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इंडिया वन सोलर पावर प्लांट – आध्यात्मिकता से जुड़ी एक आदर्श पहल

इंडिया वन सोलर पावर प्लांट – आध्यात्मिकता से जुड़ी एक आदर्श पहल
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आइए आपको इंडिया वन की यात्रा पर लेकर चलें—जहाँ स्वच्छ ऊर्जा का सपना साकार होकर एक जीवंत वास्तविकता बना। जानिए कि इस परियोजना की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसकी शुरुआत कैसे हुई, और किस प्रकार एक अनोखा सोलर पावर प्लांट अस्तित्व में आया। समझिए कि इंडिया वन कैसे काम करता है, वास्तव में इसे विशिष्ट क्या बनाता है, और यह किस तरह हरित भविष्य को आकार दे रहा है। प्रकृति पर इसके सकारात्मक प्रभाव, स्थानीय समुदाय को मिले लाभ और सहयोग, और यह कैसे शांति से ब्रह्माकुमारीज़ परिसर को ऊर्जा प्रदान करता है—इन सभी पहलुओं को जानिए। साथ ही यह भी जानिए कि कैसे यह परियोजना आज शिक्षा, शोध और नवीन तकनीकी सोच का एक प्रेरणादायक केंद्र बन चुकी है—और साथ ही सतत् ऊर्जा से चलने वाले उज्जवल भविष्य की ओर कदम आगे बढ़ाइए।

आज दुनिया भर में लोग ऐसे रास्ते खोज रहे हैं, जिससे भविष्य और अधिक स्वच्छ, शांत और प्रकृति के प्रति सम्मान से भरा हुआ हो। राजस्थान के आबू रोड में स्थित इंडिया वन सोलर थर्मल पावर प्लांट इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। यह अपनी तरह की सबसे नई और खास सोलर थर्मल परियोजनाओं में से एक है। अपनी बनावट, उद्देश्य और काम करने के तरीके से इंडिया वन यह दर्शाता है कि कैसे विज्ञान समाज की सेवा कर सकता है, और ऊर्जा का उत्पादन समझदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जा सकता है।

ब्रह्माकुमारीज़ में हमारा विश्वास है कि आंतरिक पवित्रता और बाहरी स्थिरता एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। जब हमारे विचार स्वच्छ और शांत होते हैं, तो हमारे कर्म स्वतः ही करुणामय और जिम्मेदार बन जाते हैं। इसी दृष्टि और भाव से इंडिया वन सोलर थर्मल पावर प्लांट का जन्म हुआ।

तो आइए, मिलकर समझते हैं कि इंडिया वन की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसका निर्माण कैसे हुआ, इसे विशिष्ट क्या बनाता है, और यह ब्रह्माकुमारीज़ के परिसरों की दैनिक गतिविधियों को सशक्त रूप से कैसे सहयोग देता है।

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इंडिया वन की ज़रूरत क्यों पड़ी—यात्रा की शुरुआत

ब्रह्माकुमारीज़ का इंडिया वन लगभग 20 वर्षों की गहन सोच का नतीजा है।

1990 के दशक में आबू में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ परिसरों में विद्यार्थियों और आने-जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ने लगी थी। इससे बड़े हॉलों में प्रकाश व्यवस्था, पानी को पंप और शुद्ध करने, हजारों लोगों के लिए भोजन पकाने, गर्म पानी की व्यवस्था करने, शैक्षणिक सुविधाओं के संचालन तथा दैनिक आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की निरंतर आवश्यकता बनी रहती थी। सिर्फ़ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रहना न तो सस्ता था और न ही लंबे समय तक टिकाऊ। साथ ही यह पवित्रता, सादगी और अहिंसा जैसे हमारे मूल्यों से भी मेल नहीं खाता था। तब यह स्पष्ट हो गया था कि हमें एक ऐसी ऊर्जा प्रणाली की आवश्यकता है जो प्रदूषण-रहित हो, आत्मनिर्भर हो और भविष्य में भी किफ़ायती साबित हो।

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इस आवश्यकताओं की महसूसता के बाद हमने सौर ऊर्जा (Solar Energy) के व्यावहारिक उपायों पर काम शुरू किया। जर्मन इंजीनियर वोल्फगैंग शेफ़लर के साथ मिलकर प्रभावी पैराबोलिक सोलर कुकर और सोलर  पैनल (फोटोवोल्टाइक) प्रणालियाँ विकसित की गईं। इस सफल सहभागिता के परिणामस्वरूप कई विशाल सोलर रसोइयों का निर्माण हुआ, जहाँ सौर ऊर्जा से उत्पन्न भाप की मदद से रोज़ हज़ारों लोगों का भोजन पकाया जाने लगा। इन प्रारंभिक सफलताओं ने यह विश्वास जगाया कि सौर ऊर्जा का उपयोग केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे और भी बहुत कुछ किया जा सकता है।

