‘नशा मुक्त अभियान’ के अंतर्गत जीवन बदलने वाले वास्तविक अनुभवों की यह विशेष श्रृंखला उन लोगों की प्रेरक कहानियाँ प्रस्तुत करती है, जिन्होंने नशे से मुक्ति पाकर अपने जीवन को नई दिशा दी - श्याम कुमार थापा (पश्चिम बंगाल) , ज्ञान सिंह (करनाल , हरियाणा), रामकुमार दोहन (हरियाणा ), राकेश गुप्ता (बाजपुर,उत्तराखंड ), भारत भूषण (रेवारी , हरियाणा ), अनिल शर्मा (बहादुरगढ़ , हरियाणा )
ज्ञान सिंह - बचपन से ही मेरे को पाँचवी छठी क्लास में बीड़ी पीने की आदत शुरू हो गई थी संग के कारण, जेसे उम्र बढ़ी तो तास, जुआ, मीट, मास, शराब ये सब मैं करता रहा अपने जीवन में ।
रामकुमार दोहन - मुझे जहां तक याद है, 25-30 साल लगातार मैने ड्रिंकिंग की और स्मोकिंग भी करता था ड्रिंक्स के साथ।
श्याम कुमार थापा - मैं करीब 5 पैकेट सिगरेट दिन मैं खरीदता था और उसमें चाहिए अटलिस्ट 4 पैकेट तो मैं पीता था खुद पीता था और बहुत सालों तक पीता रहा और एलकोहाल भी मैं जॉब लाइफ में और इवन रिटारिमेंट का पहले भी मैं रोज पीता था, अटलिस्ट अरऑउन्ड २ पेकक्स ।
राकेश गुप्ता - बीवी बच्चे सारे बोलते थे, सिर पर हाथ रखते थे, रात को एक-एक बजे आते थे, पापा वाइन छोड़ दो, पत्नी कहती थी वाइन छोड़ दो, घर का सारा काम खराब होता था, गावों के लोग 10-10 बजे तक बैठक में बेठके प्रधान का इंतज़ार करते थे, मगर हम लोग 11-11 बजे शराब पीके नशा उतरता था तो जाके उठते थे।
रामकुमार दोहन - हम पी करके कुछ गलत भी बोलते थे, तो सुबह हमें पता चलता था कि हमने ये जो करा गलत खराब है, उससे हमारी समाज के अंदर इज्जत पर फर्क करता था।
श्याम कुमार थापा - मैं सोचता था कि मैं छोड़ नहीं पाऊंगा, पर मेरा किस्मत अच्छा था कि मैं ब्रह्माकुमारिस के कॉंटक्ट में आया, और उनके सिखाए हुए राजयोग मेडिटेशन करके मैंने तुरंत छोड़ दिया।
रामकुमार दोहन - 2009 के बाद मैंने राजयोग के प्रयोग से अपनी सभी बीमारी से छुटकारा पा लिया।
ज्ञान सिंह - मेरा हार्ट की बीमारी थी, अस्थमा था, असिडिटी थी, कई बीमारी थी, जो एकदम से सारी खतम होगी।
अनिल शर्मा - 1000 -1500 rs पर मन्थ का खर्चा उसमें हो जाता था, तो फैमिली पर वो पैसा खर्च हुआ, तो उससे बच्चे और परिवार के बहुत अच्छी ग्रोथ होई।
ज्ञान सिंह -
मैं हर रोज लड़ाई, कलेश, कलह बाजी होती रहती थी, और जब मैं ब्रह्माकुमारिस के कनेक्शन में आया और जब मैंने ये छोड़या, तो आज मेरा घर एक स्वर्ग जेसा है।
अनिल शर्मा - लगभग 18 साल हो गए हैं, उसके बाद में मुझे इसको लेने की कभी आवश्यकता नहीं पड़ी।
ज्ञान सिंह - ये जो छोटी चीज़ समझते हैं, जिसको बीडी, सिगरट ये बहुत बुरी आदत है, और शराब, अफीम,अफीम माना तो बस अपने जीवन को ही बर्बाद करने वाली बात है।

आदतों और व्यसनों से मुक्ति: स्वराज्य की ओर एक यात्रा
इन बुरी आदतों, व्यसनों और भीतर के पैटर्न्स को समझने तथा उन्हें जागरूकता, स्वराज्य और राजयोग मेडिटेशन के द्वारा बदलने की 12 ऑडियो की एक विशेष यात्रा - इस श्रृंखला में आइए समझें कि जागरूकता, आंतरिक प्रेरणा और राजयोग मेडिटेशन के द्वारा हर पुरानी मजबूरी को स्वयं की शक्ति में कैसे परिवर्तन किया जा सकता है।
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