प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सद्भावना भवन में पूर्व प्रशासिका, राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की पुण्यतिथि पर “स्मृति दिवस” बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर लगभग 120 बीके भाई-बहन एकत्रित हुए और संगठित रूप से विश्व-बंधुत्व व सद्भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में सभी ने सामूहिक रूप से राजयोग ध्यान का अभ्यास किया और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित किया।
इस आयोजन के दौरान दादी जी के प्रेरणादायी जीवन, उनके त्याग और सेवा की स्मृति को ताज़ा किया गया। उनकी वाणी “अपना चरित्र ऐसा बनाना चाहिए जिसमें अंशमात्र भी कमी न हो” ने सभी को अपने जीवन में सत्य, शांति और करुणा जैसे उच्च आदर्शों को धारण करने की प्रेरणा दी।
दादी प्रकाशमणि जी के योगदान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। उन्हें ‘शांति दूत अवॉर्ड’ (Messenger of Peace) से सम्मानित किया गया तथा संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) ने भी उन्हें विश्व शांति की प्रेरक हस्ती के रूप में मान्यता प्रदान की। साथ ही, उन्हें कई देशों और संस्थानों द्वारा अनेक पुरस्कारों से अलंकृत किया गया, जिससे वे विश्वभर में आध्यात्मिक नेतृत्व की प्रतीक बनीं।
इस अवसर पर बीके शीला दीदी ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि दादी प्रकाशमणि जी का जीवन त्याग, सेवा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम था, जो आज भी हम सभी के लिए मार्गदर्शक है।
“दादी प्रकाशमणि स्मृति दिवस” ने सभी उपस्थित जनों को यह स्मरण कराया कि आत्मबल, चरित्र और करुणा ही जीवन के वास्तविक आभूषण हैं। इस आयोजन ने जनसमूह को आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

























