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“जब जीवन के मंच पर बार-बार असमंजस या अपेक्षाओं से घिर जाएँ, यह ध्यान आपको अपने सत्य कर्तव्य की याद दिलाएगा।”
इस ध्यान के पश्चात व्यक्ति जीवन को एक रंगमंच की तरह देखने लगता है जहाँ हर आत्मा अपना-अपना किरदार निभा रही है। इससे मन में किसी के प्रति शिकायत या अपेक्षा समाप्त हो जाती है और आत्म-कर्तव्य पर एकाग्रता बढ़ती है।
यह अनुभूति आत्मा को हीरो-पाट धारी बनाकर सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। परिणामस्वरूप, जीवन सरल, सहज और कर्तव्य-केंद्रित हो जाता है, जिससे आंतरिक शांति स्वतः प्राप्त होती है।
How you want to feel
Life stages
ओम शांति, एक मिनट के लिए स्वयं को अलग कर ले, अपने कर्म क्षेत्र से महसूस करें कि यह संपूर्ण संसार एक रंगमंच है। हर एक का अपना किरदार है और मेरा किरदार हीरो किरदार है। मैं हीरो का रोल अदा कर रहा हूं, जिसमें सदा सकारात्मकता ही है। किसी के लिए कोई बुरी भावना नहीं है। मैं स्वीकार करता हूं हर एक व्यक्ति को क्योंकि हर एक को अपना रोल मिला है। जिसका जैसा रोल, उसका वैसा कर्तव्य है। मैं यह भी जानता हूं, समझता हूं कि जो जैसा कर्तव्य करता है, वैसा ही फल पाता है, इसलिए मैं अपना संपूर्ण ध्यान केवल अपने कर्तव्य पर ही केंद्रित करता हूं। क्योंकि, मैं जो करूंगा वही मैं पाऊंगा। अपने मन को सर्व के लिए सकारात्मक बना ले। सब अपनी जगह सही है। मेरे लिए हर कार्य सफल हुआ ही पड़ा है, हर वह कार्य जो मुझे इस रंगमंच पर प्रदान किया गया है, मैं हीरो पात्रधारी एक्टर हूं। ओम शांति ओम शांति
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