चार - Four subjects
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28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”02/04/1970“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”18/06/1974“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”02/02/1975“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”08/02/1975“निश्चय रूपी आसन पर अचल स्थिति”23/10/1975“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”07/02/1976“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”05/02/1977“महानता के आधार”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”05/02/1979“मधुबन निवासियों के साथ बापदादा की रूहरिहान''10/12/1979“पुण्य आत्माओं के लक्षण”08/11/1981“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”03/04/1983“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”07/03/1986“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”06/11/1987“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”04/12/1995“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''03/02/2005“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”30/11/2006“ज्वालामुखी तपस्या द्वारा मैं-पन की पूंछ को जलाकर बापदादा समान बनो तब समाप्ति समीप आयेगी''15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''02/04/2008”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
