ब्रह्माकुमारीज़ नेविगेशन

ईश्वर को जीवन अर्पण करने वाली - अनुभवगाथा

जिस पेड़ की जड़ें जितनी ज्यादा गहरी होती हैं, वो उतना ही ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होता है। इसी प्रकार, किसी भी संगठन को चलाने वाले निमित्त व्यक्तियों की भी त्याग, तपस्या की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, वह संगठन भी उतना ही शक्तिशाली, दीर्घजीवी और निर्विघ्न होता है। प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय इस अर्थ में एक अद्वितीय संगठन है। इस संगठन के एक-एक आधारमूर्त, आदि रत्न ऐसे ही तपस्वी हैं जिन्होंने अपने आप को, अपने त्याग को गुप्त रखते हुए, अथक होकर, निःस्वार्थ भाव से श्रीमत प्रमाण श्वास-श्वास से मानवता की आजीवन आध्यात्मिक सेवा की।

Dadi allrounder ji

कुमारियों को दादी ऐसी पालना देती थी कि कोई अपनी लौकिक कुमारी को भी शायद ऐसी पालना ना दे पाए। दादी कहती थी, यह बाबा का यज्ञ है, बाबा ही पालना देने वाला है। जो पालना हमने बाबा से ली है, वो हम तुमको दे रहे हैं।

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Bk jayanti didi london anubhavgatha

ब्र.कु. जयन्ती बहन ने अपने जीवन को ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित किया। 19 साल की उम्र से आध्यात्मिकता और योग का अभ्यास शुरू किया और 21 साल की उम्र में ब्रह्माकुमारी संस्थान के लिए अपने जीवन को पूरी तरह से समर्पित कर दिया। दुनिया भर में भ्रमण कर उन्होंने

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Bk puri bhai bangluru anubhavgatha

पुरी भाई, बेंगलूरु से, 1958 में पहली बार ब्रह्माकुमारी ज्ञान में आए। उन्हें शिव बाबा के दिव्य अनुभव का साक्षात्कार हुआ, जिसने उनकी जीवनशैली बदल दी। शुरुआत में परिवार के विरोध के बावजूद, उनकी पत्नी भी इस ज्ञान में आई। बाबा से पहली मुलाकात में, पुरी भाई को अलौकिक सुख

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Bk kamlesh didi ji anubhav gatha

प्यारे बाबा ने कहा, “लौकिक दुनिया में बड़े आदमी से उनके समान पोजिशन (स्थिति) बनाकर मिलना होता है। इसी प्रकार, भगवान से मिलने के लिए भी उन जैसा पवित्र बनना होगा। जहाँ काम है वहाँ राम नहीं, जहाँ राम है वहाँ काम नहीं।” पवित्र जीवन से सम्बन्धित यह ज्ञान-बिन्दु मुझे

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Bk prem didi punjab anubhavgatha

ब्रह्माकुमारी प्रेम बहन जी, फरीदकोट, पंजाब से, 1965 में ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करने के बाद साकार बाबा के साथ अपने अनमोल अनुभव साझा करती हैं। बाबा से पहली मुलाकात में ही उन्होंने रूहानी शक्ति का अनुभव किया और अपने जीवन की दिशा बदलते देखी। बाबा के साथ बिताए हर पल

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Dadi ratanmohini bhagyavidhata

ब्रह्माकुमारी दादी रतनमोहिनी जी कहती हैं कि हम बहनें बाबा के साथ छोटे बच्चों की तरह बैठते थे। बाबा के साथ चिटचैट करते, हाथ में हाथ देकर चलते और बोलते थे। बाबा के लिए हमारी सदा ऊँची भावनायें थीं और हमें भगवान के साथ होने का अहसास होता था। बाबा

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Bk damyanti didi junagadh anubhavgatha

दमयन्ती बहन जी, जूनागढ़, गुजरात से, 40 साल पहले साकार बाबा से पहली बार मिलीं। उस मुलाकात में बाबा की नज़रों ने उनके दिल को छू लिया और उन्हें आत्मिक सुख का अनुभव कराया। बाबा की मधुर मुस्कान और उनकी उपस्थिति ने उन्हें सदा के लिए प्रेरित किया। बाबा को

