नई दिल्ली, हरिनगर। ब्रह्माकुमारी संस्था के शिक्षा प्रभाग द्वारा विश्व एकता और विश्वास हेतु नई शिक्षा विषय पर डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में दिल्ली-एनसीआर एवं देशभर के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 500 शिक्षाविदों ने सहभागिता की।
सम्मेलन दो सत्रों में सम्पन्न हुआ, जिसमें देश के शीर्ष शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आध्यात्मिक नेताओं ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने शिक्षा प्रणाली में विज्ञान और तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, नैतिक ज्ञान और आध्यात्मिक प्रज्ञा के समावेश पर बल दिया।
मुख्य अतिथि दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्री एवं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ विश्व की सबसे बड़ी संस्था है जो नारी शक्ति का परिचायक है। यहां की आध्यात्मिक शिक्षा श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण करती है। उन्होंने राजयोग विचार प्रयोगशाला प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसे अद्भुत बताया।
प्रमुख आकर्षण बी.के. शिवानी का उद्बोधन रहा। उन्होंने कहा कि सृष्टि का आरंभ संकल्पों से होता है और मानव संसार संस्कारों से निर्मित होता है। बाहरी संसाधनों से पहले व्यक्ति का आंतरिक सशक्तिकरण आवश्यक है। आध्यात्मिक ज्ञान और सहज राजयोग ध्यान के माध्यम से सुखद, सफल और सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मूल्य-आधारित शिक्षा और दृढ़ आत्मविश्वास ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाएंगे।
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम ने छात्रों में बढ़ते अवसाद पर चिंता व्यक्त की और आध्यात्मिक शिक्षा को तकनीकी शिक्षा के साथ अनिवार्य बताया। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था के स्वयं पोर्टल और राजयोग लैब को प्रशंसनीय बताया।
शिक्षा प्रभाग के अध्यक्ष बी.के. मृत्युंजय ने कहा कि नई शिक्षा, नए संस्कार और नई सृजन प्रक्रिया का कार्य परमात्मा द्वारा कराया जा रहा है, जिससे भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा।
मुख्य आयोजिका बी.के. डॉ. शुक्ला ने आंतरिक सशक्तिकरण हेतु राजयोग साधना को आधार बताया। बी.के. चन्द्रिका ने प्रेरणादायक विचार रखे।
कार्यक्रम के समापन पर बी.के. आशा ने सामूहिक राजयोग ध्यान द्वारा डिवाइन हीलिंग का अभ्यास कराया। उपस्थित सभी ने गहन शांति, शक्ति और आनंद का अनुभव किया।
इस प्रकार यह सम्मेलन शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों के लिए आध्यात्मिक उन्नति, मूल्यों की जागृति और शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ।






























