22 फरवरी 2026 को गायत्री परिवार, अंबिकापुर द्वारा संस्कारयुक्त समाज निर्माण के उद्देश्य से कुरीति उन्मूलन विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बी के विद्या दीदी को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। गोष्ठी का विषय था – वर्तमान समय में प्री-वेडिंग शूट एवं बलि प्रथा।
अपने संबोधन में बी के विद्या दीदी ने कहा कि
प्री-वेडिंग शूट एक आधुनिक प्रथा के रूप में तेजी से बढ़ रही है। यदि इसका उद्देश्य एक-दूसरे के विचारों को समझना और दोनों परिवारों के बीच निकटता बढ़ाना है, तो यह उचित है। किन्तु यह केवल फोटो खींचकर प्रचार-प्रसार और दिखावे तक सीमित न रह जाए, इसका विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर रिश्तों की मर्यादा, संस्कार और सादगी का पालन होना चाहिए तथा अनावश्यक और अत्यधिक खर्चों से बचना चाहिए।
बलि प्रथा के विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी जीव की हत्या करके किसी देवी-देवता को प्रसन्न नहीं किया जा सकता। यह एक सामाजिक अंधविश्वास है, जिसे पूरी तरह समाप्त करने की आवश्यकता है। वास्तविक बलि हमारे अहंकार, ‘मैं’ और ‘मेरेपन’ की होनी चाहिए। जब हम अपने भीतर की नकारात्मकताओं का त्याग करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में देवी को प्रसन्न कर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जितना हम संस्कारवान बनेंगे, उतना ही हमारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। जीवन का मूल मंत्र है – सदा दूसरों को सुख देना। जब हम दूसरों को सुख देते हैं, तभी हम स्वयं भी सच्चे सुख का अनुभव करते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रोताओं ने विषय की गंभीरता को समझते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। यह विचार गोष्ठी संस्कारयुक्त और कुरीति-मुक्त समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।



















