ओडिशा स्पेशल आर्मी पुलिस की सेवा के दौरान, गलत संगति ने मुझे ऐसे रास्ते पर धकेल दिया जहाँ अगले 25 वर्षों तक तंबाकू, गांजा और शराब मेरे जीवन का आधार बन गए। प्रतिदिन लगभग 1,200 रुपये व्यसनों में फेंक देना मेरी नियति बन गई थी, जिसका परिणाम था, आर्थिक तंगी और परिवार में निरंतर तनाव।
बदलाव की शुरुआत तब हुई जब एक दिन मेरी बेटी के सब्र का बाँध टूट गया। उसके बहते आँसुओं और विनती ने मेरे भीतर के पिता को झकझोर दिया। मैंने उसी क्षण शराब को त्याग दिया, लेकिन अन्य आदतों की जकड़ अब भी मजबूत थी।
मेरे जीवन का 'टर्निंग पॉइंट' वह प्रदर्शनी बनी, जिसने मुझे ब्रह्माकुमारीज़ और राजयोग से जोड़ा। नियमित अभ्यास और सात्विक वातावरण के प्रभाव से धीरे-धीरे मेरे बाकी व्यसन भी काफूर हो गए।
आज 73 वर्ष की आयु में, मैं पूरी तरह नशा मुक्त और संतुलित जीवन जी रहा हूँ। संतोष इस बात का है कि मेरी इस यात्रा ने तीन अन्य लोगों को भी व्यसनों के अंधेरे से बाहर निकलने की प्रेरणा दी है।





