हर वर्ष 22 अप्रैल को दुनिया पृथ्वी दिवस मनाती है—यह एक ऐसा समय होता है जब हम पृथ्वी के साथ अपने संबंध पर विचार करते हैं और उसे सुरक्षित रखने के अपने संकल्प को फिर से मजबूत करते हैं। पृथ्वी दिवस 2026 का विषय है “Our Power, Our Planet,” जो हमें तात्कालिकता और आशा की एक नई किरण—दोनों का संदेश देता है। आज जब पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं, यह हमें याद दिलाता है कि असली बदलाव हमारे रोज़मर्रा के चुनावों से शुरू होता है—चाहे वे समुदाय हों, शिक्षक हों, कामगार हों, नवाचार करने वाले हों या परिवार। पृथ्वी की देखभाल करने की शक्ति पहले से ही हमारे भीतर है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो इस संदेश का अर्थ और भी गहरा है। पृथ्वी को फिर से ठीक करने की शक्ति केवल व्यवस्थाओं में नहीं, बल्कि हमारी चेतना में भी होती है। हम अक्सर पर्यावरण में बदलाव को नीतियों, विज्ञान और बाहरी कार्यों के माध्यम से देखते हैं। फिर भी एक और सूक्ष्म स्तर है—जिस पर अक्सर ध्यान नहीं जाता—और वह है हमारे विचारों, भावनाओं और जागरूकता का स्तर।

क्या यह हो सकता है कि हमारे सोचने और महसूस करने का तरीका भी पृथ्वी को प्रभावित करता हो?
क्या यह संभव है कि हमारा आंतरिक संसार, हमारे बाहरी संसार को हमारी कल्पना से कहीं अधिक प्रभावित कर रहा हो?
ब्रह्माकुमारीज़ में, हम समझते हैं कि स्थायी रूप से पर्यावरण की देखभाल केवल हमारे कर्मों से नहीं, बल्कि उस चेतना की गुणवत्ता से शुरू होती है, जिससे हम कार्य करते हैं। जब हमारी आंतरिक जागरूकता ऊँची होती है, तो बाहरी जिम्मेदारी निभाना स्वाभाविक, निरंतर और करुणामय बन जाता है।
इस पृथ्वी दिवस 2026 पर, आइए हम अपनी संगठन की शक्ति को पहचानें—न केवल कर्मों के माध्यम से पृथ्वी की रक्षा करने के लिए, बल्कि शांतिपूर्ण, ज़िम्मेदार और आध्यात्मिक रूप से जागरूक जीवन जीकर इसे बेहतर बनाने के लिए।

आत्मा और प्रकृति: एक प्राचीन संबंध
आध्यात्मिक ज्ञान के अनुसार, जैसा कि ब्रह्माकुमारीज़ में बताया जाता है, आत्मा और प्रकृति के पाँच तत्वों के बीच गहरा संबंध है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवंत और संवेदनशील ऊर्जा के रूप में देखा जाता है।
जब हम मनुष्यात्मा शांति, पवित्रता, करुणा भरपूर होती है और आत्म-चिंतन में स्थित रहती है, तब प्रकृति भी संतुलित रहती है। लेकिन जब चेतना लालच, भय और अहंकार के कारण अस्थिर हो जाती है, तो उसका असंतुलन वातावरण में दिखाई देता है।
पर्यावरण का बिगड़ना, जलवायु का अस्थिर होना और पारिस्थितिक तनाव केवल भौतिक परिणाम नहीं हैं। इन्हें मानवता की सामूहिक ऊर्जा के असर के रूप में भी समझा जा सकता है।

