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विवेक के 5 पॉइंट्स अपनाकर ईर्ष्या पर काबू पाएं

April 21, 2024

विवेक के 5 पॉइंट्स अपनाकर ईर्ष्या पर काबू पाएं

1.मैं आत्मा; अनेकों गुणों और प्राप्तियों से संपन्न हूँ- 

मैं खुद की विशेषताओं के कारण बहुत खास और अनोखी हूँ, ये शक्तिशाली चेतना मेरी भावनाओं और खुद के प्रति मेरे नजरिए को बहुत ऊपर उठाती है। हम स्वयं की दूसरों के साथ तुलना करने से और उनके प्रति हमारी ईर्ष्या की भावना को तब रोक सकते हैं, जब हम स्वयं के प्रति गहराई से ये अनुभव करते हैं कि हम कौन हैं और कितना महत्व रखते हैं।

 

2.परमात्मा की नजरों में हम सभी समान हैं और कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है-

कभी-कभी दूसरों की प्राप्तियां; कि वे जैसे दिखते हैं, उनका व्यक्तित्व, धन, यश या संबंध हमें आकर्षित करते हैं और हम खुद को हीन महसूस करते हैं या उनसे ईर्ष्या करने लगते हैं। ऐसे समय में, हमेशा महसूस करें कि, परमात्मा हम सभी को समान रूप से हम जो हैं, जैसे हैं, वैसे ही प्यार करते हैं और कोई भी दूसरा व्यक्ति न तो हमसे बड़ा है और न ही हम किसी से छोटे हैं।

 

3.हमारी स्वयं के साथ ही रेस है नाकि किसी दूसरे व्यक्ति के साथ-

बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन की भावना हमारे अंदर ईर्ष्या भाव पैदा करती है और हम हर उस चीज को ओवरटेक करना चाहते हैं जिस बात में वह दूसरा व्यक्ति हमसे आगे होता है। इससे हम खुद को थका हुआ महसूस करते हैं और साथ ही हमारे आध्यात्मिक खजाने; शांति, प्यार, आनंद और खुशियां कम होने लगती हैं। लेकिन आध्यात्मिक सिद्धांत ये कहता है कि दूसरों पर ध्यान देने की बजाय कि दूसरों में क्या अच्छा है, जिससे हमारे अंदर ईर्ष्या भाव पैदा होता है, इसके बजाय हम पूरा ध्यान खुद पर दें और हर दिन खुद को ज्यादा से ज्यादा बेहतर बनाएं।

 

4.ये बहुत अच्छी बात है कि, हम बड़े सपने देखें, पर हमें उनसे अटैच नहीं होना चाहिए

ईर्ष्या की भावना हमारे मन में तब आती है जब हम अपने जीवन में जल्दी और बहुत तेजी से आगे निकलने का प्रयास करते हैं, और इसके लिए हम अपने स्वास्थ्य और संबंधो को भी नजरअन्दाज कर देते हैं। जीवन की सुंदरता तब है जब हम अपने सपनों को खुद पर हावी न होने दें और साथ ही उनका नकारात्मक प्रभाव भी खुद पर पड़ने न दें। जितना अधिक हम खुद के सपनों से डिटेच रहेंगे, उतना ही अधिक हमारा दूसरों के लिए ईर्ष्या भाव कम होगा और हमारी जीवन यात्रा हल्की होगी।

 

5.जितना अधिक सादगी, उतनी कम ईर्ष्या- ये अधिकतर देखा गया है कि जिन लोगों के विचार और जीवन सरल होता है उनमें कभी ईर्ष्या नहीं होती है। सरलता; मतलब कम सोचना और जो हमारे पास है उससे संतुष्ट होना, न कि ज्यादा की चाहत रखना। ऐसे लोग हमेशा प्रसन्न रहते हैं और हमेशा खुद को ही देखते हैं न कि बाहरी किसी व्यक्ति को या संसार को।

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