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Bk sister maureen hongkong caneda anubhavgatha

बी के सिस्टर मौरीन की आध्यात्मिक यात्रा उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट रही। नास्तिकता से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़कर उन्होंने राजयोग के माध्यम से परमात्मा के अस्तित्व को गहराई से अनुभव किया। हांगकांग में बीस सालों तक ब्रह्माकुमारी की सेवा करते हुए, उन्होंने बाबा के नयनों में अपार शांति, प्यार

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Dadi pushpshanta ji

आपका लौकिक नाम गुड्डी मेहतानी था, बाबा से अलौकिक नाम मिला ‘पुष्पशान्ता’। बाबा आपको प्यार से गुड्डू कहते थे। आप सिन्ध के नामीगिरामी परिवार से थीं। आपने अनेक बंधनों का सामना कर, एक धक से सब कुछ त्याग कर स्वयं को यज्ञ में संपूर्ण रूप से समर्पित किया। आप बहुत

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Bk nayna didi london

युगांडा में जन्मी और लंदन में पली-बढ़ी ब्र.कु. नयना का जीवन अनुभवों और आत्म-खोज से भरा हुआ है। जानिए कैसे मधुबन में बाबा की दृष्टि ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। फूड एंड सोल किताब की लेखिका और ट्रैवल सेवा की मार्गदर्शिका।

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Dadi sheelindra ji

आपका जैसा नाम वैसा ही गुण था। आप बाबा की फेवरेट सन्देशी थी। बाबा आपमें श्री लक्ष्मी, श्री नारायण की आत्मा का आह्वान करते थे। आपके द्वारा सतयुगी सृष्टि के अनेक राज खुले। आप बड़ी दीदी मनमोहिनी की लौकिक में छोटी बहन थी। लौकिक-अलौकिक परिवार के कल्याण की आप एक

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Bk elizabeth didi africa anubhavgatha

ब्र.कु. एलिज़ाबेथ बहन का जीवन एक प्रेरणादायक सफर है। अफ्रीका में जन्म, नन बनने का अनुभव और फिर ब्रह्माकुमारी मार्ग पर चलते हुए नैरोबी और नाकरू सेवाकेन्द्र पर ईश्वरीय सेवा का विस्तार किया।

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Dada chandrahas ji

चन्द्रहास, जिन्हें माधौ के नाम से भी जाना जाता था, का नाम प्यारे बाबा ने रखा। साकार मुरलियों में उनकी आवाज़ बापदादा से पहले सुनाई देती थी। ज्ञान-रत्नों को जमा करने का उन्हें विशेष शौक था। बचपन में कई कठिनाइयों का सामना करते हुए, उन्होंने यज्ञ की सेवाओं में महत्वपूर्ण

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Dadi chandramani ji

आपको बाबा पंजाब की शेर कहते थे, आपकी भावनायें बहुत निश्छल थी। आप सदा गुणग्राही, निर्दोष वृत्ति वाली, सच्चे साफ दिल वाली निर्भय शेरनी थी। आपने पंजाब में सेवाओं की नींव डाली। आपकी पालना से अनेकानेक कुमारियाँ निकली जो पंजाब तथा भारत के अन्य कई प्रांतों में अपनी सेवायें दे

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Bk sudha didi - moscow anubhavgatha

ब्रह्माकुमारी सुधा बहन के जीवन की कहानी प्रेरणा देती है—दिल्ली में शुरू हुआ ज्ञान, समर्पण से बढ़ते हुए रूस में सेवा का विस्तार। जानें उनके जीवन की यात्रा, जगदीश भाई और दादी गुलज़ार से प्राप्त मार्गदर्शन, और कैसे उन्होंने कठिनाइयों का सामना कर ईश्वरीय सेवा को आगे बढ़ाया।

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Bk prabha didi bharuch anubhavgatha