वाइब्रेशन का अदृश्य प्रभाव
आध्यात्मिक ज्ञान हमें सिखाता है कि हमारे संकल्प कोई अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं। वे चारों ओर फैलते हैं और हमारे आस-पास के वातावरण को प्रभावित करते हैं। हर संकल्प एक बीज की तरह है, जिसकी सूक्ष्म तरंगें (वाइब्रेशन) पृथ्वी को भी प्रभावित करते हैं।
जिस तरह ज़हरीली गैसें हवा को प्रदूषित करती हैं, उसी तरह नकारात्मक सोच हमारे पर्यावरण को भी दूषित करती है। और, ठीक उसी तरह, शांति, प्रेम और शुभ भावना के संकल्प एक अदृश्य 'हीलिंग एनर्जी' (उपचार करने वाली ऊर्जा) की तरह काम करते हैं।
इसीलिए आध्यात्मिक शिक्षाओं में संकल्पों को भी पर्यावरण के प्रति एक योगदान माना गया है। केवल हम क्या उपयोग करते हैं, कैसे बनाते हैं या क्या त्यागते हैं, यह ही महत्वपूर्ण नहीं है — बल्कि यह भी बहुत ज़रूरी है कि हम बार-बार क्या सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं और अपने भीतर कैसी भावनाएं रखते हैं।

अपने संकल्पों से प्रकृति को हील करें
अपने संकल्पों को एक सुंदर दिशा दें। इस पृथ्वी दिवस पर, प्रकृति के साथ जुड़े और, शांति, प्रेम और पवित्रता की ऊर्जा को पांचों तत्वों तक पहुंचाने का अनुभव करें।
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भीतर से संतुलन की पुनर्स्थापना
आध्यात्मिकता के अनुसार, पर्यावरण को फिर से स्वस्थ बनाने की शुरुआत आत्मा के मूल गुणों को जागृत करने से होती है: शांति, प्रेम, पवित्रता, शक्ति, आनंद और ज्ञान। ये आंतरिक गुण हर आत्मा के लिए स्वाभाविक हैं, हालांकि आज की रोज़मर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर इन्हें भूल जाते हैं।
मेडिटेशन, मौन और आत्म-जागरूकता के माध्यम से हमारा मन हल्का और स्पष्ट होने लगता है। यह बदलाव हमारी वाणी, हमारे निर्णयों, रिश्तों और जीवनशैली को प्रभावित करता है। धीरे-धीरे, हम जो ऊर्जा फैलाते हैं, वह जीवन को सहारा देने वाली और सकारात्मक बनने लगती है।
यह कोई काल्पनिक बात नहीं है। जिस तरह एक नदी का प्रदूषण पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को प्रभावित करता है, उसी तरह बार-बार किए जाने वाला एक श्रेष्ठ विचार, पृथ्वी की वाइब्रेशन को बदलने की शक्ति रखता है। आंतरिक परिवर्तन भले ही शांत लगे, लेकिन यही असली बुनियाद है।

पृथ्वी दिवस 2026 में योगदान: एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण
पृथ्वी दिवस 2026 के संदेश — “Our Power, Our Planet” — के अनुरूप, ब्रह्माकुमारीज़ में पर्यावरण की देखभाल को एक साझा जिम्मेदारी मानते हैं, जो कर्म और जागरूकता दोनों पर आधारित है। इस वर्ष का विषय हमारे रोज़मर्रा के चुनावों, स्थानीय नेतृत्व और व्यावहारिक जिम्मेदारी की शक्ति को दर्शाता है; और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इसकी शुरुआत हमारी चेतना से होती है। पर्यावरण की रक्षा आध्यात्मिक जीवन से अलग नहीं है। यह हमारे सरल और श्रेष्ठ चुनावों के माध्यम से दिखाई देता है—हम क्या उपयोग करते हैं, कैसे देखभाल करते हैं, संसाधनों का कैसे उपयोग करते हैं, और अपने संकल्पों व कर्मों से विश्व के वातावरण में क्या योगदान देते हैं।
चाहे वह वृक्षारोपण हो, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का प्रयोग, योगिक खेती, सात्विक भोजन, या पृथ्वी के लिए सामूहिक मेडिटेशन —हर प्रयास एक गहरी समझ को दर्शाता है कि बाहरी सुधार तभी मज़बूत होता है जब हम आंतरिक रूप से बदलते हो ।
सच्ची और स्थायी स्वच्छता आत्मा की पवित्रता से शुरू होती है। जब हम अपने भीतर शांति, संयम, जिम्मेदारी और सम्मान की भावना विकसित करते हैं, तो ये गुण स्वाभाविक रूप से पृथ्वी पर एक बेहतर और सुरक्षित जीवनशैली को आकार देते हैं।

