रिश्तों में जजमेंटल होने से बचें

रिश्तों में जजमेंटल होने से बचें

परिवार, मित्र या सहकर्मी होने के नाते हम चाहते हैं कि हमारे आसपास के लोग अपने विचार और भावनाएँ हमारे साथ साझा करें। लेकिन कई बार जब वे परेशान होते हैं या उनसे कोई गलती हो जाती है, तो वे हमसे बात नहीं करते। उन्हें डर रहता है कि हम उन्हें जज करेंगे, उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे या तुरंत प्रतिक्रिया देंगे। इसलिए आज लोग अपने प्रियजनों से बात करने के बजाय ऐसे काउंसलर से अपनी बातें साझा करना पसंद करते हैं, जो उन्हें बिना जज किए सुनते हैं।

आइए, अभी स्वयं को एक ऐसे काउंसलर के रूप में देखें, जो बिना किसी जजमेंट के दूसरों को समझता है और उन्हें सहज महसूस कराता है।

एफ़रमेशन व् सकारात्मक संकल्प

मैं प्रेम से भरपूर आत्मा हूँ। मैं हर एक के प्रति करुणाभाव रखता हूँ। मैं परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालता हूँ और हर व्यक्ति को जैसा वह है, वैसा ही स्वीकार करता हूँ। मैं बिना किसी शर्त के, चाहे वह कोई भी हो और उसका व्यवहार कैसा भी हो, प्रेम और स्वीकृति की सकारात्मक ऊर्जा फैलाता हूँ। मेरे लिए अपेक्षा नहीं, बल्कि स्वीकृति सहज है। मैं समझता हूँ कि आज जिन लोगों से मेरा संपर्क होगा, उनके स्वभाव और गुण मुझसे अलग हो सकते हैं। कोई भावनात्मक रूप से परेशान हो सकता है, किसी से कोई गलती हुई हो सकती है—बहुत बड़ी गलती भी—या कोई किसी दुविधा में हो सकता है। जब वे परिवार के सदस्य, मित्र या सहकर्मी के रूप में मुझसे बात करते हैं, तो मैं अंदर से थोड़ा अलग होकर अपने विचारों और भावनाओं को देखता हूँ। मैं अपनी नीयत और उनके साथ बातचीत करते समय अपने दृष्टिकोण को चेक करता हूँ और उसे सकारात्मक, शुद्ध तथा बिना जजमेंट वाला रखता हूँ। मैं एक काउंसलर की भूमिका निभाता हूँ—एक ऐसे सहयोगी की, जो उनकी भावनाओं को समझता है। मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूँ और उनके व्यवहार या शब्दों से प्रभावित नहीं होता। वे मुझसे अलग हैं। मैं किसी को गलत या बुरा होने का लेबल नहीं देता। उन्हें जज करने, आलोचना करने या उन्हें अस्वीकार करने में अपनी ऊर्जा व्यर्थ नहीं करता। वे जो कहते या करते हैं, वह मेरे लिए सही न हो, लेकिन इस समय वही उनकी सच्चाई है और उनके लिए सही है। मैं यह विचार नहीं करता कि वे गलत हैं या बुरे हैं। मैं समझता हूँ कि वे मुझसे अलग हैं। मेरी स्वीकृति सकारात्मक ऊर्जा फैलाती है और मुझे भी उनकी स्वीकृति पाने में मदद करती है। वे स्वयं को सहज और हल्का महसूस करते हैं और मुझसे अपनी बातें खुलकर साझा कर पाते हैं। मैं उनकी बातें ध्यान और प्रेम से सुनता हूँ। आवश्यकता होने पर मैं उन्हें सलाह, मार्गदर्शन या अनुशासन भी प्रेम और सम्मान के साथ देता हूँ।

इस संकल्प को कुछ बार दोहराएँ, ताकि लोगों के प्रति जजमेंटल होने की आदत कम हो और हम उन्हें जैसा वे हैं, वैसा स्वीकार कर सकें। इससे रिश्ते मजबूत होंगे और हम दूसरों को अपनी भावनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराना भी बंद कर देंगे।

आज का अभ्यास

आज जब कोई अपनी परेशानी या गलती साझा करे, तो प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी भावनाओं को समझें और बिना जजमेंट के प्रेम से सुनने का अभ्यास करें।

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