मध्य प्रदेश के रीवा में आयोजित ऐतिहासिक दशहरा समारोह में लगभग 35,000 लोगों की विशाल जनसमूह के बीच ब्रह्माकुमारीज़ ने आत्म परिवर्तन और श्रेष्ठ संस्कारों को अपनाने का प्रेरणादायी संदेश दिया।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी.के. निर्मला दीदी ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि
प्रत्येक वर्ष रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन सच्ची विजय तभी संभव है, जब मनुष्य अपने भीतर छिपे काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी रावण का अंत करे। उन्होंने सभी को आत्मचिंतन करने और जीवन में श्रेष्ठ संस्कार धारण करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रीवा रियासत के युवराज श्री दिव्यराज सिंह ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यों की सराहना की।
इस अवसर पर रीवा संभाग के आयुक्त श्री शैलेंद्र सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री वीरेंद्र गुप्ता, जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा अंबिकापुर से बी.के. स्नेहलता, विजय आहूजा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
समारोह में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा प्रस्तुत चैतन्य देवियों की मनमोहक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिकता, पवित्रता और नारी शक्ति के सम्मान का संदेश दिया।
बी.के. निर्मला दीदी के प्रेरणादायी विचारों से प्रभावित होकर नगर विजय दशमी दशहरा समिति द्वारा उनका आत्मीय सम्मान भी किया गया। समिति के प्रतिनिधियों ने ब्रह्माकुमारीज़ की झांकी को समारोह में सम्मिलित करने के लिए संस्थान का आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार रीवा का यह ऐतिहासिक दशहरा समारोह केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव ही नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन, श्रेष्ठ संस्कारों और आंतरिक विकारों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देने वाला यादगार अवसर बना।
























