8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ योग भवन, मुंबई – घाटकोपर सबज़ोन द्वारा ब्रह्माकुमारीज़ पीस पार्क में “नारी सम्मान – पहचान आत्मबल की” विषय पर एक प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर अनेक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आध्यात्मिकता के माध्यम से आंतरिक सशक्तिकरण का संदेश आत्मसात किया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनकी वास्तविक आध्यात्मिक पहचान से परिचित कराते हुए आत्मबल, सम्मान और सकारात्मकता के मार्ग पर अग्रसर करना था।
कार्यक्रम का प्रारंभ स्वागत सत्र से हुआ, जिसके पश्चात “आत्मा के सात गुणों” पर आधारित एक रोचक एवं अनुभवात्मक गतिविधि आयोजित की गई। इस गतिविधि में सभी प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इसके माध्यम से सभी ने शांति, प्रेम, सुख, पवित्रता, ज्ञान, आनंद और शक्ति जैसे दिव्य गुणों के सकारात्मक स्पंदनों को पूरे विश्व में फैलाने का सुंदर अनुभव किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी विष्णुप्रिया दीदी ने प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए
महिलाओं को निर्भीक, सम्मानपूर्ण और आत्मबल से परिपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आत्मा, उसकी दिव्य शक्तियों तथा परमपिता परमात्मा के साथ उसके संबंध को सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में समझाया। साथ ही उन्होंने सभी को राजयोग ध्यान का अभ्यास भी कराया, जिसमें विश्व के युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के लिए शांति और सकारात्मक ऊर्जा के शक्तिशाली संकल्प भेजे गए।
कार्यक्रम के दौरान कई प्रतिभागियों ने कविता, गीत और नृत्य के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। अनेक बहनों ने इस आध्यात्मिक संगम से प्राप्त अपने प्रेरणादायी अनुभव भी साझा किए, जिससे कार्यक्रम का वातावरण और भी भावनात्मक एवं उत्साहपूर्ण बन गया। विभिन्न महिला संगठनों से आई अनेक विशिष्ट महिला अतिथियों ने भी अपने समूहों के साथ इस कार्यक्रम में सहभागिता कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
महिला दिवस के उपलक्ष्य में ब्रह्माकुमारीज़ योग भवन में AI-AR तकनीक से निर्मित विशेष फिल्म “जननी – द स्टोरी शी रोट” का भी प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म ने महिलाओं की मौन शक्ति, त्याग और सृजनशीलता को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। फिल्म ने उपस्थित सभी दर्शकों के हृदय को स्पर्श किया और उन्हें मातृत्व तथा नारीत्व की दिव्य भूमिका का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ घाटकोपर सबज़ोन की प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी शकू दीदी जी ने भी महिला सशक्तिकरण पर अपने प्रेरणादायी विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि जब एक नारी अपनी वास्तविक आध्यात्मिक पहचान – आत्मा – को पहचानती है, तब उसके भीतर साहस, करुणा और ज्ञान की शक्तियाँ स्वतः जागृत हो जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आध्यात्मिक रूप से जागरूक नारी पूरे परिवार और समाज के लिए शक्ति, प्रेम और सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनती है।
मरांथा अनाथालय की बालिकाओं की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी अर्थपूर्ण बना दिया। उनके उत्साहपूर्ण सहभाग ने यह संदेश दिया कि हर बालिका के भीतर साहस, आत्मविश्वास और गरिमा के साथ आगे बढ़ने की असीम संभावनाएँ निहित होती हैं।
कार्यक्रम का समापन ईश्वरीय प्रसाद एवं उपहार वितरण के साथ हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन ने उपस्थित सभी बहनों के भीतर आत्मसम्मान, आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक सशक्तिकरण की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया तथा उन्हें जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा प्रदान की।



