प्रभा बहन जी, भरूच, गुजरात से, सन् 1965 में मथुरा में ब्रह्माकुमारी ज्ञान प्राप्त किया। उनके पिताजी के सिगरेट छोड़ने के बाद, पूरा परिवार इस ज्ञान में आ गया। बाबा से पहली मुलाकात में ही प्रभा बहन को बाबा का स्नेह और शक्ति का अनुभव हुआ। बाबा ने उन्हें ‘सूर्यप्रभा’

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Bk erica didi - germany anubhavgatha

एरिका बहन का सफर दिल छू लेने वाला है। क्रिश्चियन धर्म से ईश्वरीय ज्ञान तक, उनके जीवन में आध्यात्मिक बदलाव, बाबा के साथ अटूट रिश्ता और भारत के प्रति उनके गहरे प्रेम को जानें। राजयोग से मिली शांति ने उनके जीवन में बदलाव लाया और उन्हें स्व-परिवर्तन की राह दिखाई।

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Bk uttara didi chandigarh anubhavgatha

ब्रह्माकुमारी उत्तरा बहन जी की पहली मुलाकात साकार बाबा से 1965 में हुई। बाबा से मिलने के लिए उनके मन में अपार खुशी और तड़प थी। पहली बार बाबा को देखने पर उन्हें ऐसा अनुभव हुआ जैसे वे ध्यान में खो गई हों, और बाबा के मस्तक पर ओजस्वी ज्योति

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Bk santosh didi sion anubhavgatha

संतोष बहन, सायन, मुंबई से, 1965 में पहली बार साकार बाबा से मिलीं। बाबा की पहली मुलाकात ने उन्हें विश्वास दिलाया कि परमात्मा शिव ब्रह्मा तन में आते हैं। बाबा के दिव्य व्यक्तित्व और फरिश्ता रूप ने उन्हें आकर्षित किया। बाबा ने उन्हें सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित

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Bk suresh pal bhai shimla anubhavgatha

ब्रह्माकुमार सुरेश पाल भाई जी, शिमला से, 1963 में पहली बार दिल्ली के विजय नगर सेवाकेन्द्र पर पहुंचे और बाबा के चित्र के दर्शन से उनके जीवन की तलाश पूर्ण हुई। 1965 में जब वे पहली बार मधुबन गए, तो बाबा से मिलकर उन्हें गीता के सच्चे ज्ञान का अनुभव

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Bk kamlesh didi bhatinda anubhavgatha

ब्रह्माकुमारी कमलेश बहन जी, भटिण्डा, पंजाब से, अपने साकार बाबा के साथ के अनमोल अनुभव साझा करती हैं। 1954 में पहली बार बाबा से मिलने पर उन्होंने बाबा की रूहानी शक्ति का अनुभव किया, जिससे उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। बाबा के वरदान ने उनके जीवन की दिशा

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Dadi santri ji

ब्रह्मा बाबा के बाद यज्ञ में सबसे पहले समर्पित होने वाला लौकिक परिवार दादी शान्तामणि का था। उस समय आपकी आयु 13 वर्ष की थी। आपमें शुरू से ही शान्ति, धैर्य और गंभीरता के संस्कार थे। बाबा आपको ‘सचली कौड़ी’ और ‘हर की पौड़ी’ कहते थे। बोर्डिंग के निमित्त पाँच

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Bk sister kiran america eugene anubhavgatha

बी के सिस्टर किरन की आध्यात्मिक यात्रा उनके गहन अनुभवों से प्रेरित है। न्यूयॉर्क से लेकर भारत के मधुबन तक की उनकी यात्रा में उन्होंने ध्यान, योग और ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े ज्ञान की गहराई को समझा। दादी जानकी के साथ उनके अनुभव और बाबा से मिली मातृपालना ने उनके

