17 वर्ष की आयु में दोस्तों के संगदोष में आकर मैंने सिगरेट और शराब की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह आदत 30 वर्षों की गहरी लत बन गई। एक दिन में 20 सिगरेट तक पी लेता था। स्थिति ऐसी हो गई थी कि सिगरेट खत्म हो जाए तो जली हुई सिगरेट भी दोबारा पी लेता था। लगातार धूम्रपान से शरीर कमजोर होने लगा-खांसी, कफ और सांस लेने में तकलीफ ने जीवन को कष्टमय बना दिया।
लगभग 15 वर्षों तक इलाज चलता रहा, पर लत नहीं छूटी। कई बार छोड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया जब माउंट आबू में एक सोशल कॉन्फ्रेंस के दौरान मैंने राजयोग सीखा। नियमित अभ्यास और सकारात्मक वातावरण के प्रभाव से मात्र तीन महीनों में 30 वर्षों पुराना व्यसन छूट गया। ब्रह्माकुमारीज़ से मिले राजयोग ने मुझे आत्मबल, अनुशासन और नई दृष्टि दी।
आज मैं न केवल नशामुक्त हूँ, बल्कि अनेक लोगों को भी राजयोग जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर चुका हूँ।






