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आध्यात्मिक वाइब्रेशन के साथ भोजन बनाएं और खाएं (भाग 3)

आध्यात्मिक वाइब्रेशन के साथ भोजन बनाएं और खाएं (भाग 3)
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कुछ तामसिक खाद्य पदार्थ जैसेकि मांसाहारी भोजन, शराब, तम्बाकू, और यहाँ तक कि प्याज और लहसुन की निम्न सूक्ष्म ऊर्जा, आत्मा की शुद्धता में बाधक होती है, जो कि हमारे जीवन का उद्देश्य है। साथ ही, इनका शरीर की ऊर्जा स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इसलिए इनका सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि

ये भोजन मन को अशांत और आक्रामक बना देते हैं और मन को वासना, लालच, मोह, अहंकार, ईर्ष्या और नफरत जैसी अन्य नकारात्मक भावनाओं के प्रभाव में ला देते हैं।

आप कह सकते हैं कि क्यों न इन खाद्य पदार्थों को मेडिटेशन द्वारा शुद्ध करके सेवन करें, परन्तु इन तामसिक खाद्य पदार्थों को शुद्ध आध्यात्मिक ऊर्जा देने से भी उनका मूल तामसिक स्वभाव नहीं बदलता और न ही इनका शरीर और मन पर नकारात्मक प्रभाव रुकता है।

इसके साथ ही, यह भी ज़रूरी है कि हम खाने के लिए सही सामग्री चुनने के साथ-साथ भोजन पकाने और खाने के दौरान उच्च आध्यात्मिक चेतना (हॉयर स्पिरिचुअल कॉन्शियसनेस) बनाए रखें। इस दौरान मन में सकारात्मक और शांति भरे विचारों को प्राथमिकता दें या फिर शांति प्रदान करने वाले आध्यात्मिक गीत या मेडिटेशन संगीत सुनें। ऐसा करने से आपको और आपके परिवार को परमात्मा की याद और आपसी प्रेम का अनुभव होगा।

साथ ही, भोजन करते समय टीवी, अखबार या मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करना चाहिए।

साथ ही, भोजन या पानी ग्रहण करने से पहले कुछ सेकंड अपने आत्मिक स्वमान में रहकर शक्तिशाली संकल्प करें और उस भोजन या पानी को अपनी पवित्र दृष्टि दें। आपकी दृष्टि द्वारा उस भोजन या पानी में सकारात्मक आत्मिक ऊर्जा भर जाती है और उसकी नकारात्मकता, चाहे शारीरिक हो या आत्मिक, समाप्त होने लगती है। याद रखें — जैसा अन्न, वैसा मन। आप जो भोजन करते हैं, उसकी ऊर्जा का सीधा प्रभाव आपके विचारों पर पड़ता है।

आज का अभ्यास

आज भोजन बनाते और खाते समय शांत और सकारात्मक संकल्प रखें, ताकि भोजन के साथ आत्मिक शक्ति और प्रेम की ऊर्जा भी जीवन में प्रवेश करे।

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