9 मार्च 2026 को मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “वूमेन – फ्लैग बेयरर्स ऑफ न्यू इंडिया” प्रोजेक्ट के अंतर्गत स्वर्णिम युग की स्थापना में महिलाओं की भूमिका विषय पर एक भव्य सम्मान समारोह एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन ब्रह्माकुमारीज के मुंबई सायन, मुंबई चुनाभट्टी, मुंबई परेल भोईवाड़ा, मुंबई लालबाग और मुंबई माटुंगा सेवा केंद्रों द्वारा किया गया। इस प्रेरणादायी कार्यक्रम से लगभग 400 लोग लाभान्वित हुए।
कार्यक्रम में समाज, राजनीति और संस्कृति जगत की कई विशिष्ट हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय मंजू लोढ़ा, जो कि एक प्रख्यात राजनेता, सोशल वर्क में डॉक्टरेट, लेखिका एवं ब्लॉगर हैं, उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में महिलाओं की शक्ति, नेतृत्व और समाज निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में अन्य विशिष्ट अतिथियों में प्रमिला गोसावी (ट्रस्टी – खानोलकर स्कूल), शालिनी सर्वे (शिवसेना विधान सभा महिला विभाग प्रमुख), रेखा यादव (कॉरपोरेटर), मानसी साटमकर (कॉरपोरेटर), चित्रा वाघ (पूर्व कॉरपोरेटर), अर्पिता सेठिया (अभिनेत्री), कल्पेशा कोठारी (कॉरपोरेटर) तथा शिल्पा कुलसेकर (कॉरपोरेटर) शामिल थीं। सभी अतिथियों ने ब्रह्माकुमारीज द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवाकार्यों की सराहना की और शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ब्रह्माकुमारीज की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका, माउंट आबू से पधारी आदरणीय संतोष दीदी जी का प्रेरणादायी संबोधन रहा। अपने संदेश में उन्होंने बताया कि
महिलाएँ अपने आध्यात्मिक जागरण, संस्कारों और आंतरिक शक्ति के माध्यम से समाज में शांति, प्रेम और मूल्यों की स्थापना कर सकती हैं तथा स्वर्णिम युग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इस अवसर पर बीके माला दीदी, बीके शिला दीदी एवं बीके वंदना दीदी ने भी अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए और सभी को आध्यात्मिकता के माध्यम से सशक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष सम्मान समारोह (सम्मान समरोह) आयोजित किया गया जिसमें समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं एवं अतिथियों को सम्मानित किया गया। पूरा वातावरण उत्साह, प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा।
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस संकल्प के साथ किया गया कि सशक्त और जागरूक महिलाएँ ही शांति, प्रेम और मूल्यों से परिपूर्ण स्वर्णिम युग की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाएँगी।



























