्था ने उन्हें आजीवन ब्रह्मचर्य और सेवा के मार्ग पर अग्रसर किया। वर्ष 1965 में वे पहली बार ब्रह्माकुमारीज़ के संपर्क में आईं तथा 1968 में माउंट आबू में संस्थापक ब्रह्मा बाबा से मिलकर जीवन को अध्यात्म की दिशा में पूर्णतः समर्पित कर दिया।
उनके अथक परिश्रम और ममतामयी मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि मप्र और उप्र में 300 से अधिक सेवाकेंद्र स्थापित हुए, जिनसे लाखों लोग आध्यात्मिक जीवन की राह पर अग्रसर हुए। उनके सान्निध्य में 500 से अधिक बेटियों ने ब्रह्माकुमारीज़ के रूप में समाजसेवा और विश्वकल्याण को अपना जीवन अर्पित कर दिया।
आप न केवल भोपाल ज़ोन की निदेशिका थीं, बल्कि प्रशासक सेवा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका के रूप में भी कार्यरत रहीं। आपके नेतृत्व में 500 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और आयोजन संपन्न हुए।
अवधेश दीदी ने महिला सशक्तिकरण, नशामुक्ति, जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा किसानों के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। आपने प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े लोगों हेतु तनाव प्रबंधन कार्यशालाओं का भी आयोजन कराया।
वर्ष 2010 में उन्हें मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्यों के लिए *किरण लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान* से अलंकृत किया गया।
आपका जीवन समाजसेवा, अध्यात्म और विश्वकल्याण की अनमोल मिसाल बनकर सदैव प्रेरणा देता रहेगा।






