2000 के दशक के मध्य में टीम ने सोलर थर्मल विद्युत उत्पादन की दिशा में काम शुरू किया। इसके लिए सोलर संकेन्द्रक(concentrators) , कास्ट-आयरन रिसीवर्स और ऊष्मा को संग्रहित करने की सरल विधियों पर प्रयोग शुरू हुए, ताकि सूरज ढलने के बाद भी सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सके।

फिर 2009 में एक साहसिक सवाल उठा कि—क्या ऐसा सोलर प्लांट बनाया जा सकता है जो रात में भी काम करे?

यही दूरदर्शी सोच आगे चलकर एक अग्रणी परियोजना का रूप बनी—इंडिया वन। 

इंडिया-वन का जन्म

कई वर्षों के परीक्षण और प्रयोगों के बाद टीम ने एक ऐसी नई डिज़ाइन विकसित की, जिसमें ऊष्मा को सीधे संग्रहित किया जा सकता था। यह डिज़ाइन न केवल व्यावहारिक थी, बल्कि किफायती भी, क्योंकि इसके लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध थी। वर्ष 2010 से 2012 के बीच इस अवधारणा को विकसित किया गया जो आगे चलकर इंडिया-वन सोलर थर्मल पावर प्लांट की आधारशिला बनी।

इंडिया-वन के निर्माण की शुरुआत

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वर्ष 2013 से 2017 के बीच इंडिया-वन का निर्माण ब्रह्माकुमारीज़ की सहयोगी संस्था वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट (WRST) के साथ साझेदारी में किया गया। इस दौरान 770 सोलर डिश तैयार की गईं, स्थानीय कार्यशालाओं में हज़ारों पुर्ज़े बनाए गए, और इस परियोजना के लिए 250 से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दी गई। डिज़ाइन से लेकर जाँच और परीक्षण तक—हर कार्य पूरी तरह आंतरिक रूप से (इन-हाउस टीम) सम्पन्न किया गया। अंततः 2017 में इस प्लांट को सफलतापूर्वक चालू किया गया, जो अनुसंधान, विकास और लगातार सीखने की एक लंबी और समर्पित यात्रा का सुंदर परिणाम था।

इंडिया वन सोलर — अंतिम परिणाम

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आज इंडिया वन एक अग्रणी 1 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला सोलर थर्मल पावर प्लांट है, जिसे स्वच्छ, विश्वसनीय और संस्थागत ऊर्जा के एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। कंसन्ट्रेटेड सोलर पावर (CSP) तकनीक पर आधारित इस प्लांट में 770 पैराबोलिक डिश स्थापित हैं, जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल 60 वर्ग मीटर है। प्रत्येक पैराबोलिक डिश में 760 शीशे लगे हैं और ये ड्यूल-एक्सिस ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से पूरे दिन सूर्य का अनुसरण करते हैं। ये रिफ्लेक्टर सूर्य के किरणों को एकत्रित कर उसे केंद्रित करते हैं और उस ऊष्मा को एक विशाल थर्मल एनर्जी बैटरी में संग्रहित करते हैं। यही व्यवस्था इंडिया वन को दिन-रात, सूर्यास्त के बाद भी निरंतर ऊर्जा आपूर्ति करने में सक्षम बनाती है।

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प्लांट के चारों ओर 3,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं और जैविक (organic) खेती भी शुरू की गई है, ताकि इंडिया वन के आसपास का वातावरण भी उसी सिद्धांत को प्रतिबिंबित करे, जिस पर इसकी तकनीक आधारित है—प्रकृति से जितना लिया जाए, उससे अधिक उसे वापस लौटाया जाए।

परिसर में स्थापित फोटोवोल्टाइक प्रणालियों के साथ मिलकर, इंडिया वन प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख (3 मिलियन) विद्युत यूनिट का उत्पादन करता है, जिससे बाहरी ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आती है। स्थिरता के क्षेत्र में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है—यह हर वर्ष लगभग 2,550 टन CO₂ उत्सर्जन को कम करता है और ऊर्जा लागत में करीब 1,50,000 अमेरिकी डॉलर की वार्षिक बचत करता है।

