14 जून 2026 को नागपुर (वसंत नगर सेवा केंद्र) में ब्रह्माकुमारीज़ के साइंटिस्ट, इंजीनियरिंग एवं आर्किटेक्ट विंग द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं पर्यावरण जागरूकता अभियान का भव्य समापन हुआ।
यह अभियान आबूरा (राजस्थान) से प्रारंभ होकर नागपुर (महाराष्ट्र) में संपन्न हुआ। लगभग 1000 किलोमीटर की यह यात्रा राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के 25 से अधिक गांवों एवं शहरों से होकर 20 दिनों में पूरी हुई। इस दौरान अभियान का उद्देश्य “मन के विचारों और पर्यावरण के गहरे संबंध” को जन-जन तक पहुँचाना रहा।
अभियान में यह संदेश प्रमुख रूप से साझा किया गया कि वर्तमान समय में बदलती मानवीय मनोवृत्ति और नकारात्मक विचार न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करते हैं, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन और प्राकृतिक आपदाओं से भी जुड़े हो सकते हैं। इस संदर्भ में प्रसिद्ध आध्यात्मिक एवं मेडिकल विद्वान डॉ. दीपक चोपड़ा के विचारों का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय परिवर्तन मानव चेतना और सोच से गहराई से जुड़े होते हैं।
इस अभियान के माध्यम से लगभग 10,000 से अधिक लोगों तक यह जागरूकता संदेश पहुँचाया गया कि यदि मन की सोच को सकारात्मक और शुद्ध बनाया जाए तो प्रकृति और जीवन दोनों में संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
समापन समारोह में बीके मोहन सिंघल, नागपुर सब-जोन प्रभारी बीके रजनी दीदी, वीए एनआईटी के निदेशक डॉ. प्रेमलाल, रामदेव बाबा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश पांडे सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने वर्तमान समय में मन और शरीर दोनों को पर्यावरण के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में यह भी विचार प्रस्तुत किया गया कि शिक्षा प्रणाली में केवल रोजगार उन्मुख कौशल ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए, जिससे ऐसे नागरिक, नेतृत्वकर्ता और उद्योगपति तैयार हों जो स्वभावतः नैतिकता, सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील हों।
साथ ही “थॉट लैब” जैसी अवधारणाओं के माध्यम से यह बताया गया कि सकारात्मक विचारों का मानव स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक प्रभाव होता है, जिसे मापने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
अंत में नागपुर ऑरेंज सिटी एवं भारत हृदय स्थल से इस अभियान में शामिल सभी यात्रियों का हार्दिक स्वागत किया गया और उनके सेवा भाव एवं समाज जागरण के प्रयासों की सराहना की गई।
यह अभियान आध्यात्मिक सशक्तिकरण को आधार मानते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन और पर्यावरण चेतना के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में संपन्न हुआ।





























