आलोचना में स्टेबल कैसे रहें

आलोचना या क्रिटिसिज्म का स्वरूप चाहे कैसा भी हो और इसके पीछे की मंशा चाहे कुछ भी हो, पर इसे स्वीकार करना मुश्किल होता है। लेकिन जब हम ये सीख लेते हैं कि हमें इससे कैसे डील करना है तो निश्चित रूप से इसके द्वारा मिलने वाले फीडबैक से हमें फायदा होता है। ज्यादातर, हमारे प्रति आलोचना के एक बड़े हिस्से को कंट्रोल करना या स्वीकार करना मुश्किल होता है, लेकिन हम किस तरह से रेस्पोंड करते हैं, ये हमेशा हमारी अपनी चॉइस होती है। इससे कोई फर्क़ नहीं पड़ता कि; हम कौन हैं, क्या करते हैं या क्या हमेशा हमें कोई जज कर सकता है? क्या हमने चीज़ों के सही होते हुए भी, लोगों को हमारे विचारों, व्यवहार, हुनर, कोशिशों या परिणामों के लिए आलोचना करते हुए पाया है? हम चाहें या न चाहें, लेकिन आलोचनाओं को अवॉइड नहीं कर सकते, इसलिए हमें इन्हें अपनी प्रगति के माध्यम के रूप में लेना चाहिए। साथ ही, ये भी जरूरी है कि क्रिटिसिज्म के दौरान भी हमें अपनी अवस्था को स्थिर रखने का प्रयास करना चाहिए। आमतौर पर आलोचनाएं; क्रोध, अपमान, अनादर या अस्वीकृति की एनर्जी के साथ आती हैं। इसलिए, फीडबैक से ज्यादा, इसके साथ आने वाली वाईब्रेशन का प्रभाव हम पर पड़ता है। फिर भी, ये हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम फीडबैक को स्वीकार करें और इसके साथ आने वाली नेगेटिव वाईब्रेशन से प्रभावित न हों। लोगों की आलोचना हमारे बारे में नहीं बल्कि उनके खुद के बारे में ज़्यादा होती है। ये उनकी कमज़ोर मनोदशा माना उनके हर्ट, चिंताएं, इनसिक्युरिटी और उनके व्यक्तित्व का ही प्रतिबिंब है। दरअसल वे अपने खुद के दर्द को आलोचना के रूप में हमें बताते हैं। हमारी भूमिका; उन्हें समझने की, सहानुभूति देने की और वापस नेगेटिव एनर्जी रेडीएट नहीं करने की होनी चाहिए। आलोचना किए जाने पर चीजों को बेहतर या बदतर बनाने की शक्ति हमारे पास होती है। उनके प्रति विनम्र होना, उनकी बातों को मान्यता देना और जरूरत पड़ने पर खुद में सुधार करना ज़रूरी है। आलोचना में भी हमें ठीक उसी प्रकार स्थिर रहना चाहिए जैसे कि हम प्रशंसा में रहते हैं। स्वयं के सत्य को अच्छी तरह से जानना चाहिए और किसी के भी द्वारा आलोचना किए जाने पर परेशान नहीं होना चाहिए।
कभी-कभी लोग अपने फीडबैक देते समय असभ्य हो जाते हैं, हमें क्रिटिसाइज करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि कुछ पल के लिए रुककर उनके द्वारा की गई आलोचना पर विचार करें, चेक करें कि क्या ये ठीक है? अगर हम उसे सही पाते हैं, तो उनका धन्यवाद करें और अपने में सुधार लाएं। इसके विपरित, अगर आलोचना सही नहीं है, तो लेट गो करें और जो भी वे कहते हैं उसके बारे में कोई थॉट क्रिएट न करें, स्टेबल रहें, रिएक्ट और बहस न करें नाही खुद को डिफेंड करें। सिर्फ अपने विचारों को दृढ़ता के साथ रखें। और साथ ही ये समझने का प्रयास करें कि, हो सकता है वे परेशान हों या फिर उन्हें ईर्ष्या या इनसिक्युरिटी फील हो रही हो। हमें इस बात को समझना होगा कि वे हमसे अलग हैं और वे सिर्फ अपने व्यक्तित्व के आधार पर अपनी राय दे रहे हैं। अपनी ताकत को पहचानें और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करें। किसी भी प्रकार की आलोचना को पर्सनली न लेते हुए, लोगों का स्वभाव मानकर डिटेच रहें।
2. हर पल को परमात्मा के प्रेम और समीपता से भरपूर करें - हमारे जीवन के हर पल की सुंदरता तब बढ़ जाती है जब हम परमात्मा का साथ महसूस करते हैं और उनसे बात करते हैं और साथ ही, दूसरों को भी अपने वायब्रेशन, बोल और कार्यों से वैसा ही अनुभव कराते हैं। निरंतर सफलता और खुशी के लिए परमात्मा के साथ का अनुभव हमारे लिए बहुत आवश्यक है।
3. आत्मिक अवेयरनेस से चमत्कार क्रिएट करना - जब हम हर पल, स्वयं को शरीर की अवेयरनेस में गुजारते हैं, तो हम अपने आंतरिक अस्तित्व से संबंध को खो देते हैं और जीवन को ऊपरी तौर पर जीते हैं, जिसके कारण हमारा समय सिर्फ अपने फिजिकल उद्देश्यों की पूर्ति में ही गुजर जाता है और आत्मा को पोषण नहीं मिलता। इसके विपरित, जब हम हर पल आत्मिक चेतना में रहते हैं तब हम अंदर से भरपूर महसूस करते हैं, और अपने हर भौतिक उद्देश्य को असानी से हासिल कर सकते हैं।
4. हर एक के चेहरे पर शांति और मुस्कराहट लाना - हर एक दिन दूसरी आत्माओं की सबसे महत्वपूर्ण सेवा जो हम कर सकते हैं वो है उन्हें शांत और आनंदमय अनुभव कराना। हमारे दिन का हर पल कीमती बन जाता है जब हम हमेशा ऐसा ही हर एक आत्मा के साथ करते हैं; जिनसे हम मिलते हैं, जिनके साथ काम करते हैं और यहां तक कि, उन लोगों के साथ भी जो दूर हैं लेकिन टेक्नोलॉजी और साइंस के माध्यमों द्वारा हमसे जुड़े हुए हैं।
5. सकारात्मक कर्मों द्वारा सकारात्मक भाग्य बनाना - हमारा हर पल तब महत्त्वपूर्ण बन जाता है जब हम दिन भर में जो कुछ भी करते हैं वो आत्मा के आध्यात्मिक ज्ञान से, परमात्मा और लॉ ऑफ कर्मा के अनुसार होता है, जिससे न सिर्फ हमारा बल्कि दूसरों का भी पॉजिटिव भाग्य बनता है।
आज का अभ्यास
क्या आलोचना आपको विचलित कर देती है? यह लेख सिखाता है कैसे आलोचना में शांत, स्थिर और आत्मविश्वासी रहकर सही प्रतिक्रिया दें।
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