
“जब मन किसी नशे, आदत या लत के आकर्षण में खिंच जाए और बाहरी सहारे की ओर भागने लगे, तब स्वयं को रोककर आत्मिक शक्ति को याद करने और परमात्मा के साथ जुड़कर शांति व स्थिरता का अनुभव करने के लिए।”
इस ध्यान के अभ्यास से आप अपने वास्तविक आत्मिक स्वरूप को अनुभव करते हैं। मन हल्का और शांत होता है तथा अपनी भावनाओं, आदतों और संस्कारों पर स्वामित्व का भाव मजबूत होता है। भय, असुरक्षा, कमजोरी और बाहरी सहारों की चाह धीरे-धीरे कम होने लगती है।
परमात्मा की दिव्य शक्तियों और सुनहरी किरणों का अनुभव आपके भीतर विश्वास, प्रसन्नता और स्वतंत्रता की भावना जगाता है। हर परिस्थिति में छिपे कल्याण को देखने की शक्ति मिलती है और यह अनुभूति गहरी होती है कि आप स्वस्थ, मुक्त और शक्तिशाली आत्मा हैं।
Life stages
ओम शांति। बिल्कुल आराम से बैठें। अपने मन को बाहर की दुनिया से हटाकर प्रकृति के बीच एकाग्र कीजिए। स्वयं को देखने का प्रयास कीजिए। मैं शक्ति हूँ। मैं चैतन्य ऊर्जा हूँ। मैं इस शरीर की मालिक आत्मा हूँ। मैं अति सूक्ष्म, ज्योत...
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