इस परियोजना को आंशिक रूप से नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) तथा जर्मनी सरकार द्वारा GIZ की ComSolar पहल के माध्यम से समर्थन प्राप्त हुआ है। दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण के साथ सोलर थर्मल पावर के क्षेत्र में इंडिया-वन आज भी विश्व के अग्रणी उदाहरणों में से एक बना हुआ है।

इंडिया वन सोलर तकनीक कैसे काम करती है

इंडिया-वन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली सिद्धांत पर कार्य करता है:

सूर्य की किरणें → ऊष्मा → संग्रहीत ऊष्मा → विद्युत → दैनिक उपयोग

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  • सूर्य का प्रकाश → ऊष्मा (सोलर कंसन्ट्रेशन) प्रत्येक पैराबोलिक डिश सूर्य की गति के अनुसार स्वयं को समायोजित करती है और सूर्य के प्रकाश को एक स्थिर-फोकस कास्ट-आयरन रिसीवर पर केंद्रित करती है।
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  • ऊष्मा → संग्रहीत ऊष्मा (प्राकृतिक हीट बैटरी) एकत्रित की गई ऊष्मा को सुरक्षित रूप से ठोस लोहे के कोर के भीतर संग्रहित किया जाता है—जो एक प्राकृतिक हीट बैटरी की तरह कार्य करता है।
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  • संग्रहीत ऊष्मा → भाप → विद्युत यह संग्रहीत ऊष्मा, बिना किसी महंगे तेल या पिघले हुए नमक (मोल्टन सॉल्ट) की आवश्यकता के, अत्यधिक गर्म भाप उत्पन्न करती है (लगभग 450°C तापमान और 42 बार दबाव पर)। यही भाप टरबाइन को घुमाती है, जिससे विद्युत का उत्पादन होता है।
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  • विद्युत + प्रत्यक्ष ऊष्मा → दैनिक उपयोग उत्पन्न ऊष्मा का उपयोग सीधे तौर पर भोजन पकाने, गर्म पानी उपलब्ध कराने, लॉन्ड्री तथा परिसर की अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जाता है।

यह डिज़ाइन सरल, मजबूत और रखरखाव में आसान है—वास्तविक अर्थों में एक उन्नत प्रणाली है, जो स्वदेशी सामग्री और स्थानीय कौशल से साकार हुआ है।

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इंडिया वन को अनोखा क्या बनाता है

इंडिया वन में कई ऐसी क्रांतिकारी विशेषताएँ हैं, जो इसे विश्व के सबसे उन्नत सोलर थर्मल पावर प्लांट्स में स्थान दिलाती हैं। नीचे दिए गए प्रत्येक पहलू सोलर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक अद्वितीय उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  • स्टैटिक-फोकस पैराबोलॉइड डिज़ाइन — विश्व में पहली बार; ये फोकस को स्थिर रखता है, जिससे बिना किसी चलित हिस्से के ऊष्मा को सीधे फोकल पॉइंट पर संग्रहित किया जा सकता है।
  • स्वदेशी कास्ट-आयरन कैविटी रिसीवर्स — भारत में ही डिज़ाइन और विकसित किए जाने वाले यह रिसीवर्स, अत्यधिक तापमान सहन करने में सक्षम हैं और साथ ही ऊष्मा भंडारण इकाई के रूप में भी कार्य करते हैं।
  • पॉइंट-फोकस रिफ्लेक्टर्स से प्रत्यक्ष सुपरहीटेड स्टीम उत्पादन — सूर्य के प्रकाश से सीधे 450°C तापमान की भाप का निर्माण।
  • रिसीवर के भीतर ही थर्मल स्टोरेज — विश्व में पहली बार; लगभग 3 टन कास्ट आयरन से निर्मित, जो 24 घंटे संचालन को संभव बनाता है।
  • ऑप्टिकल अलाइनमेंट आधारित 100% स्वचालित ड्यूल-एक्सिस ट्रैकिंग सिस्टम।
  • मोल्टन सॉल्ट जैसे हीट-ट्रांसफर फ्लूइड्स की आवश्यकता नहीं — जिससे लागत और रखरखाव दोनों में कमी आती है।
  • रिसीवर्स, रिफ्लेक्टर्स और सभी प्रमुख घटकों का पूर्णतः स्वदेशी डिज़ाइन — लागत घटाने के साथ-साथ स्थानीय निर्माण को बढ़ावा।
  • विश्वसनीय और रखरखाव में सरल — आसानी से उपलब्ध भारतीय स्पेयर पार्ट्स के साथ।
  • बड़ी क्षमताओं में दोहराने योग्य (रेप्लिकेबल) — स्वच्छ ऊर्जा का एक विस्तारयोग्य और टिकाऊ मॉडल।
  • इंडिया वन की प्रमुख विशेषताएँ — रिमोट मॉनिटरिंग और उन्नत इंस्ट्रूमेंटेशन की व्यवस्था, जिससे वेब-सक्षम प्लेटफ़ॉर्म पर रीयल-टाइम परफॉर्मेंस मूल्यांकन संभव होता है और रखरखाव सरल व प्रभावी बनता है।

