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दूसरों की स्क्रिप्ट लिखने की आदत से बचें

दूसरों की स्क्रिप्ट लिखने की आदत से बचें
Journey

हम सभी जीवन रूपी नाटक में अभिनेता हैं और हर दिन अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं। हर दृश्य में हमें अपनी स्क्रिप्ट खुद लिखकर उसी के अनुसार अभिनय करना होता है। लेकिन अक्सर हम अपनी स्क्रिप्ट पर ध्यान देने के बजाय मन ही मन दूसरों की स्क्रिप्ट लिखने लगते हैं — उन्हें क्या बोलना चाहिए, कैसे व्यवहार करना चाहिए, क्या करना चाहिए…

इससे हम उनकी भूमिका में उलझ जाते हैं और अपनी भूमिका भूल जाते हैं।

याद रखें — हर व्यक्ति अपनी स्क्रिप्ट खुद लिखता है, वह हमारी अपेक्षा के अनुसार नहीं चल सकता। इससे जुड़ी कुछ आसान बातों को जानें:

1. क्या हम बार-बार दूसरों को जज करते रहते हैं? क्या हम सोचते रहते हैं कि उन्हें ऐसा करना चाहिए, वैसा नहीं करना चाहिए? जब वे हमारी सोच के अनुसार नहीं करते, तो हमें दुख या गुस्सा होता है। इस आदत से हमारा समय और ऊर्जा व्यर्थ जाती है और हमारी प्रगति रुक जाती है।

2. हम सभी इस विश्व-नाटक के अभिनेता हैं। हर दृश्य में हम ही अभिनेता, निर्देशक और स्क्रिप्ट लिखने वाले हैं। लेकिन हम अपनी एक्टिंग पर ध्यान देने के बजाय दूसरों की एक्टिंग पर ध्यान देने लगते हैं और चाहते हैं कि वे हमारी लिखी स्क्रिप्ट पर चलें। सच्चाई यह है कि कोई भी हमारी स्क्रिप्ट के अनुसार नहीं चल सकता।

3. हमें अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना है। हमारी हर भूमिका में शांति, प्रेम और ज्ञान झलकने चाहिए। अगर दूसरा सही अभिनय नहीं कर रहा, तो भी हमारा अच्छा अभिनय उसे प्रेरणा दे सकता है।

4. अपनी स्क्रिप्ट को श्रेष्ठ बनाने पर ध्यान दें, दूसरों की नहीं। हर दृश्य को सहज और शांत रहकर निभाएँ। अपने साथ कार्य करने वालों को दोष देने के बजाय उन्हें शक्ति दें। खुद से कहें — मैं शांत और करुणामय आत्मा हूँ। दूसरों के व्यवहार से प्रभावित हुए बिना, मैं हर भूमिका को श्रेष्ठ तरीके से निभाता हूँ।

आज का अभ्यास

हम सभी अपनी-अपनी स्क्रिप्ट के अभिनेता हैं, इसलिए दूसरों को बदलने के बजाय अपनी भूमिका श्रेष्ठ बनानी है। आज अभ्यास करें, मुझे किसी को जज नहीं करना है और हर दृश्य में शांत व श्रेष्ठ अभिनय करना है।

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