राजस्थान के माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के विशाल डायमंड हॉल में संस्था के 90वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ग्लोबल समिट 2026 एवं नवदशोत्सव आध्यात्मिक जागृति, आत्म-परिवर्तन और विश्व कल्याण के प्रेरणादायी संकल्प के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। “आध्यात्मिक जागृति द्वारा विश्व नव-निर्माण” की मूल भावना से प्रेरित इस वैश्विक आयोजन में देश-विदेश की प्रतिष्ठित हस्तियों, आध्यात्मिक विभूतियों, राजनेताओं, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

नौ दशकों की आध्यात्मिक यात्रा, अनगिनत जीवनों में शांति, शक्ति और सद्भाव का संचार तथा मानवता की सेवा के प्रति अटूट समर्पण इस नवदशोत्सव के प्रमुख आकर्षण रहे। 90 दीप प्रज्वलित कर संस्था की गौरवशाली यात्रा को नमन किया गया और विश्व परिवर्तन के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान की गई।

भव्य उद्घाटन समारोह एवं विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता
उद्घाटन समारोह संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. मोहिनी दीदी के सानिध्य में तथा भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष शुभकामना संदेश भी प्रस्तुत किया गया। ब्रह्माकुमारीज़ के अतिरिक्त महासचिव एवं ग्लोबल समिट के आयोजन सचिव राजयोगी बी.के. डॉ. मृत्युंजय भाई जी ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का स्वागत किया।


समारोह में नोएडा फिल्म सिटी एवं मारवाह स्टूडियोज के संस्थापक डॉ. संदीप मारवाह को ‘ज्वेल ऑफ भारत’ सम्मान तथा डीडी न्यूज़ के एंकर एवं प्रधान संपादक श्री सुधीर चौधरी को ‘राष्ट्रीय चेतना पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। पद्मश्री सम्मानित प्रख्यात पार्श्व एवं भक्ति गीत गायिका श्रीमती अनुराधा पौडवाल, न्यूज़ एंकर श्री अमन चोपड़ा और मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की सीईओ श्रीमती रक्तिम दास ने भी अपने विचार साझा किए।



संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. मुन्नी दीदी ने अपनी प्रेरणाएँ दीं, जबकि अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी ने उपस्थित जनसमूह को राजयोग ध्यान का अभ्यास कराया। कार्यक्रम का संचालन बी.के. शिविका ने किया। संस्था की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित विशेष मल्टीमीडिया प्रस्तुति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को अविस्मरणीय बना दिया।

वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं प्रबुद्ध व्यक्तित्वों के प्रेरणादायी विचार

उद्घाटन से पूर्व आयोजित आशीर्वाद सत्र में संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ग्लोबल पीस फाउंडेशन एवं इंडो-पैसिफिक पीस फोरम के अध्यक्ष डॉ. मार्कंडेय राय, हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्री कुलदीप सिंघानिया, श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस के कुलाधिपति श्री बी.एन. नरसिम्हा मूर्ति सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
दिल्ली स्थित अमृता विद्यालयम की प्राचार्य ब्रह्मचारिणी चिन्मयामृता चैतन्य और ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर श्री कल्पतरु संस्थान के संस्थापक श्री विष्णु लांबा को ‘गार्डियन ऑफ ह्यूमैनिटी’ सम्मान से नवाजा गया।

वक्ताओं ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ की नौ दशकों की यात्रा एक छोटे से बीज से शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक जागृति के विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित होने की प्रेरणादायी गाथा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आध्यात्मिकता संसार से विमुख होने का मार्ग नहीं, बल्कि अधिक विवेक, करुणा, उत्तरदायित्व और प्रेम के साथ संसार में अपनी भूमिका निभाने की कला है।
आत्म-जागृति से वैश्विक परिवर्तन तक
ग्लोबल समिट के विभिन्न सत्रों में ब्रह्माकुमारीज़ की अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता बी.के. शिवानी दीदी ने ‘Awakening the Self’ विषय के माध्यम से आत्म-पहचान, आंतरिक शक्ति और आत्म-परिवर्तन का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि दूसरों के नकारात्मक व्यवहार या गलतियों को बार-बार मन में दोहराने के बजाय अपनी आध्यात्मिक पहचान और सकारात्मक स्वरूप का स्मरण करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि
जब व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और प्रतिक्रियाओं पर जागरूकता के साथ कार्य करता है, तब उसके व्यवहार में परिवर्तन आता है और वही परिवर्तन परिवार, समाज तथा विश्व में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. मोहिनी दीदी ने विश्व शांति के सामूहिक संकल्प को सुदृढ़ करने की प्रेरणा दी। राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी ने दादी जानकी जी के अनुभवों का उल्लेख करते हुए समझाया कि किसी से बातचीत करने से पहले एक क्षण स्वयं को ‘ओम शांति’ की अनुभूति में स्थित करना मन को शांत और स्थिर बनाने में सहायक है।
संस्कृति, संगीत और आध्यात्मिक अनुभूति का संगम