इंडिया वन स्थानीय समुदाय की कैसे सहायता करता है

तकनीक से आगे बढ़ते हुए, इंडिया वन ने स्थानीय क्षेत्र को कई स्तरों पर सशक्त बनाया है:

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 रोज़गार और कौशल विकास

इंडिया वन के निर्माण और स्थापना के दौरान 250 से अधिक स्थानीय श्रमिकों को रोज़गार मिला। इन्हें उच्च-गुणवत्ता वेल्डिंग, सोलर डिश फैब्रिकेशन, मैकेनिकल असेंबली, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, तथा सुरक्षा और इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं जैसे कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके परिणामस्वरूप कुशल तकनीशियनों की एक नई पीढ़ी तैयार हुई और स्थानीय कार्यशालाओं ने अपने उपकरणों को उन्नत किया। आज भी इनमें से कई कौशल प्लांट के सतत रखरखाव और संचालन में उपयोग में लाए जा रहे हैं।

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आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण

तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ, ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा स्थानीय समुदाय के लिए नियमित रूप से अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे:

  • स्वास्थ्य, नशामुक्ति और सरल जीवनशैली पर जागरूकता सत्र
  • पालन-पोषण और युवा कार्यक्रम— आत्मविश्वास और स्पष्टता विकसित करने हेतु
  • महिला सशक्तिकरण सत्र—आत्म-सम्मान और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने के लिए

राजयोग मेडिटेशन द्वारा तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायक सत्रों का आयोजन।

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इंडिया-वन सोलर प्लांट द्वारा दैनिक जीवन में योगदान

इंडिया-वन सोलर प्लांट पूरे परिसर की ऊर्जा-आधारशिला के रूप में कार्य करता है। यह स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा प्रदान कर दैनिक गतिविधियों, बड़े आयोजनों और आवश्यक सेवाओं के सफलतापूर्वक संचालन में निरंतर योगदान देता है।

दैनिक संचालन के लिए विश्वसनीय ऊर्जा

यह प्लांट आवासीय क्षेत्रों, कार्यालयों, कक्षाओं, मेडिटेशन हॉलों, ऑडिटोरियम तथा आईटी नेटवर्क, मल्टीमीडिया स्टूडियो और रिकॉर्डिंग केंद्र जैसी तकनीकी सुविधाओं को विद्युत आपूर्ति करता है, जिससे पूरे परिसर का संचालन सुचारु रूप से चलता रहता है।

बड़े पैमाने पर भोजन पकाने के लिए स्वच्छ ऊष्मा

इंडिया-वन सौर ऊष्मा और भाप का उत्पादन करता है, जिसका उपयोग सामूहिक रसोई में भोजन पकाने के लिए किया जाता है। इससे दैनिक भोजन, रिट्रीट समूहों और बड़े आयोजनों की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं, साथ ही एलपीजी और ईंधन लकड़ी की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है

गर्म पानी की उपलब्धता और थर्मल सेवाएँ

संग्रहीत सौर ऊष्मा से स्नान, लॉन्ड्री, सफ़ाई तथा सर्दियों में आवश्यक गर्माहट के लिए गर्म पानी उपलब्ध कराया जाता है। इससे ये सभी आवश्यक सेवाएँ अधिक कुशल और टिकाऊ बनती हैं।

बड़े आयोजनों के दौरान सहयोग

दस हजार से अधिक प्रतिभागियों वाले विशाल कार्यक्रमों के समय यह प्लांट प्रकाश व्यवस्था, साउंड सिस्टम, मल्टीमीडिया प्रसारण, अतिथि आवास क्षेत्र, परिवहन केंद्र और बड़ी सामुदायिक रसोइयों को ऊर्जा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शांत और कार्यशील स्थलों के लिए ऊर्जा