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Dadi bhoori ji

दादी भूरी, यज्ञ की आदिकर्मी, आबू में अतिथियों को रिसीव करने और यज्ञ की खरीदारी का कार्य करती थीं। उनकी निष्ठा और मेहनत से वे सभी के दिलों में बस गईं। 2 जुलाई, 2010 को दादी ने बाबा की गोदी में स्थान पाया। ब्र.कु. ओमप्रकाश भाई ने उनकी अथक सेवा

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Bk satyavati didi anubhavgatha

तिनसुकिया, असम से ब्रह्माकुमारी ‘सत्यवती बहन जी’ लिखती हैं कि 1961 में मधुबन में पहली बार बाबा से मिलते ही उनका जीवन बदल गया। बाबा के शब्द “आ गयी मेरी मीठी, प्यारी बच्ची” ने सबकुछ बदल दिया। एक चोर का सामना करने पर बाबा ने उन्हें ‘शेरनी बच्ची’ कहा। बाबा

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Bk sundarlal bhai anubhavgatha

सुन्दर लाल भाई ने 1956 में दिल्ली के कमला नगर सेंटर पर ब्रह्माकुमारी ज्ञान प्राप्त किया। ब्रह्मा बाबा से पहली बार मिलकर उन्होंने परमात्मा के साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध महसूस किया। बाबा की दृष्टि से उन्हें अतीन्द्रिय सुख और अशरीरीपन का अनुभव हुआ। 1960 में, बाबा के निर्देश पर उन्होंने

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ब्र. कु. ऐन्न बोमियन

ग्वाटेमाला की सफल उद्योगपति सिस्टर ऐन्न बोमियन जब राजयोग और ब्रह्माकुमारियों के संपर्क में आईं, तो उनका जीवन ही बदल गया। दादी जानकी के सान्निध्य में उन्होंने ईश्वरीय ज्ञान पाया और “गॉड हाउस” बनाया, जहाँ सेवा, मेडिटेशन और शांति का वातावरण है। यह यात्रा एक प्रेरणा है।

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Bk brijmohan bhai ji anubhavgatha

भारत में प्रथा है कि पहली तनख्वाह लोग अपने गुरु को भेजते हैं। मैंने भी पहली तनख्वाह का ड्राफ्ट बनाकर रजिस्ट्री करवाकर बाबा को भेज दिया। बाबा ने वह ड्राफ्ट वापस भेज दिया और मुझे कहा, किसके कहने से भेजा? मैंने कहा, मुरली में श्रीमत मिलती है, आप ही कहते

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Bk jayanti didi anubhavgatha

लन्दन से ब्रह्माकुमारी ‘जयन्ती बहन जी’ बताती हैं कि सन् 1957 में पहली बार बाबा से मिलीं, तब उनकी आयु 8 वर्ष थी। बाबा ने मीठी दृष्टि से देखा। 1966 में दादी जानकी के साथ मधुबन आयीं, बाबा ने कहा, “बच्ची विदेश में सेवा करेगी।” 1968 में बाबा से समर्पण

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Dadi dhyani anubhavgatha

दादी ध्यानी, जिनका लौकिक नाम लक्ष्मी देवी था, ने अपने आध्यात्मिक जीवन में गहरा प्रभाव छोड़ा। मम्मा की सगी मौसी होने के कारण प्यारे बाबा ने उनका नाम मिश्री रख दिया। उनकी सरलता, नम्रता और निःस्वार्थ सेवाभाव ने अनेक आत्माओं को प्रभावित किया। अंबाला में कई वर्षों तक सेवा करने

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Bk vedanti didi

नैरोबी, अफ्रीका से ब्रह्माकुमारी ‘वेदान्ती बहन जी’ लिखती हैं कि 1965 में पहली बार मधुबन आयीं और बाबा से मिलीं। बाबा ने उन्हें पावन बनकर विश्व की सेवा करने का वरदान दिया। बाबा ने वेदान्ती बहन को सफेद पोशाक पहनने की प्रेरणा दी और उनका नाम ‘वेदान्ती’ रखा। बाबा ने

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Bk geeta didi los angeles anubhavgatha