समिट के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आध्यात्मिक संदेश को कलात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की। इंदौर हॉस्टल की कुमारियों की भावपूर्ण प्रस्तुति ‘आनंद सरगम’ ने कला, अध्यात्म और आत्म-जागृति को एक सूत्र में पिरोया। ढोल-ताशा वादकों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की छटा बिखेरी, जबकि पद्मश्री सम्मानित गायिका श्रीमती अनुराधा पौडवाल की भक्तिमय संगीत संध्या ने वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
तीन बार ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित एवं पद्मश्री अलंकृत संगीतकार रिकेश के लाइव कॉन्सर्ट और महाराष्ट्र के आकार फाउंडेशन की प्रस्तुतियों ने समापन समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
नौ दशकों की इस गौरवगाथा में एक भावपूर्ण अवसर उन तपस्वी आत्माओं के सम्मान का भी रहा, जिन्होंने अपने जीवन के पाँच दशक से अधिक समय ईश्वरीय सेवा और विश्व कल्याण के लिए समर्पित किया। ग्लोबल समिट में ऐसे 200 वरिष्ठ ब्रह्माकुमारी दीदियों एवं ब्रह्माकुमार भाइयों का भव्य सम्मान किया गया।

तीन महत्वपूर्ण प्लेनरी सत्रों में विश्व कल्याण पर मंथन
प्लेनरी सत्र 1: बेहतर विश्व के लिए आध्यात्मिक नेतृत्व
इस सत्र में संतों, राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योगपतियों और मीडिया जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने नैतिक नेतृत्व, करुणा, विश्वास और मानवीय मूल्यों की भूमिका पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित नेतृत्व समाज में विश्वास और सकारात्मक परिवर्तन को प्रोत्साहित कर सकता है।
प्लेनरी सत्र 2: एक नई दुनिया का सह-निर्माण
शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, व्यापार, अर्थव्यवस्था और युवा सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और प्रबुद्ध व्यक्तियों ने आध्यात्मिक मूल्यों तथा सामूहिक प्रयासों के माध्यम से एक बेहतर और संतुलित विश्व के निर्माण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने इस विचार को प्रमुखता से रखा कि दुनिया में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से शुरुआत करनी होगी। “वह परिवर्तन स्वयं बनिए, जिसे आप दुनिया में देखना चाहते हैं” का संदेश इस सत्र की प्रमुख प्रेरणा रहा।
प्लेनरी सत्र 3: सामूहिक चेतना की शक्ति – व्यक्तिगत जागृति से वैश्विक परिवर्तन तक
इस सत्र में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने व्यक्तिगत जागृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से विश्व परिवर्तन के महत्व पर विचार व्यक्त किए। राजयोग ध्यान और मध्य प्रदेश के लोक नृत्य समूह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सत्र को विशेष गरिमा प्रदान की।
इस अवसर पर संकल्प इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री रजत कुमार अग्रवाल को ‘गार्डियन ऑफ ह्यूमैनिटी’ तथा परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव को ‘ज्वेल ऑफ भारत’ सम्मान से नवाजा गया। सत्र ने इस संकल्प को सुदृढ़ किया कि व्यक्तिगत परिवर्तन ही वैश्विक कल्याण की आधारशिला है।
नशा मुक्त भारत अभियान को मिला नया प्रोत्साहन
समिट के अंतर्गत नशा मुक्त भारत अभियान से संबंधित पुरस्कार एवं सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस पहल के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण, विशेषकर युवाओं में जागरूकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के संकल्प को नई ऊर्जा मिली।
वक्ताओं ने ब्रह्माकुमारीज़ की बहनों एवं भाइयों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि इतने विशाल आयोजन में अनुशासन, शांति और सहयोग का वातावरण आध्यात्मिक मूल्यों की व्यावहारिक शक्ति को दर्शाता है।
भव्य समापन समारोह एवं विकसित भारत का संकल्प

ग्लोबल समिट 2026 एवं नवदशोत्सव के समापन सत्र में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन तथा राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री मदन राठौर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने ब्रह्माकुमारीज़ की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, अनुशासन और सेवा की प्रेरणा दी है। उन्होंने संस्था के व्यापक अंतरराष्ट्रीय सेवा कार्यों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रसार में उसके योगदान को भी रेखांकित किया।
समापन सत्र में राजयोग के व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव का भी उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने बताया कि नियमित राजयोग अभ्यास मन को स्थिर बनाने, परिस्थितियों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय विचारपूर्वक उत्तर देने तथा सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हो सकता है। इस संदर्भ में देश के युवाओं को स्थिर मन, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों के साथ विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा दी गई।
नवदशोत्सव का संदेश: स्वयं में जागृति, जीवन में श्रेष्ठता और कर्मों में विश्व कल्याण

ब्रह्माकुमारीज़ के 90वें स्थापना वर्ष को समर्पित ग्लोबल समिट 2026 केवल एक भव्य आयोजन नहीं, बल्कि आत्म-जागृति, आध्यात्मिक नेतृत्व, मानवीय मूल्यों और वैश्विक सद्भाव के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी मंच बना।
नौ दशकों की आध्यात्मिक यात्रा ने यह संदेश पुनः सशक्त किया कि जब व्यक्ति अपने भीतर शांति, प्रेम, करुणा और सकारात्मकता को विकसित करता है, तब उसके विचारों और कर्मों के माध्यम से समाज में परिवर्तन की नई संभावनाएँ जन्म लेती हैं।
स्वयं में जागृति, जीवन में श्रेष्ठता और कर्मों में विश्व कल्याण — इसी प्रेरणादायी संकल्प के साथ ग्लोबल समिट 2026 एवं नवदशोत्सव ने एक शांतिपूर्ण, सद्भावपूर्ण और मूल्यनिष्ठ विश्व के नव-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
























