Brahma Kumaris

स्वर्ग जैसा अनुभव: तीन दिनों की सीख

नागेश स्वामी

नागेश स्वामी

2025

सोर्सिंग हेड, पाटिल ऑटोमेशंस लिमिटेड

पुणे

स्वर्ग जैसा अनुभव: तीन दिनों की सीख
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June 5, 2026
Testimonial Highlight

एक भी इंसान ऐसा मुझे नहीं लगा कि वो नाराज़ है। यहाँ हर व्यक्ति अपने काम में खुश दिखाई देता है। मुझे लगता है कि यहाँ सतयुग जैसा वातावरण है।

मुझे लगताा है यह स्वर्ग है। ऐसा ज़िंदगी में मैंने कभी देखा नहीं कि इतने सारे लोग एक टाइम में खुश कैसे रह सकते हैं।

ये अचंभा है मेरे लिए। एक भी आदमी, एक भी इंसान ऐसा मुझे नहीं लगा कि वो नाराज़ है। माली काम भी कर रहा है तो वो खुशी से कर रहा है। तो ये एक मुझे लग रहा है कि यहाँ पे सतयुग जैसा एनवायरमेंट है, जो कि हम किताबों में और ख्वाबों में सुनते हैं। यहाँ पे सच्चाई ऐसी है।

देखो इसके पहले हमने कभी मेडिटेशन किया नहीं था। तो जो भी अनुभव आ रहे हैं, वह आ रहे हैं कि खुद को खुद के बारे में समझ लो।

क्या है हम? खुद क्या है? यह जानने का एक तरीका लग रहा है। और आप खुद से बात कैसे कर सकते हैं, यह एक तरीका यहाँ से मिल चुका है, वो मेडिटेशन के जरिए।

ऐसा लगता है मुझे।

मेरा नाम नागेश स्वामी है। मैं पुणे से आया हूं और मुझे इसके बारे में पता नहीं था। हमारे डायरेक्टर ने यहाँ भेजा, जो कि यहाँ आने के बाद मुझे लग रहा है कि यस, आई एम लकी पर्सन, हू डिज़र्व टू हैव दिस नॉलेज, विच वी हैव टेकन इन लास्ट थ्री डेज़।

मेरा एक अनुभव मैं आपको शेयर करना चाहूंगा -

जब एक कंपनी में मैंने 18 साल काम किया और मुझे ऐसा लग रहा था कि 18 साल… इतने साल काम एक जगह पर करना मतलब क्या है? मुझे यहाँ पर नहीं रहना, कुछ दिक्कत तो नहीं थी, जर्मन कंपनी थी। अभी मैं इंडियन कंपनी पाटिल ऑटोमेशन में काम कर रहा हूं।

जब मैंने यहाँ आकर निवासी भाई से पूछा, तो उन्होंने कहा कि मैं 35 साल से काम कर रहा हूँ। उनके चेहरे पर वह दुख नहीं था जो मेरे मन में था कि कोई एक जगह पर इतने साल कैसे काम कर सकता है।अगर दिल में हो और दिल से अगर कुछ देना चाहते हो तो मुझे नहीं लगता कि कोई दिक्कत है।

समय की भी कोई पाबंदी नहीं है। यहाँ रहने वाले लोगों में वह खुशहाली है जो हम बाहर ढूँढ रहे हैं। वह बाहर नहीं है, यहीं मिल रही है। यह वाइब्रेशन यहाँ आकर मुझे पता चला। मुझे लगता है कि मैं अभी अपने नज़दीक के सेंटर से जुड़ जाऊँ और यह पूरा ज्ञान समझ लूँ। अभी तो ट्रेलर देखा है। देखते हैं कैसा होता है।

आई होप आई एम लकी।

ओम शांति !

क्या आपने कभी खुद से पूछा है — "मैं वास्तव में कौन हूँ?"

क्या आपने कभी खुद से पूछा है — "मैं वास्तव में कौन हूँ?"

हम अपने नाम, रिश्तों, भूमिकाओं और उपलब्धियों को तो अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन क्या हमने कभी अपने भीतर के 'मैं' को महसूस करने की कोशिश की है? अपनी वास्तविक पहचान, क्षमताओं और आंतरिक शक्तियों को समझने की यह एक सुंदर शुरुआत है। जानिए कैसे मेडिटेशन के माध्यम से आप खुद से संवाद कर सकते हैं, अपने भीतर की आवाज़ को सुन सकते हैं और अपनी रियल पहचान का अनुभव कर सकते हैं।

अंदर के 'मैं' को अनुभव करें

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