विश्व को पावन बनाने की परमात्म शक्ति (भाग 3)

जैसा कि हमने कल के संदेश में जाना, विश्व की सभी आत्माएँ ताम्र युग और लौह युग में अनेक प्रकार के नकारात्मक और अशुद्ध कर्म करती हैं। इसके परिणामस्वरूप इन दोनों युगों में हर आत्मा के अंदर नकारात्मक और अशुद्ध संस्कार बनने लगते हैं। हम सभी आत्माओं का वास्तविक घर आत्मलोक (सोल वर्ल्ड) है। वहीं से आत्माएँ अलग-अलग युगों में इस धरती पर आकर विभिन्न शरीर धारण करती हैं और अपना-अपना किरदार निभाती हैं। जब आत्माएँ आत्मलोक में रहती हैं, तब वे पूरी तरह पवित्र होती हैं। लेकिन जब वे इस भौतिक संसार में जन्म लेकर अपना पार्ट निभाना शुरू करती हैं, तो धीरे-धीरे लौह युग के अंत तक आते-आते अपवित्र हो जाती हैं। इसलिए अंत में सभी मानव आत्माओं को फिर से पवित्र बनकर अपने घर, आत्मलोक में लौटना होता है। यह दो प्रकार से होता है — 1. परमात्मा के साथ सच्चा संबंध जोड़ने से, और पिछले संदेश में बताए गए चार पहलुओं द्वारा जो हैं: आध्यात्मिक ज्ञान, मेडिटेशन, दिव्य गुणों को जीवन में धारण करना और आध्यात्मिक सेवा करना। 2. साथ ही, जीवन में आने वाली विभिन्न नकारात्मक परिस्थितियों और उनके प्रभावों का सामना करते हुए, जैसे—बीमारियाँ, प्राकृतिक आपदाएँ, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग, आर्थिक समस्याएँ, आपसी संबंधों में संघर्ष, देशों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच टकराव, आपराधिक गतिविधियाँ और ऐसी अनेक अन्य चुनौतियाँ। आज वैश्विक स्तर पर दुनिया में और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ये नकारात्मक परिस्थितियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।
वर्ल्ड ड्रामा के अंत में एक ऐसा समय आता है जब पूरे विश्व की आत्माएं संपूर्ण पवित्र होने के बाद वापस सोल वर्ल्ड में जाना शुरू करेंगी। साथ ही, अन्य योनियों की आत्माएं भी विभिन्न नकारात्मक स्थितियों से गुजरकर पवित्र हो जाएंगी। वे भी मानव आत्माओं की प्योर वाईब्रेशन के प्रभाव में आ जाएंगी, भले ही वे परमात्मा को जान नहीं सकेंगी या उनके ज्ञान को नहीं समझेंगी। इसके साथ ही, मानव आत्माओं और अन्य आत्माओं के प्युरिफिकेशन के परिणामस्वरुप, संपूर्ण प्रकृति भी शुद्ध हो जाएगी, क्यूँकि उसे भी उन सभी की प्योर वाईब्रेशन रिसीव होंगी। मानव आत्माओं के सोल वर्ल्ड में वापस आने के बाद, वे सभी कुछ समय के लिए शांति से सोल वर्ल्ड में रहेंगी और उस दुनिया में कुछ समय के बाद, वे सभी अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिए अलग-अलग समय पर पृथ्वी ग्रह पर आएंगी, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि वे कितनी पवित्र हैं।
सबसे अधिक पवित्र आत्माएं सबसे पहले आएंगी।
इस तरह से, इस धरा पर पवित्रता के दो चरण यानि युग होंगे और फिर दो चरण नकारात्मकता और अपवित्रता के होंगे। इस प्रकार, 5000 वर्ष का यह वर्ल्ड ड्रामा रिपीट होगा। लेकिन इस पूरे प्रॉसेस में, परमात्मा जो सदा शाश्वत हैं, हमेशा अपने आध्यात्मिक स्वरूप में स्थिर रहते हैं और जब दुनिया अपवित्र होती है तब उसे पवित्र बनाते हैं। ऐसा बार-बार रिपीट होता है और ये एक शाश्वत प्रक्रिया है, जैसे कि विश्व नाटक शाश्वत है।
आज का अभ्यास
आज अभ्यास करें, मैं एक पवित्र आत्मा हूँ, और परमात्मा की याद से शक्तिशाली बन रही हूँ। आज हर परिस्थिति को, पुराने कर्म समाप्त करने और शांति फैलाने का अवसर माने।
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