कल्पतरु: वृक्षारोपण और आत्मा का पोषण
'कल्पतरु'—जिसका अर्थ है कल्प (इच्छा), तरु (वृक्ष) और रूह (आत्मा)—ब्रह्माकुमारीज़ की पर्यावरण से जुड़ी एक ऐसी पहल है, जो वृक्षारोपण के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता को भी जोड़ती है। इसका उद्देश्य भूमि के पुनर्स्थापन और वृक्षारोपण का एक ऐसा आंदोलन बनाना, जो उच्च मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दे और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को पूरा करने में सहयोग करे।

आरोग्यवन: कल्पतरुह के माध्यम से भूमि का पुनर्स्थापन
जानिए कैसे मदनपल्ले में 'आरोग्यवन' परियोजना, योगिक खेती, ध्यान और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बंजर भूमि को एक आध्यात्मिक-पर्यावरण वन में बदल रही है। यह प्रेरणादायक पहल दिखाती है कि कैसे हमारी आंतरिक जागरूकता और टिकाऊ अभ्यास, मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव-विविधता और प्रकृति के साथ हमारे सामंजस्य को फिर से बेहतर बना सकते हैं।
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योगिक खेती
योगिक खेती राजयोग ध्यान को प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों के साथ जोड़ती है। यह इस समझ पर आधारित है कि चेतना (consciousness) न केवल लोगों को, बल्कि भूमि, बीज, जल और पूरे पर्यावरण को भी प्रभावित करती है। इससे मिट्टी की देखभाल मजबूत होती है, खेती अधिक स्वच्छ बनती है, और प्रकृति के साथ एक सम्मानजनक रिश्ता बनाने के लिए प्रेरित करती है।
भारत की PKVY (परंपरागत कृषि विकास योजना) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त, यह पहल विज्ञान और आध्यात्मिकता के एक शक्तिशाली संगम को दर्शाती है।
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पार्क और हरित क्षेत्र
ब्रह्माकुमारीज़, पूरे भारत में, कई पार्कों और हरित क्षेत्रों का संचालन करती है। ये स्थान हमें याद दिलाते हैं कि शांत, स्वच्छ और हरे-भरे वातावरण हमारे मानसिक सुकून, आध्यात्मिक चिंतन और पृथ्वी के प्रति गहरा सम्मान विकसित करने में मदद करते हैं।

जल: एक पवित्र संसाधन
वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting), सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम और जल के सजग उपयोग के प्रति जागरूकता अभियानों के माध्यम से, ब्रह्माकुमारीज़ के परिसर इस अमूल्य प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। जल की रक्षा करना केवल एक संसाधन का सही प्रबंधन नहीं है, बल्कि जीवन के सबसे आवश्यक तत्वों में से एक के प्रति कृतज्ञता और देखभाल व्यक्त करना है।

आत्मनिर्भरता के लिए सौर ऊर्जा
राजस्थान में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ का 'इंडिया वन' सोलर थर्मल पावर प्लांट तकनीकी नवाचार और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित स्वच्छ ऊर्जा का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह 1 मेगावाट (MW) का सोलर थर्मल प्रोजेक्ट है, जिसे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने (स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने), भरोसेमंद स्वच्छ बिजली देने और स्थानीय समुदाय की मदद करने के लिए बनाया गया है।
विभिन्न केंद्रों पर सौर ऊर्जा से खाना पकाने की प्रणाली और फोटोवोल्टिक सिस्टम के साथ, यह नवीकरणीय ऊर्जा और आत्मनिर्भरता के प्रति एक व्यावहारिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इंडिया वन: उज्ज्वल और स्वच्छ भविष्य की ओर
जानिए कैसे इंडिया वन का सौर नवाचार (solar innovation) समाज और पृथ्वी दोनों का ध्यान रखते हुए, भरोसेमंद और टिकाऊ बिजली का निर्माण कर रहा है।
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सात्विक भोजन: जो पोषण भी देता, पर्यावरण पर भी हल्का हो
सात्विक भोजन शाकाहारी, सरल, और शुद्ध होता है, जिसे ईश्वर की याद में शांत मन से तैयार किया जाता है। यह अहिंसा, संतुलन और आध्यात्मिक जागरूकता के मूल्यों को दर्शाता है। सरलता और पृथ्वी के प्रति सम्मान पर आधारित भोजन के चुनाव, एक अधिक टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, भोजन केवल शरीर का पोषण नहीं करता, बल्कि आत्मा की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।