ध्यान कक्ष, शांतिपूर्ण स्थान, पुस्तकालय और अन्य स्थल स्वच्छ और शोर रहित ऊर्जा से सहज रूप से संचालित होते हैं, जिससे आगंतुकों और निवासियों को एक स्थिर और अनुकूल वातावरण का अनुभव होता है।

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अनुसंधान और प्रशिक्षण

इंडिया-वन केवल एक ऊर्जा परियोजना ही नहीं, बल्कि सीखने, अनुसंधान और प्रगति कौशल का केंद्र भी है।

सहयोगात्मक अनुसंधान (Collaborative Research)

  • 2014 में वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट (WRST) को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ग्लोबल एनवायरनमेंट फ़ैसिलिटी (GEF) द्वारा सहायत कंसन्ट्रेटेड सोलर हीट प्रोजेक्ट (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय—MNRE, भारत सरकार) के अंतर्गत कंसन्ट्रेटिंग सोलर थर्मल (CST) तकनीकों पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण केंद्र के विकास का दायित्व सौंपा गया।
  • WRST, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के साथ मिलकर सुपरक्रिटिकल CO₂ प्रणालियों के लिए अगली पीढ़ी के रिसीवर्स पर भी अनुसंधान कर रहा है।
  • इसके अतिरिक्त, इस प्लांट से सोलर थर्मल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनेक शोध प्रकाशन सामने आए हैं, जो इस तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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CST जागरूकता एवं प्रशिक्षण केंद्र (UNDP–GEF परियोजना)

MNRE तथा UNDP–GEF से प्राप्त दायित्व के अंतर्गत:

  • उद्योगों और संस्थानों के लिए जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख लोग शांतिवन परिसर और इस प्लांट का भ्रमण करते हैं।
  • निर्माताओं और उद्यमियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा चुके हैं।
  • 350 से अधिक प्रोफेशनलों ने वास्तविक प्रणालियों के साथ हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण से लाभ प्राप्त किया।
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एक सतत भविष्य की ओर…

इंडिया-वन सोलर थर्मल पावर प्लांट केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है—यह इस बात का सजीव उदाहरण है कि पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी और आध्यात्मिक मूल्य मिलकर कैसे कुछ वास्तव में परिवर्तनकारी रच सकते हैं। यह उन सिद्धांतों पर आधारित है, जो सतत जीवनशैली का मार्गदर्शन करते हैं:

पवित्रता — ऐसी ऊर्जा का चयन, जो प्रदूषण न फैलाए

सादगी — प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग

ज़िम्मेदारी — प्रकृति को एक पवित्र धरोहर समझकर देखभाल करना

सहयोग — वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और स्वयंसेवकों के साथ एकजुटता में काम करना

शांति — ऐसे समाधान तैयार करना जो किसी को नुकसान न पहुँचाएँ

सूर्य की ऊर्जा को सावधानी और बुद्धिमत्ता के साथ उपयोग में लाकर, यह प्लांट प्रतिदिन हज़ारों जीवनों का समर्थन करता है और साथ-साथ पृथ्वी पर पड़ने वाले दबाव को धीरे-धीरे कम करता है। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के समय में, इंडिया-वन एक शांत लेकिन शक्तिशाली संदेश देता है।

सच्चा परिवर्तन भीतर से शुरू होता है। जब मन शांत होता है, तो निर्णय समझदारी से लिए जाते हैं; और जब हृदय में पृथ्वी के प्रति प्रेम व सम्मान होता है तब कर्म स्वाभाविक रूप से सतत और भरोसेमंद हो जाते हैं।

इंडिया-वन इसी आंतरिक स्पष्टता और उद्देश्य का प्रतीक है—यह दर्शाता है कि कैसे आध्यात्मिकता विज्ञान को दिशा दे सकती है, और कैसे एक शांत व उच्च दृष्टि ऐसे व्यावहारिक समाधानों को प्रेरित कर सकती है, जो संसार में वास्तविक परिवर्तन लाते हैं।

इंडिया वन के बारे में और जानें इंडिया वन सोलर थर्मल पावर प्लांट की दृष्टि, तकनीक और यात्रा को जानें तथा यह कैसे सतत ऊर्जा का एक जीवंत मॉडल बनकर कार्य कर रहा है, इसका अनुभव करें। इंडिया वन देखें
पर्यावरणीय पहलों को जानें जानें कि किस प्रकार आध्यात्मिक मूल्य नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, कृषि और सतत जीवनशैली के क्षेत्र में व्यावहारिक पर्यावरणीय समाधानों का मार्गदर्शन करते हैं। सभी पहलें देखें

आज का अभ्यास

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