17 मई 2026, पुरुषोत्तम मास के प्रथम दिवस के पावन अवसर पर वसई स्थित नव-निर्मित भवन प्रभु प्रेरणा में मुंबई के पटेल समाज के लिए एक दिवसीय विशेष राजयोग शिविर का भव्य एवं अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण में आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरे परिसर में शांति, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का दिव्य वातावरण देखने को मिला।
इस शिविर में आध्यात्मिक जागरूकता, सामाजिक समरसता और जीवन मूल्यों के उत्थान का संदेश देते हुए लगभग 1100 भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बड़ी संख्या में आए प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरणादायी बताया और इसे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला अनुभव माना।
शिविर के दौरान सभी उपस्थितजनों को आत्मा, परमात्मा तथा सृष्टि चक्र के गहन आध्यात्मिक रहस्यों की सरल एवं सहज भाषा में जानकारी दी गई। विशेष रूप से यह समझाया गया कि आत्मा ही वास्तविक पहचान है और परमात्मा से योग जोड़कर ही जीवन में पवित्रता, शक्ति और स्थिरता लाई जा सकती है।
राजयोग मेडिटेशन के सत्रों में प्रतिभागियों को गहन शांति और आत्मिक अनुभव कराया गया। अभ्यास के माध्यम से यह प्रेरणा दी गई कि तनावमुक्त, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन जीने के लिए मन को ईश्वर से जोड़ना आवश्यक है। कई प्रतिभागियों ने ध्यान के दौरान गहरी शांति और आनंद की अनुभूति साझा की।
कार्यक्रम में समाज के विभिन्न मान्यवरों का स्वागत एवं सम्मान भी किया गया, जिससे आयोजन का माहौल और अधिक गरिमामय बन गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ के बोरीवली सेवा केंद्रों की प्रभारी बी.के. दिव्य प्रभा दीदी के प्रेरणादायी आशीर्वचनों ने सभी उपस्थितजनों को आध्यात्मिक शक्ति और आत्म-चिंतन की दिशा प्रदान की।
इसके पश्चात राजयोग शिक्षिका बी.के. श्रेया, बी.के. पारुल, बी.के. सारिका एवं बी.के. भारती ने विभिन्न विषयों पर गहन एवं प्रभावशाली सत्रों का संचालन किया। इन सत्रों में आत्म-चेतना, सकारात्मक सोच, संस्कार निर्माण और जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन जैसे विषयों पर विशेष प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण बच्चों के लिए आयोजित गतिविधियाँ रहीं, जिनमें खेल, मनोरंजन एवं संस्कार-आधारित शिक्षाप्रद कार्यक्रम शामिल थे। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि पूरा परिवार एक साथ इस आध्यात्मिक आयोजन से जुड़ सके और सभी आयु वर्ग के लोग लाभान्वित हों।
सत्रों के दौरान यह महत्वपूर्ण संदेश बार-बार उभरा कि “स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन” ही सच्चे आध्यात्मिक उत्थान का आधार है। आत्मा को पहचानकर स्वयं के सुधार पर ध्यान देने से ही समाज और विश्व में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से गहन शांति, आनंद और आत्मिक सशक्तिकरण की अनुभूति की। उपस्थित जनों ने इस आयोजन को जीवन में एक नई दिशा देने वाला और आध्यात्मिक रूप से जागृत करने वाला अनुभव बताया, तथा सतयुगी जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
































