
“जब कोई बात बार-बार मन को डिस्टर्ब कर रही हो, और मन शांत न हो रहा हो—कुछ पल बैठें और अपने से पूछें: "क्या मैं ठीक हूं?" समाधान की ओर बढ़ें, भागें नहीं”
यह ध्यान आत्मनिरीक्षण की शक्ति को जाग्रत करता है और हमें अपने भीतर छिपी विजय-शक्ति से जोड़ता है। यह अनुभव कराता है कि समस्याएं हमें तोड़ने नहीं, बल्कि हमें हमारे असली स्वरूप—शक्तिशाली, निर्भय और महावीर आत्मा—का बोध कराने आती हैं। यह ध्यान हमें चिंता से उबारकर, आत्मबल और निर्णय क्षमता प्रदान करता है, जिससे हम परिस्थितियों के नहीं, अपने जीवन के स्वामी बनते हैं।
इसको सुनने के बाद आपको लगेगा कि “हां, मैं कर सकती हूं… सब कुछ संभव है, बस एक संकल्प से…”
How you want to feel
Life stages
ओम शांति..
कुछ पलों के लिए बॉडी को रिलैक्स करें.. सीधा अलर्ट बैठे.. यह कुछ पल .. अपने को शक्तिशाली बनाने के लिए हैं ! हम दिनभर में सबसे मिलते हैं .. सबका हाल-चाल पूछते हैं.. लेकिन पहले अपना हाल-चाल पूछें! क्या मैं ठीक हूं.. मेरा मन शांत है.. क्या कोई ऐसी बात है.. जो मुझे डिस्टर्ब कर रही है! अपने से भागे नहीं.. भागने से कोई प्रॉब्लम का सोल्युशन नहीं मिलता.. समस्या में समाधान स्वरूप बनना है.. हमें बातों की चिंता भी नहीं करनी.. लेकिन.. बातों का सामना जरूर करना है.. चिंता हमारी शक्ति को घटा देती है.. लेकिन.. अपना ध्यान देकर.. हम किसी भी बात का सामना कर सकते हैं!
अगर जीवन में कोई बात है.. कोई प्रॉब्लम है.. कोई चैलेंज है.. तो उसको मन की स्क्रीन पर सामने लाएं .. और अपने को बोले.. मैं आत्मा शक्तिशाली हूं! महावीर हूं.. निर्भय हूं.. विजय हूं.. मैं इस बात का सामना कर सकती हूं.. बार-बार अपने को याद दिलाएं.. मैं कौन हूं!
हम बातों के गुलाम नहीं है.. ना परिस्थितियों के मोहताज है.. हम तो मालिक है.. अपने मन बुद्धि के मालिक.. अपने कर्मों के मालिक.. और अपने कर्मों से हम अपनी तकदीर बनाते हैं.. इसलिए अपने जीवन के जो डोर है उसको अपने हाथ में ले.. अपने डिसीजन खुद ले..
हार-जीत गलती होना यह तो जीवन का हिस्सा है.. गलतियां किससे नहीं होती.. असफलता किसके जीवन में नहीं होती.. लेकिन उसमें दिल शिकस्त हो जाना.. उदास,परेशान और डिप्रेस्ड हो जाना.. यह मेरी चॉइस है..
इसलिए अपने को शक्तिशाली बनाकर .. अपने विघ्नों पर जीत पाकर.. निर्विघ्न बने! हम कर सकते हैं! केवल एक संकल्प की बात है..
जस्ट वन थॉट.. एक संकल्प है कैसे होगा..दूसरा संकल्प है.. हुआ पड़ा है! कैसे होगा नहीं.. हुआ पड़ा है! व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तन कर.. अपने जीवन को समर्थ बनाएं!
ओम शांति।
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