जो लोग हमसे अलग हैं, उनके लिए करुणा भाव रखें

सिर्फ यह स्वीकार कर लेने से कि आप दुनिया को दूसरों से अलग नज़रिये से देखते हैं, आप अपने से भिन्न लोगों के प्रति दया और करुणा की जागरूकता विकसित कर सकते हैं। आपके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति अपने अनुभव और अर्थ के साथ आता है।
हममें से कई लोगों स्वाभाविक तौर से दूसरों के व्यवहार के प्रति जजमेंटल होते हैं और हमें हमेशा यही लगता है कि, हम उनके बारे में जो महसूस करते हैं वो सब सही है। बहुत ही आसानी से, हम लोगों पर सही या गलत का लेबल लगा देते हैं। लेकिन ये सही या गलत किसके हिसाब से है? हमारे अपने दृष्टिकोण के हिसाब से? एक ही परिस्थिति के लिए अलग-अलग लोगों का दृष्टिकोण अलग-अलग होता है और हम उन्हें समझ पाने में असमर्थ होते हैं क्यूँकि हम हमेशा से ही चीजों को अपने दृष्टिकोण से देखते आए हैं। हमारा दृष्टिकोण; हमारे संस्कारों और अतीत के अनुभवों के आधार पर क्रिएट होता है और ये संस्कार ही हमारा लेंस बन जाते हैं जिससे हम किसी भी परिस्थिति को देखते हैं। जबकि उसी परिस्थिति को अलग-अलग लोग, अपने-अपने दृष्टिकोण से देखते हैं और ऐसी स्थिति में हम खुद को यही बोलता हुआ पाते हैं कि- वे हमारी समझ से बाहर हैं! आइए समझें कि, सही और गलत कुछ नहीं होता है, बस हम सब अलग हैं। माता-पिता सही हैं बच्चे गलत हैं; पति सही है पत्नी गलत है; बॉस सही है कर्मचारी गलत हैं - इस सही और गलत के चलते ही हम आपसी संबंधों में, अपना विश्वास और सम्मान खो देते हैं। हम सभी अलग हैं क्योंकि हमारे संस्कार अलग हैं और हम सभी अपने संस्कारों के लेंस से ही परिस्थितियों को देखते हैं; इसलिए हर एक अपने-अपने दृष्टिकोण के हिसाब से हमेशा सही ही होता है।
जब हम, हर एक को इस समझ के साथ देखना शुरू करेंगे कि, वे हमसे अलग हैं तो हम आलोचना से करुणा पर शिफ्ट होंगे और उनके लिए हमारा प्यार और सम्मान निरंतर बना रहेगा। चाहे हम उन्हें कितना भी गलत क्यों न मानें, लेकिन याद रखें कि, वे अपने संस्कारों के हिसाब से महसूस करते हैं और व्यवहार करते हैं, इसलिए वे पूरी तरह से सही हैं।
आज का अभ्यास
जब हम सही गलत के लेबल छोड़ते हैं, तब करुणा जन्म लेती है। यह लेख सिखाता है कि अलग दृष्टिकोण कैसे रिश्तों को गहराई देता है।
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