पिछले 13 वर्षों से मेरा जीवन शराब, सिगरेट, भांग और गांजे की बेरहम जकड़ में था। पेशे से ऑटो-रिक्शा चालक होने के कारण दिन भर की थकान, मित्रों का संगदोष और जीवन की छोटी-छोटी असफलताओं ने मुझे गहरे तनाव में धकेल दिया था। मेरी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा इन व्यसनों की भेंट चढ़ जाता था। व्यसनों का सीधा असर मेरी सेहत पर पड़ा-लीवर की बीमारी ने घेर लिया और भूख मर गई। नशे के कारण मेरे घर का माहौल नर्क जैसा हो गया था। देर रात घर लौटना, साथ में नशेड़ी मित्रों को लाना और अपनी पत्नी पर बेवजह भोजन बनाने का दबाव डालना-इन सबने मेरे परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। मेरा मासूम बच्चा भी भय के कारण चैन से सो नहीं पाता था। क्रोध मेरा स्थायी स्वभाव बन चुका था और मैं अपनी हर समस्या के लिए दूसरों को दोषी ठहराता था।
एक दिन अचानक Peace of Mind Channel पर बी के शिवानी दीदी के विचार सुने। उनके शब्दों ने सीधे मेरे दिल पर चोट की, लगा जैसे कोई मेरे ही जीवन का आईना दिखा रहा हो। इसके बाद, हमारे क्षेत्र में लगी ब्रह्माकुमारीज़ की चित्र प्रदर्शनी ने मेरे भीतर जिज्ञासा जगाई और मैंने राजयोग का सात दिवसीय कोर्स करने का निर्णय लिया। राजयोग के नियमित अभ्यास और ईश्वरीय ज्ञान के प्रकाश ने मेरे भीतर सोया हुआ आत्मबल जगा दिया। जो नशे अटूट लगते थे, वे परमात्मा की शक्ति से स्वतः ही छूट गए। मैंने मांसाहार का भी पूर्ण त्याग कर दिया।