जानिए ब्र.कु. गीता बहन के प्रेरणादायक जीवन की कहानी। कैसे उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़कर विदेशों में ईश्वरीय सेवा की और भारतीय संस्कृति के संस्कारों को आगे बढ़ाया।

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Bk amirchand bhaiji

चण्डीगढ़ से ब्रह्माकुमार अमीर चन्द जी लिखते हैं कि उनकी पहली मुलाकात साकार बह्या बाबा से जून 1959 में पाण्डव भवन, मधुबन में हुई। करनाल में 1958 के अंत में ब्रह्माकुमारी विद्यालय से जुड़कर उन्होंने शिक्षा को अपनाया। बाबा का अद्भुत स्नेह और शक्ति का अनुभव हुआ। बाबा से मिलकर

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Dadi shantamani ji

ब्रह्मा बाबा के बाद यज्ञ में सबसे पहले समर्पित होने वाला लौकिक परिवार दादी शान्तामणि का था। उस समय आपकी आयु 13 वर्ष की थी। आपमें शुरू से ही शान्ति, धैर्य और गंभीरता के संस्कार थे। बाबा आपको ‘सचली कौड़ी’ और ‘हर की पौड़ी’ कहते थे। बोर्डिंग के निमित्त पाँच

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Bk mahesh bhai pandav bhavan anubhav gatha

ब्रह्माकुमार महेश भाईजी, पाण्डव भवन, आबू से, अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि कैसे बचपन से ही आत्म-कल्याण की तीव्र इच्छा उन्हें साकार बाबा की ओर खींच लाई। सन् 1962 में ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े और 1965 में पहली बार बाबा से मिले। बाबा के साथ पहली मुलाकात

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Experience with dadi prakashmani ji

आपका प्रकाश तो विश्व के चारों कोनों में फैला हुआ है। बाबा के अव्यक्त होने के पश्चात् 1969 से आपने जिस प्रकार यज्ञ की वृद्धि की, मातृ स्नेह से सबकी पालना की, यज्ञ का प्रशासन जिस कुशलता के साथ संभाला, उसे तो कोई भी ब्रह्मावत्स भुला नहीं सकता। आप बाबा

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Dadi rukmani ji anubhavgatha 2

रुकमणी दादी, वडाला की ब्रह्माकुमारी, 1937 में साकार बाबा से मिलीं। करांची से हैदराबाद जाकर अलौकिक ज्ञान पाया और सुबह दो बजे उठकर योग तपस्या शुरू की। बाबा के गीत और मुरली से परम आनंद मिला। उन्होंने त्याग और तपस्या का जीवन अपनाया। उनका अनुभव और जीवन बहुत प्रेरणादायक है।

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Bk rajni didi - japan anubhavgatha

ब्रह्माकुमारी रजनी बहन का आध्यात्मिक सफर, स्व-परिवर्तन की अद्भुत कहानी है। दिल्ली में शुरू हुई यात्रा ने उन्हें जापान और न्यूयॉर्क में सेवा के कई अवसर दिए। कोबे भूकंप के कठिन समय में बाबा की याद से मिली शक्ति का अनुभव, उनकी आत्मबल की गवाही देता है। जानें कैसे उन्होंने

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Bk santosh bahan sant petersbarg anubhav gatha

सन्तोष बहन, ब्रह्माकुमारी मिशन की रूस में निर्देशिका, जिन्होंने बचपन से ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़े रहकर रशियन भाषा में सेवा की। मास्को और सेन्ट पीटर्सबर्ग में सैकड़ों आत्माओं को राजयोग सिखाया। जानिए उनके प्रेरणादायक अनुभव।

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Dadi brijindra ji

आप बाबा की लौकिक पुत्रवधू थी। आपका लौकिक नाम राधिका था। पहले-पहले जब बाबा को साक्षात्कार हुए, शिवबाबा की प्रवेशता हुई तो वह सब दृश्य आपने अपनी आँखों से देखा। आप बड़ी रमणीकता से आँखों देखे वे सब दृश्य सुनाती थी। बाबा के अंग-संग रहने का सौभाग्य दादी को ही

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