संयुक्त राष्ट्र में जलवायु संवाद
ब्रह्माकुमारीज़ ने लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र के मंचों और जलवायु संवादों के माध्यम से पर्यावरण, मूल्यों और चेतना से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विमर्श में योगदान दिया है। यहाँ यह रेखांकित किया जाता है कि स्थायी परिवर्तन केवल नीतियों और तकनीक पर ही नहीं, बल्कि मानवीय जागरूकता, नैतिकता और साझा जिम्मेदारी पर भी निर्भर करता है।
यह दृष्टिकोण ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित COP30 में भी दिखाई दिया, जहाँ ब्रह्माकुमारीज़ ने वैश्विक जलवायु संवाद में भाग लिया और पृथ्वी की देखभाल तथा अधिक जागरूक भविष्य के निर्माण पर एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण साझा किया।

हमारी साझा जिम्मेदारी
हम अक्सर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर पृथ्वी छोड़ने की बात करते हैं। लेकिन शायद इसका अर्थ यह भी है कि हम आज अपने आसपास बेहतर वाइब्रेशन का वातावरण छोड़ें।
एक बेहतर पृथ्वी की शुरुआत हमारे भीतर बेहतर वाइब्रेशन से होती है।
आंतरिक शांति हमारे चारों ओर भी शांति पैदा करने में मदद करती है। स्पष्ट मन हमें समझदारी भरे फैसलों की ओर ले जाता है, और हमारे भीतर की करुणा हमारे कर्मों में भी करुणा भाव लाती है। पृथ्वी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है—हमारे घरों में, हमारे समुदायों में, हमारी संस्थाओं में और हमारे हर दिन जीने के तरीके में।

पृथ्वी दिवस 2026 के लिए एक व्यक्तिगत संकल्प
इस पृथ्वी दिवस 2026 पर, आइए हम खुद से एक वादा करें:
- अनावश्यक अति को इंकार करें
- संसाधनों का सजगता से उपयोग करें
- टिकाऊ और सुरक्षित विकल्पों को अपनाए
- शांत और शक्तिशाली संकल्पों को विकसित करें
क्योंकि वास्तविक परिवर्तन भीतर और बाहर—दोनों से शुरू होता है।
एक छोटा सा समझदारी भरा चुनाव—जैसे कपड़े का थैला साथ रखना, पानी बचाना, पेड़ लगाना, प्यार से बात करना, या अपने अशांत मन को शांत करना—हमारी पृथ्वी को फिर से स्वस्थ बनाने की दिशा में एक बड़ी लहर शुरू कर सकता है।

प्रकृति का पुनर्स्थापन करें
आध्यात्मिकता के अनुसार, पृथ्वी केवल संरक्षण का विषय नहीं है; इसे सम्मान देने, आदर करने और पुनर्स्थापित के लिए है।
इस पृथ्वी दिवस 2026 पर, परिवर्तन को एक शक्तिशाली शुरुआत दें: हमारे आंतरिक संसार से।
हमारे पास केवल एक ही पृथ्वी है, तो क्यों न हम आत्मा के शुद्ध और पवित्र संकल्पों के वाइब्रेशन्स से इसे फिर से पावन बनाएँ?

ब्रह्माकुमारीज़ एनवायरनमेंट इनिशिएटिव
आइए जानें कि ब्रह्माकुमारीज़ एनवायरनमेंट इनिशिएटिव कैसे योग, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन और संतुलित जीवनशैली के सिद्धांतों द्वारा आंतरिक जागरूकता और रोज़मर्रा के कार्यों को साथ चलना सिखाती है।
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