पांडव भवन में अलौकिक दीपोत्सव – आत्मिक प्रकाश और दिव्य संकल्पों के साथ मनी दीपावली

माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय पांडव भवन में दीपावली का पर्व अत्यंत भव्यता, हर्षोल्लास और आध्यात्मिक उमंग के साथ मनाया गया। संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी जी की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष दिव्यता प्रदान की।
इस अवसर पर संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके जयंती दीदी जी, संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके सुदेश दीदी जी, राजयोगिनी बीके शशि दीदी जी, महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई जी, अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बीके डॉ. मृत्युंजय भाई जी एवं राजयोगी बीके डॉ. प्रताप मेहता भाई जी, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके शीलू दीदी जी, समाज सेवा प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक बीके अवतार भाई जी, म्यूजियम प्रभारी बीके वर्षा दीदी जी सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
दीपों एवं आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित पांडव भवन की अनुपम छटा देखते ही बन रही थी। सभी वरिष्ठ सदस्यों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर शांति, प्रेम, पवित्रता और खुशहाली का प्रकाश विश्व में फैलाने का शुभ संकल्प लिया। इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं तथा केक कटिंग के साथ उत्सव की खुशियां साझा कीं।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी जी ने
सभी को अपने मन में संकल्पों के दीप जलाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हम सभी यज्ञ के रक्षक और पालना करने वाले हैं। हमें सदैव स्वयं को यज्ञ की सेवा के निमित्त और जिम्मेवार समझकर चलना है। उन्होंने अक्टूबर 1968 में आगरा में बाबा द्वारा पहली बार सेवा के लिए भेजे जाने के अपने अनुभव साझा करते हुए बाबा की मीठी दृष्टि, शुभभावनाओं और आध्यात्मिक शक्ति की अविस्मरणीय स्मृतियों को व्यक्त किया। उन्होंने सभी को अपने संस्कारों को पवित्र एवं शांतिमय बनाकर ज्ञान और योग की ज्योति पूरे विश्व में फैलाने तथा भारत को विश्व गुरु बनाने के ईश्वरीय लक्ष्य में सहभागी बनने का आह्वान किया।
समारोह में उपस्थित वरिष्ठ सदस्यों ने मम्मा, जगदंबा मां, दीदियों एवं दादियों के साथ मनाई गई पुरानी दीपावलियों की मधुर स्मृतियां भी साझा कीं। देश-विदेश से आए भाई-बहनों ने मधुबन की दिवाली को अपने जीवन का विशेष आध्यात्मिक अनुभव बताया। ब्राजील सहित विभिन्न देशों से आए सदस्यों ने यहां प्राप्त शांति, खुशी और आध्यात्मिक प्रेरणा को अपने देश तक ले जाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम में भांगड़ा, गरबा एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्सव के आनंद को और बढ़ाया। पूरा वातावरण प्रेम, उमंग, उत्साह और आध्यात्मिक एकता से सराबोर रहा।
ग्लोबल हॉस्पिटल में आध्यात्मिक दीपावली – सेवा, प्रेम और आत्मिक प्रकाश का अनुपम संगम

माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के ग्लोबल हॉस्पिटल में भी दीपावली का पर्व विशेष उत्साह और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी जी की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को और भी यादगार बना दिया।
दीदी जी के आगमन पर ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक एवं संस्था के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बीके डॉ. प्रताप मेहता भाई जी सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर हॉस्पिटल के एडमिन विभाग प्रमुख बीके महेंद्र भाई, अकाउंट्स विभाग प्रमुख बीके मीना दीदी, नर्सिंग प्रमुख बीके रूपा दीदी, डाइटिशियन बीके सुजाता दीदी सहित हॉस्पिटल के सदस्यों ने दीदी जी के प्रति अपना स्नेह एवं सम्मान व्यक्त किया।
समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गीत-संगीत और उत्साहपूर्ण वातावरण ने दीपोत्सव की खुशियों को और भी आकर्षक बना दिया। पूरा परिसर प्रेम, आनंद और आध्यात्मिक उमंग से जगमगा उठा।
अपने आशीर्वचनों में राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी जी ने सभी को दीपावली की मंगलकामनाएं देते हुए प्रेरणा दी कि जिस प्रकार हम बाहरी दीपों को सजाते और जलाते हैं, उसी प्रकार अपनी आत्मा को भी ज्ञान, योगबल और दैवी गुणों से सजाकर सदा प्रकाशित रखना चाहिए।
इस अवसर पर वक्ताओं ने दीपक को आत्मा की ज्योति का प्रतीक बताते हुए कहा कि शरीर मिट्टी के दीपक के समान है और आत्मा उसकी ज्योति है। ज्ञान, योगबल, गुणों की धारणा और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से हमें अपने आत्मिक दीपक को निरंतर प्रज्वलित रखना है। दीदी जी की ज्ञान रत्नों से सभी का आध्यात्मिक श्रृंगार करने और निरंतर सेवा में तत्पर रहने की विशेषता को भी याद किया गया।
ग्लोबल हॉस्पिटल का यह दीपोत्सव केवल एक पारंपरिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति, सेवा, प्रेम, पवित्रता और सद्भावना का सुंदर संगम बन गया।
दोनों ही स्थानों पर मनाया गया यह दिव्य दीपोत्सव इस संदेश को साकार कर गया कि सच्ची दीपावली केवल बाहरी रोशनी में नहीं, बल्कि आत्मा में ज्ञान, शांति, प्रेम और पवित्रता के दीप प्रज्वलित करने में है। जब प्रत्येक आत्मा अपने श्रेष्ठ संस्कारों और शुभ संकल्पों से प्रकाशित होगी, तभी विश्व में सुख, शांति और खुशहाली का प्रकाश फैलेगा।





























